16 साल पुराने मामले में सात कांग्रेसी बरी, कहा न्याय पर रहा भरोसा

वाराणसी: आंदोलन से जुडे मुकदमे में 16 वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, न्यायालय ने वर्ष सात कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया है. इस ऐतिहासिक निर्णय पर कांग्रेसियों ने न्याय पर भरोसा जताया. बता दें कि वर्ष 2010-11 में तत्कालीन सरकार की नीतियों के विरोध में नगर निगम परिसर में एक लोकतांत्रिक आंदोलन आयोजित किया गया था. इस आंदोलन के दौरान प्रशासन ने कांग्रेस नेताओं राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय सहित कुल सात कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था.

निर्दोष कार्यकर्ताओं ने की न्याय की तारीफ
इस मामले में राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय, राजेन्द्र मिश्रा, घनश्याम सिंह, पुन्नूलाल बिन्द, गुलाम हैदर, प्रमोद सोनकर सहित अन्य पर आरोप लगाए गए थे. न्यायालय ने सभी पक्षों के तर्क, साक्ष्य और परिस्थितियों का गहन परीक्षण करते हुए अपना अंतिम निर्णय सुनाया, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया. यह निर्णय निर्दोष कार्यकर्ताओं के लिए राहत भरा है.

राघवेंद्र चौबे- कांग्रेस कार्यकर्ता कभी डरने वाले नहीं
महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इस अवसर पर कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता कभी डरने वाले नहीं हैं. हम हमेशा से गलत नीतियों का विरोध करते आए हैं और आम जनता के हित के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे हैं. हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था. उन्होंने कहा, "जैसा कि कहा जाता है— 'ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं', आज यह बात सच साबित हुई है और हमें न्याय मिला है। यह सत्य और न्याय की जीत है."

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इसी के आगे उन्होंने कहा कि वर्षों तक हमारे साथियों ने संघर्ष किया और अंततः न्यायपालिका ने सच्चाई को स्वीकार किया. हम न्यायालय का हृदय से धन्यवाद करते हैं, जिसने निष्पक्ष और साहसिक निर्णय दिया. हम आगे भी जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करते रहेंगे और जनता की आवाज को मजबूती से उठाते रहेंगे.

बताया कि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह और उनकी टीम ने पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ पैरवी की, जिसका परिणाम आज हम सभी के सामने है. उनके प्रयासों के लिए हम हृदय से आभारी हैं. यह फैसला उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सत्य और न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं. यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि न्याय में भले ही समय लगे, लेकिन न्याय अवश्य मिलता है.



