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16 साल पुराने मामले में सात कांग्रेसी बरी, कहा न्‍याय पर रहा भरोसा

16 साल पुराने मामले में सात कांग्रेसी बरी, कहा न्‍याय पर रहा भरोसा
Mar 31, 2026, 12:33 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: आंदोलन से जुडे मुकदमे में 16 वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, न्यायालय ने वर्ष सात कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया है. इस ऐतिहासिक निर्णय पर कांग्रेसियों ने न्‍याय पर भरोसा जताया. बता दें कि वर्ष 2010-11 में तत्कालीन सरकार की नीतियों के विरोध में नगर निगम परिसर में एक लोकतांत्रिक आंदोलन आयोजित किया गया था. इस आंदोलन के दौरान प्रशासन ने कांग्रेस नेताओं राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय सहित कुल सात कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था.


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निर्दोष कार्यकर्ताओं ने की न्याय की तारीफ


इस मामले में राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय, राजेन्द्र मिश्रा, घनश्याम सिंह, पुन्नूलाल बिन्द, गुलाम हैदर, प्रमोद सोनकर सहित अन्य पर आरोप लगाए गए थे. न्यायालय ने सभी पक्षों के तर्क, साक्ष्य और परिस्थितियों का गहन परीक्षण करते हुए अपना अंतिम निर्णय सुनाया, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया. यह निर्णय निर्दोष कार्यकर्ताओं के लिए राहत भरा है.


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राघवेंद्र चौबे- कांग्रेस कार्यकर्ता कभी डरने वाले नहीं


महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इस अवसर पर कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता कभी डरने वाले नहीं हैं. हम हमेशा से गलत नीतियों का विरोध करते आए हैं और आम जनता के हित के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे हैं. हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था. उन्होंने कहा, "जैसा कि कहा जाता है— 'ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं', आज यह बात सच साबित हुई है और हमें न्याय मिला है। यह सत्य और न्याय की जीत है."


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इसी के आगे उन्होंने कहा कि वर्षों तक हमारे साथियों ने संघर्ष किया और अंततः न्यायपालिका ने सच्चाई को स्वीकार किया. हम न्यायालय का हृदय से धन्यवाद करते हैं, जिसने निष्पक्ष और साहसिक निर्णय दिया. हम आगे भी जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करते रहेंगे और जनता की आवाज को मजबूती से उठाते रहेंगे.


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बताया क‍ि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह और उनकी टीम ने पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ पैरवी की, जिसका परिणाम आज हम सभी के सामने है. उनके प्रयासों के लिए हम हृदय से आभारी हैं. यह फैसला उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सत्य और न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं. यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि न्याय में भले ही समय लगे, लेकिन न्याय अवश्य मिलता है.

सारनाथ में पुलिसिंग का रियलिटी चेक, विवेचना से साइबर सुरक्षा तक परखी तैयारी
सारनाथ में पुलिसिंग का रियलिटी चेक, विवेचना से साइबर सुरक्षा तक परखी तैयारी
वाराणसी: पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने मंगलवार 22 सितंबर को थाना सारनाथ का निरीक्षण कर सर्किल सारनाथ के अंतर्गत आने वाले थानों की पुलिसिंग, लंबित एवं कालबाधित विवेचनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों को अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर पुलिसिंग और जनसुनवाई को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए. लंबित और कालबाधित विवेचनाओं की समीक्षा करते हुए प्रत्येक मामले में गुणवत्तापूर्ण साक्ष्य संकलन, प्रभावी पर्यवेक्षण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया.‘थाना गोद लेने’ की पहल के तहत संबंधित अधिकारियों को थानों की कार्यप्रणाली, अपराध नियंत्रण, जनसुनवाई और पुलिसकर्मियों के कल्याण की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए. निरीक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों से साइबर सुरक्षा, प्रतिबिम्ब एप, सीसीटीएनएस, आरटीसी, जेडएफडी, फॉरेंसिक जांच, साक्ष्य संकलन, सीडीआर और आईडीपीआर से जुड़े विषयों की जानकारी ली गई. पुलिस आयुक्त ने तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया.मिशन शक्ति केंद्र की महिला पुलिसकर्मियों को विद्यालयों, हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा महिलाओं और छात्राओं से संवाद बढ़ाने को कहा गया. इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच, महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई और 1090, 112 व 1930 हेल्पलाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए.रिक्रूट बने सवालों के ‘स्मार्ट’ जवाबपुलिस आयुक्त ने नए रिक्रूट आरक्षियों से साइबर अपराध, नए कानून, सीसीटीएनएस और फॉरेंसिक सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए. बेहतर प्रदर्शन करने वाले 6 रिक्रूट आरक्षियों को ₹500-₹500 का नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया. इनमें अनुप्रिया पटेल — थाना चोलापुर, पूनम देवी — थाना चौबेपुर, प्रियांशु दूबे — थाना चौबेपुर, रजत शाही — थाना सारनाथ, प्रियंका देवी — थाना सारनाथ और गार्गी सिंह — थाना सारनाथ शामिल हैं.पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों और थाना प्रभारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने, जाम की स्थिति रोकने और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के निर्देश दिए. थाना परिसर में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, आगंतुकों के लिए बेहतर व्यवस्था, महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग शौचालय और पुलिस मेस में स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया. निरीक्षण के दौरान डीसीपी वरुणा जोन राजेश कुमार पाण्डेय, एडीसीपी वरुणा जोन लिपि नगायच सहित संबंधित एसीपी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे.
बीएचयू केंद्रीय कार्यालय का घेराव, चीफ प्रॉक्टर को हटाने की उठाई मांग, सुरक्षाकर्मियों से हुई धक्का मुक्की
बीएचयू केंद्रीय कार्यालय का घेराव, चीफ प्रॉक्टर को हटाने की उठाई मांग, सुरक्षाकर्मियों से हुई धक्का मुक्की
वाराणसी : बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ छात्र लामबंद हो गए हैं. इसी क्रम में बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया. छात्रों के केंद्रीय कार्यालय की ओर बढ़ने की सूचना पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम मौके पर पहुंच गई और छात्रों को रोकने का प्रयास किया. इस दौरान छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर को तत्काल पद से हटाने की मांग की. अपनी मांगों को लेकर परिसर में दीवार लेखन का भी सहारा लिया. हालांकि कई स्‍थानों पर लेखने को मिटाने का प्रयास भी किया गया.छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर छात्र संगठनों में नाराजगी है. आरोप है कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद उनके खिलाफ जांच कमेटियां गठित की जाती हैं और उन्हें कार्यालय बुलाकर पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से परेशान किया जाता है.छात्र पल्लव ने कहा कि चीफ प्रॉक्टर के निर्देश पर कई मामलों में छात्रों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं हुई हैं. उनका कहना है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने वाले छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है. इसी को लेकर एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रॉक्टोरियल व्यवस्था में तत्काल बदलाव की मांग की है.छात्रों ने रखीं नौ प्रमुख मांगें• चीफ प्रॉक्टर व प्रोक्टोरियल बोर्ड को तत्काल बर्खास्त किया जाए.• छात्रों पर दर्ज मुकदमे व दंडात्मक कार्रवाई वापस ली जाए.• छात्रों के उत्पीड़न व अभद्रता पर तत्काल रोक लगे.• 12 सितंबर की प्रेक्षागृह आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो.• विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगे.• संवेदनशील स्थानों पर CCTV व डार्क स्पॉट पर स्ट्रीट लाइट लगे.• मधुवन उद्यान सहित सार्वजनिक स्थलों की निगरानी बढ़े; नशाखोरी पर रोक लगे.• खाद्य दुकानों पर CCTV व अनिवार्य रेट लिस्ट हो.• सुरक्षाकर्मियों के वेतन-सेवा शर्तों में समानता व उत्पीड़न पर रोक सुनिश्चित हो.
पिशाच मोचन कुंड में डूबकर युवक की मौत, अस्पताल से शव लेकर भागे परिजन, पुलिस ने ऐसे पकड़ा
पिशाच मोचन कुंड में डूबकर युवक की मौत, अस्पताल से शव लेकर भागे परिजन, पुलिस ने ऐसे पकड़ा
वाराणसी : पिशाच मोचन कुंड में बुधवार को मलदहिया मलिन बस्ती के रहने वाले एक युवक की डूबने से मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही सिगरा थाने की पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और मशक्‍कत के बाद युवक के शव को कुंड से बाहर निकाला गया. इस दौरान पुलिसकर्मी शव को लेकर कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल पहुंचे, जहां से पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के दौरान परिजनों से पुलिसकर्मियों की बहस हो गई और परिजन युवक के शव को लेकर भाग निकले. हालांकि, बाद में पुलिसकर्मियों ने दौडधूप कर शव को वापस बरामद किया. इस दौरान गहमागहमी का माहौल बना रहा.जानकारी के मुताबिक, सिगरा थाना क्षेत्र के मलदहिया का रहने वाला राजू अपने दो दोस्तों के साथ पिशाच मोचन कुंड के पास गया था. सूत्रों के मुताबिक, तीनों ने अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन किया था. इसी दौरान राजू का पैर फिसल गया और वह कुंड में डूब गया. घटना की जानकारी होने के बाद मौके पर अफरा तफरी मची रही. वहीं, इस मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को भी दी गई और एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंचकर राजू के शव को खोजने लगी.थोड़ी ही देर में एनडीआरएफ की टीम ने राजू के शव को कुंड से बाहर निकाला. इस दौरान दो पुलिसकर्मियों को शव सुपुर्द किया गया और वे शव को लेकर मंडलीय अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद राजू को मृत घोषित कर दिया. राजू को मृत घोषित किए जाने के बाद पुलिसकर्मी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए अग्रिम कार्रवाई में जुट गए. इसी दौरान परिजन भी वहां पहुंच गए और पुलिसकर्मियों से उनकी कहासुनी हो गई. बताया जा रहा है कि परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं थे. स्ट्रेचर पर पड़े शव को उठाकर परिजन भागने लगे. इस दौरान वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का काफी प्रयास किया.ALSO READ : बनारसीपन से बनाई खास पहचान, संजय मिश्रा को मिला राष्ट्रीय सम्मानपुलिस ने दौड़कर पकड़ाइसी बीच परिजन ई-रिक्शा में शव को लादकर अस्पताल परिसर से भाग निकले. अस्पताल परिसर में हुई इस घटना के बाद अफरा तफरी का माहौल कायम हो गया. ई-रिक्शा से भाग रहे परिजनों के पीछे पुलिस भी दौड़ी और कुछ दूरी पर जाकर सड़क पर पुलिस कर्मियों ने ई-रिक्शा को रोक दिया और शव को कब्जे में ले लिया.सिगरा थाना अध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि पिशाच मोचन कुंड में एक युवक के डूबने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद थाने की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और युवक के शव को लेकर कबीरचौरा गई. वहीं, परिजन पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की कर शव को लेकर भागने लगे. इसके बाद कुछ ही दूरी पर जाने के बाद उन्हें पकड़ लिया गया और फिलहाल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. उन्होंने बताया कि पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है.