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प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीर

प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीर
May 03, 2026, 10:44 AM
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Posted By Preeti Kumari

Tired of harassment, elderly man attempts suicide, social worker Aman Kabir helps him


वाराणसी: एक मार्मिक घटना सामने आई है, जहां बिहार के रोहतास जिले का एक वृद्ध व्यक्ति प्रताड़ना से तंग आकर काशी पहुंच गया. बताया जा रहा है कि एक अकेला युवक उसे लगातार परेशान और प्रताड़ित करता था, जिससे वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था. लगातार हो रही इस प्रताड़ना से परेशान होकर वृद्ध ने अपना घर छोड़ दिया और काशी आ गया, यहां आकर भी वह गहरे तनाव में था और जिंदगी से निराश होकर आत्महत्या करने का मन बना चुका था.


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बुजुर्ग के सहारे बने ये समाजसेवी


इसी दौरान समाजसेवी कार्यकर्ता अमन कबीर की नजर उस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए वृद्ध को रोका और उससे बातचीत कर उसकी स्थिति को समझा. अमन कबीर ने धैर्यपूर्वक उसे समझाया और उसका हौसला बढ़ाया, जिसके बाद वृद्ध ने आत्महत्या का इरादा छोड़ दिया. इसके बाद अमन कबीर उस वृद्ध को काशी कुष्ठ सेवा संघ के वृद्ध आश्रम लेकर गए, जहां फिलहाल वह रह रहा है.


ककपपु


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बुजुर्ग को मिला आश्रम का सहारा


आश्रम में उसे रहने और खाने की सुविधा के साथ-साथ देखभाल भी मिल रही है, जिससे अब वह सुरक्षित माहौल में अपना जीवन बिता रहा है. यह घटना न सिर्फ मानवता की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही समय पर की गई मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है, समाजसेवी अमन कबीर जैसे लोग आज के समय में उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो किसी न किसी कारण से जीवन से निराश हो जाते हैं.


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अखिलेश पर बरसे ओम प्रकाश राजभर, बोले- मुगलों की सेना में भर्ती होकर अत्याचार करते थे यादव
अखिलेश पर बरसे ओम प्रकाश राजभर, बोले- मुगलों की सेना में भर्ती होकर अत्याचार करते थे यादव
Om Prakash Rajbhar lashed out at Akhilesh, saying – Yadavs used to commit atrocities after joining the Mughal army.UP News: उत्तर- प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानि (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि, यादव पहले मुगलों की सेना में भर्ती होकर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते थे. बाद यही भूमिका अंग्रेजों की सेना में निभाते थे, अत्याचार की घटनाएं अब भी जारी हैं.जिसका नतीजा हर किसी के सामने है, बाराबंकी और मऊ की घटना जिसे देख इस बात का साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है.राजभर ने साधा सपा पर निशाना दरअसल, बीते शनिवार को कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानि सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर एक कार्यक्रम के सिलसिले में बिलया जिले के रसड़ा में जनता को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का काम अब सिर्फ और सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना और सोशल मीडिया पर लिखने तक ही सीमीत रह गया है. इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि, यादव पहले मुगलों की सेना में भर्ती होकर अत्याचार करते थे, जिसके चलते उनकी सरकार ही हमेशा-हमेशा के लिए चली गई. अब शायद ही उनकी सरकार बनना मुश्किल है. सरकार ना बनने की चिंता की वजह से अब अखिलेश यादव अक्सर सोशल मीडिया पर ही नजर आते है, क्योंकि उन्हें भी पता है कि अब उनकी सरकार आना काफी मुश्किल है.Also Read: विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की शुरू नई व्यवस्था, 90 दिनों तक बाबा के नहीं होंगे दर्शनओम प्रकाश राजभर ने सपा पर कटाक्ष कर कहा कि, महंगाई का शोर मचाने वालों को 15 साल पीछे जाकर हालात की तुलना करनी चाहिए, उन्हें ये देखना चाहिए की पहले की तुलना में अब के हालात कितने बेहतर है, गांवों में मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ी है, लोगों की क्रय शक्ति में इजाफा हुआ है.https://www.youtube.com/watch?v=dus5O9lvQhE
बनारस की इन प्राचीन मंदिरों की बदलेगी सूरत, तैयार हुआ मास्टर प्लान
बनारस की इन प्राचीन मंदिरों की बदलेगी सूरत, तैयार हुआ मास्टर प्लान
These ancient temples of Banaras will be transformed, master plan readyवाराणसी: पूर्वांचल के गाजीपुर और वाराणसी के तीन प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों और खंडहर हो चुके स्थानों को संरक्षित किया जाएगा. इसके लिए पर्यटन और पुरातत्व विभाग ने एक जबरदस्त मास्टर प्लान तैयार किया है. जिस प्राचीन मंदिरों के लिए ये प्लान तैयार किया गया है उनमें अश्वारी शिव मंदिर, गोपाल लाल विला और पाली राधा कृष्ण मंदिर शामिल है, जिनके जर्जर और बेकार हुई संरचनाओं को दुबारा से मजबूत कर यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित किये जाने का फैसला लिया गया है.ऐतिहासिक मंदिरों की जल्द मरम्मत इस प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की मरम्मत कराने में राजातालाब अश्वारी स्थित शिव मंदिर, अर्दली बाजार स्थित गोपाल लाल विला और गाजीपुर के पाली स्थित राधा कृष्ण मंदिर शामिल हैं, जर्जर हुए इन मंदिरों की दुबारा से खूबसूरती निखारी जाएगी, ताकि पर्यटन और श्रद्धालुओं के लायक बन सके. जो विकास के साथ-साथ रोजगार का भी जरिया बनेगा.बात करें अश्वारी स्थित शिव मंदिर की जो वाराणसी के राजातालाब क्षेत्र के अश्वारी स्थित शिव मंदिर का इतिहास पेशवाओं से जुड़ा है. इस मंदिर की बनावट, विशेषकर इसके शिखर और नक्काशीदार पत्थर, उन उत्तर भारतीय मंदिरों की याद दिलाते हैं, जिनका पुनर्निर्माण पेशवाओं ने 290 वर्ष पहले वाराणसी के धार्मिक पुनरुद्धार के समय कराया था. मंदिर के गर्भगृह और बाहरी दीवारों पर पेशवा कालीन निर्माण शैली स्पष्ट रूप से झलकती है, यह उस दौर की याद दिलाता है जब पेशवाओं ने काशी को सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए शहर के बाहरी इलाकों तक मंदिरों का जाल बिछाया था.गोपाल लाल विला अर्दली बाजार, एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाल लाल विला आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, इस भवन के खंडहर लगभग 50 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में स्थित हैं।इसके भीतर छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं. फिलहाल इस संपत्ति पर शिक्षा विभाग का मालिकाना हक है, यहां स्वामी विवेकानंद ने अपने अंतिम दिनों में लगभग सवा महीने तक प्रवास किया था. वर्ष 1902 में जब विवेकानंद बीमार हुए, तब उन्हें यहीं पर स्वास्थ्य लाभ मिला था.गाजीपुर का राधा कृष्ण मंदिर400 वर्ष पुराने मंदिर का निर्माण 56 खंभों के साथ किया गया है, पुरनिए बताते हैं कि मंदिर का निर्माण राजस्थानी शैली में हुआ है, मंदिर में राधा कृष्ण की अष्टधातु की मूर्ति मौजूद है, ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ब्रिटानी बैंक में मंदिर के नाम से कुछ पैसा भी जमा था, जिसका आज भी कुछ ब्याज मिलता है. गाजीपुर का पंच मंदिर, वाराणसी में पंचकोशी यात्रा मार्ग पर शिव मंदिर एवं एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाललाल विला अपनी प्राचीन वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, इसे इस आधार पर विकसित किया जा रहा है.Also Read: इन सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल, मरीजों को नहीं मिल रही दवाइयां
इन सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल, मरीजों को नहीं मिल रही दवाइयां
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These government hospitals are in a bad state, patients are not getting medicines.Varanasi News: सरकारी अस्पताल अक्सर गरीबों का सहारा होता है, मगर जब यहां से भी इन्हें मायूसी मिलती है तो काफी सोचने वाली है. जी हां, एक ऐसा नजारा जो उत्तर-प्रदेश के वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त मिल तो रहा है, लेकिन मरीजों और उनके तीमारदारों को कॉटन बैंडेज, सर्जिकल ब्लेड और यहां तक कि टांका लगाने वाला धागा तक अस्पताल के बाहर स्थित निजी दुकानों से खरीदना पड़ रहा है. ये स्थिति ऐसे समय पर देखने को मिल रही है जब वाराणसी को बीएचयू समेत जिले के 17 अस्पतालों में सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के लिए आए दिन 62.19 करोड़ के बजट में 5.56 करोड़ रुपये तक मरीजों के नाम पर खर्च नहीं कर पाता है. हालांकि, बीएचयू समेत कई अस्पतालों में यह समस्या आम है, फिर भी अपनी हरकतों से बाज ना आने वाला ये स्वास्थ्य विभाग पर्याप्त मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध होने का झूठा दावा खुलेआम करता है. जो बड़े ही शर्म की बात है.अस्पताल के बजाय बाहर से खरीदनी पड़ रही दवाएं वहीं, कई गंभीर सर्जरी के मामलों में तो सर्जिकल किट और एनेस्थीसिया की दवाएं भी बाहर से मंगाना अब एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है, बीएचयू, मंडलीय, जिला अस्पताल समेत कई सीएचसी-पीएचसी में यह स्थिति है, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को सभी सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही हैं. बावजूद इसके मरीजों को सुविधाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. जिला स्वास्थ्य समिति की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में अस्पतालों में सुविधाओं पर खर्च करने के लिए आए 62.19 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, लेकिन प्रसव के दौरान बाहर से विक्रिल 2-0 (सीसीएन 2317), विक्रिल 1 नं. (2347), विक्रिल (2437), प्रोलीन 0 नं. के सूचर बाहर से ज्यादतर मंगाए जाते हैं.Also Read: प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की आत्महत्या की कोशिश, मददगार बने समाजसेवी अमन कबीरबता दें, सलारपुर के रहने वाले गोपाल ने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए बीएचयू एमसीएच विंग में भर्ती कराया था, चिकित्सकों ने ऑपरेशन से 30 मिनट पहले उन्हें सादे पर्चे पर कुछ सामान लिखकर लाने को कहा, तभी गोपाल ने तत्काल अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से 4870 रुपये का सामान खरीदा, इसमें दो ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले टांके, तीन इंजेक्शन और एक कॉटन का बड़ा पैकेट शामिल था.सर्जिकल सामानों का नहीं कोई निश्चित दामबताया जा रहा है कि, सर्जिकल सामानों का कोई निश्चित दाम नहीं हाते है. कॉटन, बैंडेज एमआरपी के अलावा अलग-अलग दरों पर भी बाजार में बिकते हैं, जिसकी जितनी पहुंच, उसे उतना ही सस्ता सामान मिल रहा है. उदाहरण के लिए 200 ग्राम के कॉटन की एमआरपी 150 से 180 रुपये के बीच होती है, वहीं इसकी बिक्री 80-150 रुपये के बीच होती है. उसी प्रकार सर्जिकल ब्लेड अलग-अलग नंबर और साइज के अनुसार 10 से 35 रुपये में बिक रहे हैं. अस्पतालों में सभी दवाएं और जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, बहुत कम मामलों में कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें बाहर से लिखा जाता है. उन दवाओं को भी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.https://www.youtube.com/watch?v=cXbiN13VBxk