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विवादों के घेरे में रहा बीएचयू ट्रामा सेंटर

विवादों के घेरे में रहा बीएचयू ट्रामा सेंटर
Jul 20, 2026, 01:30 PM
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Posted By gagan arora


वाराणसीः नई नियुक्ति से पहले बीएचयू ट्रामा सेंटर के प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह रहे. उनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद सामने आए. इनमें मेडिकल उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं का मामला रहा. इसके साथ गलत पहचान के कारण मरीजों का गलत आपरेशन, इलाज में लापरवाही के साथ ही तथा प्रशासनिक मनमानी जैसे गंभीर मामले रहे हैं.


बीएचयू ट्रामा सेंटर में सबसे अधिक हो हल्ला मचा उपकरणों के खरीद के मामले में. ट्रामा सेंटर में मशीनों और मेडिकल उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले, टेंडर नियमों के उल्लंघन और टैक्स चोरी के आरोप लगे है.


मुख्य रूप से ओएनजीसी (ONGC) के सीएसआर फंड से हुई 21.89 करोड़ की कुल खरीद और विशेष रूप से 3.64 करोड़ से एयरबोर्न बायोलाजिकल कंट्रोल डिवाइस (BCD) की खरीद पर उंगलियां उठी हैं.

मशीनों के दामों में भारी अंतर

आरोप रहा कि बीएचयू ने जो 'बायोलाजिकल कंट्रोल डिवाइस' (हवा साफ करने वाली प्रणाली) करीब 3.64 से 3.68 करोड़ प्रति यूनिट की दर से खरीदी है, वैसी ही समान श्रेणी की मशीन एम्स नई दिल्ली में 66 लाख और जम्मू-कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट में मात्र 60 लाख में खरीदी गई थी. प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में खेल का आरोप है. टेंडर मूल रूप से हवा साफ करने वाली डिवाइस का था, लेकिन अफसरों ने कथित रूप से इसमें एडल्ट वेंटिलेटर, पीडियाट्रिक वेंटिलेटर, पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड और इकोकार्डियोग्राफी जैसी बेहद महंगी और अलग-अलग मशीनों को एक साथ जबरन जोड़ दिया ताकि कोई दूसरी कंपनी मुकाबला न कर सके.


आरोप है कि एयर प्यूरीफायर पर सामान्यतः 18 प्रितिशत जीएसटी (GST) लगता है, लेकिन चालान में गलत कोड डालकर सिर्फ 5% टैक्स लगाया गया. साथ ही, दस करोड़ से ऊपर के टेंडर के लिए अनिवार्य 'स्वतंत्र बाहरी मानिटर' (IEM) की नियुक्ति भी नहीं की गई थी. इस मामले को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), शिक्षा मंत्रालय और विजिलेंस टीम ने दस्तावेज़ों की जांच की है. वहीं दूसरी ओर, ट्रामा सेंटर के पूर्व प्रभारी डा. सौरभ सिंह से जुड़े जेम (GeM) पोर्टल खरीद के एक पुराने मामले में लोकपाल ने सीबीआई और कैग (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें क्लीन चिट दे दी है.


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मरीजों के साथ इलाज में लापरवाही


• मरीजों के नाम में समानता के कारण गलत आपरेशन थिएटर में भेजने और बिना पहचान की पुष्टि के सर्जरी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. एक मामले में महिला मरीज की मौत का मामला भी सामने आया था. बलिया की 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधिका देवी न्यूरोसर्जरी विभाग के बेड नंबर 29 पर रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर (Spinal Tumour) के इलाज के लिए भर्ती थीं. वहीं आर्थोपेडिक विभाग के बेड नंबर 17 पर 82 वर्षीय राधिका सिंह कूल्हा प्रत्यारोपण (Hip Replacement) के लिए भर्ती थीं. डाक्टरों ने नाम की समानता के कारण गलती से रीढ़ की हड्डी की मरीज राधिका देवी को आर्थोपेडिक आपरेशन थिएटर में भेज दिया और उनके कूल्हे का आपरेशन शुरू कर दिया. जब सर्जनों को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने परिजनों को बिना बताए घाव को सिल दिया और मरीज को वार्ड में वापस भेज दिया. बाद में ट्यूमर का सही आपरेशन तो हुआ, लेकिन शरीर में इन्फेक्शन और मानसिक सदमे के कारण मरीज की मृत्यु हो गई. अस्पताल निदेशक डा. एमएन शंखवार ने इस घोर लापरवाही की जांच के लिए कमेटी गठित की. ट्रामा सेंटर के प्रभारी पर आर्थिक लाभ लेकर मरीजों को बेड आवंटित करने और प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम करने के आरोप तक लगे हैं. इसके अलावा, सेंटर के भीतर डाक्टरों और कर्मचारियों के बीच दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं.



स्टाफ का डिमोशन का भी विवाद

हाल ही में, अस्पताल के प्रमोशन पाए 37 नर्सिंग अफसरों का डिमोशन कर दिया गया है, जिसे लेकर नर्सिंग स्टाफ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है. जुलाई 2026 में आईएमएस-बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में 37 नर्सिंग अफसरों का अचानक डिमोशन कर दिया गया, जिससे स्टाफ में भारी आक्रोश है. जनवरी 2026 में विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) के माध्यम से 195 नर्सिंग अफसरों को 'सीनियर नर्सिंग अफसर' के पद पर प्रमोशन दिया गया था. लेकिन ठीक छह महीने बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरक्षण नीति, 200 प्वाइंट रोस्टर और डीओपीटी (DoPT) के नियमों में विसंगति का हवाला देते हुए इनमें से 37 स्टाफ का बिना स्पष्ट कारण बताए डिमोशन कर दिया.

नर्सिंग एसोसिएशन ने इसे प्रशासन की मनमानी बताते हुए कुलपति और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को निष्पक्ष जांच के लिए ज्ञापन सौंपा है.

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
नागपंचमी पर श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी, नगर आयुक्त ने परखी तैयारियां
वाराणसी : नागपंचमी पर्व को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जैतपुरा स्थित ऐतिहासिक नागकुआं क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर मेला क्षेत्र में सफाई, प्रकाश, जल निकासी और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी न रहे।नगर आयुक्त ने पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए। उन्होंने जलकल और सिविल विभाग के जेई को व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने को कहा।ALSO READ: कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथनागकुआं के निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने औसानगंज वार्ड का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सफाई समेत अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नागपंचमी के मेला क्षेत्र और आसपास के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय पार्षद, जलकल विभाग के जेई, सिविल विभाग के जेई, सफाई निरीक्षक अवनीश दुबे समेत नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
कुत्ता काटने से घायल मासूम से चार दिन बाद मिलने पहुंची प्रो. श्रद्धा, परिजनों के सामने जोड़ा हाथ
वाराणसीः बीएचयू में पालतू कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल 11 साल के अभिनव से चार दिन बाद रविवार को मिलने प्रो. श्रद्धा सिंह अपने पति के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचीं. उन्होंने बच्चे के माता-पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में कुत्ता नहीं रखने की बात कही. हालांकि बच्चे के माता-पिता ने उनसे नाराजगी जताई. मां ने तो सीधे सवाल कर दिया कि अब क्यों आईं हैं. पिता ने शिकायत किया कि बच्चा अब भी बोल नहीं पा रहा है.ALSO READ: BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकालाप्रोफेसर और उनके पति ने कुत्ते के टीकाकरण का कार्ड दिखाया. साथ ही कहा कि भविष्य में कुत्ता घर में नहीं रखने की बात भी कही। बता दें कि बीते 13 अगस्त की सुबह बीएचयू ट्रामा सेंटर में सीनियर नर्सिंग आफिसर प्रेमाराम दोनों बेटों 11 वर्षीय अभिनव और 13 वर्षीय हर्ष के साथ बीएचयू परिसर में मार्निंग वाक पर निकले थे. वापस लौटने के दौरान कुछ दूर निकल चुके बड़े बेटे को लेने के लिए आगे बढ़ गए. वहीं छोटा बेटा परिसर की ही जोधपुर कालोनी स्थित घर की ओर अकेला जाने लगा. इसी दौरान हिंदी विभाग की प्रो. श्रद्धा सिंह के पालतू कुत्ते ने अभिनव पर हमला कर दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से बच्चे को कुत्ते से बचाया. गंभीर हालत में उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया. बच्चे को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह से काटा था कि उसके सिर व चेहरे पर 50 टांके लगाने पड़े. वहीं आरोप है कि प्रो. श्रद्धा सिंह बच्चे की मदद करने की बजाय वहां से चली गईं. उन्होंने बच्चे पर कुत्ते द्वारा हमले से भी इनकार किया था. वहीं बीएचयू प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
BHU-ट्रामा सेंटर के केयर टेकर ने प्रभारी पर लगाया आऱोप, गलत रिपोर्ट लिखने से मना करने पर काम से निकाला
वाराणसी : बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के नवनियुक्त प्रभारी पर 11 साल से तैनात केयरटेकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केयर टेकर का आरोप है कि मुझ पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाया गया।केयर टेकर ने दावा किया कि दबाव में काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 28 जुलाई को कुलपति से शिकायत की। इसके अगले ही दिन मुझे ट्रॉमा सेंटर आने से रोक दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी शोकॉज नोटिस के काम से हटा दिया गया।मामले में केयर टेकर ने कुलपति को ई-मेल के जरिए शिकायत करने के साथ सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर प्रभारी बदलाव के लिए आए थे, लेकिन उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।ट्रामा सेंटर प्रभारी पर कर्मचारी ने लगाए आरोप।गलत रिपोर्ट लिखने का दबाव बनाने का आरोपBHU ट्रॉमा सेंटर में 2014 से केयरटेकर के पद पर तैनात सुनील यादव ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है। कहा- 20 जुलाई को नए प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अजीत कुमार के आने के बाद से मुझे परेशान किया जा रहा था।सुनील ने कहा- कुछ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने के लिए मुझ पर दबाव बनाया जा रहा था। लिखना था कि वे समय पर ड्यूटी नहीं आते और काम नहीं करते, जबकि कर्मचारी नियमित रूप से काम कर रहे थे।ALSO READ: बीएचयू शिक्षा संकाय का 109वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गयासुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।सुनील यादव BHU ट्रामा सेंटर में साल 2014 से तैनात हैं।मना किया तो ट्रामा में प्रवेश पर रोक लगा दीसुनील ने बताया कि उन्होंने ऐसा लिखने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि वह सौरभ सिंह के आदमी हैं। इसके बाद उन्होंने 28 जुलाई को पत्र के माध्यम से कुलपति से शिकायत की। उनका आरोप है कि 29 जुलाई को जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बताया कि उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।सुनील का कहना है कि उन्हें काम से हटाने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीधे कहा गया कि वह अगले दिन से काम पर न आएं। उन्होंने इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताते हुए मामले में शिकायत की है।सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में शिकायतसुनील यादव ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर ई-मेल के जरिए कुलपति से शिकायत की। इसके बाद जनसुनवाई, सीएम पोर्टल और श्रम विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुनील के मुताबिक, वह 11 साल से काम कर रहे हैं और उन्हें बदले की भावना से हटाया गया है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना हुआ है।सुनील ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वीसी ने निर्देश दिया है कि जो भी गलत दिखाई दे, उसे हटा दिया जाए।