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नाटी इमली भरत मिलाप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग, शतरुद्र प्रकाश ने जारी किया पत्र

नाटी इमली भरत मिलाप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग, शतरुद्र प्रकाश ने जारी किया पत्र
Oct 03, 2025, 08:47 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी – नाटी इमली में आयोजित होने वाले पौराणिक-ऐतिहासिक और विश्विविख्यात भरत मिलाप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई है. इस संबंध में शतरुद्र प्रकाश ने एक पत्र जारी कर कहा कि यदि इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थल को भविष्य में सुरक्षित रखना है, तो इसके आस-पास अवैध निर्माण, विशेषकर बहुमंजिली इमारतों, पर रोक लगाना आवश्यक है. बताया कि अन्यथा इस क्षेत्र का मूल स्वरूप संकुचित हो जाएगा, जिससे राम-लक्ष्मण और भारत-शत्रुघ्न के दौड़ते हुए मिलाप का दृश्य सूर्यास्त से पहले ही धूमिल हो जाएगा.


शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि उन्होंने अथक प्रयासों के बाद इस सांस्कृतिक स्थल को वाराणसी महायोजना 2031 में सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर क्षेत्र की सूची में शामिल करवाया. इस महायोजना के प्रस्तर 2.4 पृष्ठ 21 में इसे 7वें स्थान पर लिपिबद्ध किया गया. इससे पहले, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर क्षेत्र में केवल 6 क्षेत्र थे, जिसमें भारत मिलाप शामिल नहीं था. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस महायोजना को तभी अनुमोदित किया जब नाटीइमली के भारत मिलाप को इस सूची में 7वें स्थान पर रखा गया. इसके अतिरिक्त, राम-भारत के मिलाप के कच्चे मिलन-मार्ग (Runway) को इंटरलाकिंग कर मजबूत किया गया है. हालांकि, इस कार्य में अभी कई सुधार किए जाने बाकी हैं.


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महायोजना 2031 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाराणसी नगर हिन्दुओं का अति प्राचीन तीर्थ स्थल है. यहां ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की प्रमुखता है. देश-विदेश से पर्यटक और बुद्धिजीवी इन पुरातात्विक भवनों, स्थलों, मठों और मंदिरों के दर्शन के लिए आते रहते हैं. साथ ही, वर्ष भर तीर्थ यात्रियों का आवागमन बना रहता है. नगर के पुरातात्विक, ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों वाले क्षेत्रों को 7 रूपों में अवगत कराया गया है-

1. गंगातटीय घाटों और मंदिरों का क्षेत्र.

2. दुर्गा मंदिर, संकटमोचन मंदिर, मानस मंदिर क्षेत्र.

3. कमच्छा भेलूपुर क्षेत्र.

4. कबीर मठ (लहरतारा) क्षेत्र.

5. सारनाथ क्षेत्र.

6. पंचक्रोसी यात्रा का क्षेत्र.

7. नाटीइमली (भारत मिलाप).


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पत्र में बताया है कि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वाराणसी के इन 7 पुरातात्विक, ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को महायोजना 2031 में किसी भी प्रकार से मिटाया या हटाया नहीं जा सकता. यह उचित और आवश्यक है कि काशी के इस विश्वप्रसिद्ध अलौकिक भारत मिलाप के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखा जाए.

हरितालिका तीज पर मां मंगलागौरी मंदिर में उमड़ी महिलाओं की भीड़, विधि-विधान से किया पूजन
हरितालिका तीज पर मां मंगलागौरी मंदिर में उमड़ी महिलाओं की भीड़, विधि-विधान से किया पूजन
वाराणसी : हरितालिका तीज के पर्व पर काशी के मां मंगलागौरी मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दराज से पहुंची सुहागिन महिलाओं ने मां के दर्शन-पूजन किए और अपने पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य की कामना की।हरितालिका तीज को भगवान शिव और माता पार्वती की कथा से जुड़ा पर्व माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी आस्था के साथ महिलाएं तीज पर व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।मां मंगलागौरी मंदिर में महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मां को सोलह श्रृंगार अर्पित किया। चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी समेत श्रृंगार की सामग्री चढ़ाकर महिलाओं ने सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना की।ALSO READ : सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्यइस पर्व की खास बात यह रही कि कई महिलाएं अपने परिवार में चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मां मंगलागौरी के दर्शन के लिए पहुंचीं। महिलाओं का कहना है कि तीज पर मां के दर्शन और पूजन से उन्हें विशेष आध्यात्मिक संतुष्टि और आशीर्वाद की अनुभूति होती है।मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। तीज के पारंपरिक पूजन के साथ महिलाओं ने मां मंगलागौरी के चरणों में अपने सुहाग और परिवार की खुशहाली की कामना की।
सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्य
सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्य
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के अंतर्गत संचालित एमए इन सोशल वर्क कार्यक्रम में प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट, व्यावसायिक दक्षता और करियर की संभावनाओं को लेकर विशेष संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिल्ड्रेन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी, गुजरात के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट ने विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार, नेतृत्व और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी।पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. वीके लहरी ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को प्लेसमेंट टीम की कार्यप्रणाली और करियर निर्माण में उसकी भूमिका से परिचित कराया। उन्होंने समाज सेवा को भारतीय जीवन-दर्शन और ‘सेवा परमो धर्मः’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि एक सफल समाजसेवी के व्यक्तित्व में सहयोग और योगदान का समन्वय होना जरूरी है।डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट ने विद्यार्थियों के साथ अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा और अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति अडिग रहना सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रेरक संकल्पना ‘तेजस्वी बालक, तेजस्वी भारत’ का उल्लेख करते हुए सामाजिक कार्य के क्षेत्र में सेवा, संवेदना, समर्पण और सामाजिक परिवर्तन के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO), क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, ब्लड बैंक, मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोरोग सेवाओं, बाल संरक्षण सोसायटी, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में रोजगार और नेतृत्व के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।डॉ. ब्रह्मभट्ट ने ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ श्लोक का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को कर्मनिष्ठा, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य की व्यावसायिक दक्षता केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकलकर समुदाय के बीच जाना, लोगों की समस्याओं को समझना, संवाद स्थापित करना और नियमित क्षेत्रकार्य करना जरूरी है।ALSO READ : आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी मणिकर्णिका घाट से गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर प्रताड़ित करने का आरोपउन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रेरक उद्घोष के माध्यम से विद्यार्थियों में साहस, संकल्प और चुनौतियों का सामना करने की भावना विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने सामाजिक कार्य के क्षेत्र में करियर और उच्च शिक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे।यह संवाद सत्र विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम ने उन्हें सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक, शैक्षणिक और शोधपरक अवसरों से परिचित कराया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक श्रीवास्तव ने किया।
आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी मणिकर्णिका घाट से गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर प्रताड़ित करने का आरोप
आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी मणिकर्णिका घाट से गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर प्रताड़ित करने का आरोप
वाराणसी : मण्डुवाडीह थाना पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की और सोमवार को मणिकर्णिका घाट से सुबह करीब 7:20 बजे उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपी की पहचान अश्वनी गौतम उर्फ देव सिंह (29) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ मण्डुवाडीह थाने में मु0अ0सं0 0287/2026 के तहत धारा 108 बीएनएस में मुकदमा दर्ज है।पुलिस के अनुसार, आरोपी पर 23 वर्षीय युवती को शादी का झांसा देकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है। आरोप है कि प्रताड़ना से परेशान होकर युवती ने आत्महत्या कर ली। मामले में युवती के पिता ने 10 अगस्त 2026 को मण्डुवाडीह थाने में तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।ALSO READ : IIT-BHU में विद्यार्थियों के लिए दो नई बसों का शुभारंभ, परिवहन व्यवस्था होगी और सुगमपुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र के महुआ महोई मुर्रा गांव का रहने वाला है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सुरेन्द्र कुमार यादव कर रहे हैं।गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में थानाध्यक्ष दिगम्बर उपाध्याय, उपनिरीक्षक सुरेन्द्र कुमार यादव और कांस्टेबल अतुल कुमार पाण्डेय शामिल रहे। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।