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एसएस हास्पिटल को अरसे बाद मिला नियमित चिकित्सा अधीक्षक

एसएस हास्पिटल को अरसे बाद मिला नियमित चिकित्सा अधीक्षक
Jul 20, 2026, 01:59 PM
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Posted By gagan arora


वाराणसीः बीएचयू के कार्यकारी परिषद की मंजूरी के बाद जनरल सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. पुनीत को सर सुंदरलाल चिकित्सालय का नियमित चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त किया गया है. अस्पताल के स्थापना (1926) से लेकर अब तक 30 से अधिक वरिष्ठ प्रोफेसर इस गरिमामयी पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं.


प्रो. पुनीत ने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई बीएचयू आईएमएस से किया है. दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल के रजिस्ट्रार रहे. कई हास्पिटल में काम करने के बाद किंग जार्ज मेडिकल कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त हुए. फिर बीएचयू से एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर जुड़े फिर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष बने. इन्हें रायल कालेज आफ फीजिशनय एंड सर्जरी ग्लासगो से पुरस्कार भी प्रदान किया गया है. इस पद के 14 वरिष्ठ डाक्टरों को शार्टलिस्ट किया गया था. इस नियुक्ति की योग्यताओं (7 वर्ष के प्रशासनिक अनुभव की अनिवार्यता) को लेकर छात्र गुटों के विरोध और इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के कारण यह पद हाल ही में भारी विवादों में रहा है. एमएस का मुख्य दायित्व सर सुंदरलाल अस्पताल की संपूर्ण चिकित्सा व्यवस्था, ओपीडी (OPD) संचालन, क्रय सेल और मरीजों के लिए प्रशासनिक नीतियों का प्रबंधन करना है.

• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक पद का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। इस पद पर संस्थान के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी प्रोफेसरों की नियुक्ति होती रही है.


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लेकिन ज्यादातर की नियुक्ति नियिमत नहीं रही.

प्रो. पुनीत से ठीक पहले प्रो. केके गुप्ता ने चिकित्सा अधीक्षक के रूप में एक लंबा कार्यकाल संभाला. इनके समय में अस्पताल के विस्तार और ओपीडी के आधुनिकीकरण के कई कार्य हुए. प्रो. एसके माथुर भी एमएस का पद संभाल चुके हैं. चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के वरिष्ठ सर्जन, जिन्होंने अस्पताल के प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.


• कार्डियोलाजी/मेडिसिन से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. ओपी उपाध्याय कई वर्षों तक अस्पताल के एमएस रहे। इनके कार्यकाल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक से जुड़ी योजनाएं आगे बढ़ीं. प्रो. वीके शुक्ला न केवल अस्पताल के एमएस रहे, बल्कि बाद में आईएमएस के निदेशक और बीएचयू के रेक्टर के पद तक भी पहुंचे. प्रो. एके खन्ना जनरल सर्जरी विभाग के विख्यात सर्जन रहे. इन्होंने सर सुंदरलाल अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया. आईएमएस के माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रोफेसर प्रो. टीएम महापात्रा भी एमएस रहे हैं. एमएस रहे प्रो. गजेंद्र सिंह न्यूरोसर्जरी विभाग के बेहद सम्मानित चिकित्सक रहे जिन्होंने अस्पताल की इमरजेंसी और न्यूरो सुविधाओं के संचालन में बड़ा योगदान दिया.


एमएस पद को लेकर रहा विवाद


सरसुंदर लाल चिकित्सालय में एमएस पद पर भी विवाद रहा.

इस विवाद में मुख्य रूप से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, वित्तीय घोटालों के आरोप और प्रशासनिक खींचतान शामिल है.

जुलाई के पहले व दूसरे सप्ताह में इस पद के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान छात्रों ने कुलपति आवास और होल्कर भवन का घेराव किया था. नियमों के मुताबिक, एमएस पद के उम्मीदवार के पास 300 या अधिक बेड वाले अस्पताल के वरिष्ठ पद पर न्यूनतम सात साल का व्यावहारिक प्रशासनिक अनुभव होना अनिवार्य है. प्रदशर्न करने वाले छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को दरकिनार करते हुए सामान्य विभागाध्यक्ष या नोडल अधिकारी के कार्य को ही प्रशासनिक अनुभव मान लिया और कई ऐसे चेहरों को शार्टलिस्ट कर लिया जिन पर पहले से गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप थे. छात्रों का मुख्य विरोध ट्रामा सेंटर के पूर्व प्रभारी डा. सौरभ सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने पर था, जिनके खिलाफ पहले से सीबीआई (CBI) और लोकायुक्त की कतिपय शिकायतें लंबित होने का दावा किया जा रहा था. नियुक्ति की घोषणा होने के बाद भी कई दिनों तक नए एमएस को आधिकारिक तौर पर कार्यभार (चार्ज) नहीं सौंपा जा रहा था. कुलपति कार्यालय का घेराव करने वाले छात्रों ने आरोप लगाया था कि पुराने अधिकारियों के वित्तीय अधिकार तत्काल सीज नहीं किए जा रहे हैं, जिससे अस्पताल के वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड्स में हेरफेर की आशंका है.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।