मजबूत इच्छाशक्ति जीवन की किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम- प्रो. मंगला कपूर
वाराणसी: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (एनएएसआई)-वाराणसी चैप्टर ने बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के आईएसएलएस सेंटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, आईएमएस, आईआईटी-बीएचयू और महिला महाविद्यालय से 89 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें संकाय सदस्य और पीएचडी छात्राएं प्रमुख थीं.

प्रोफेसर मंगला कपूर का उद्बोधन
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्य अतिथि प्रोफेसर मंगला कपूर का उद्बोधन रहा, जो बीएचयू के संगीत विभाग (वोकल) से हैं और 2026 की पद्म प्राप्तकर्ता हैं. उन्होंने “ एजर्नी ऑफ रेजिलिएंस” शीर्षक से अपनी बात रखी और कहा, “मजबूत इच्छाशक्ति व्यक्ति को जीवन की किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम बनाती है. कोई बाधा उस व्यक्ति को हरा नहीं सकती जो अटल रहता है.” कार्यक्रम का केंद्र बिंदु “एकेडेमिया में महिलाओं की चुनौतियां और आगे का रास्ता” विषय पर एक खुला मंच इंटरएक्टिव पैनल डिस्कशन रहा, जहां प्रतिभागियों ने वक्ताओं से संवाद किया और शिक्षा जगत में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता एवं प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया.
प्रतिष्ठित पैनलिस्टों में प्रोफेसर श्वेता प्रसाद (समाजशास्त्र विभाग एवं ईसी सदस्य, बीएचयू), प्रोफेसर चंदना हलदार (पूर्व निर्देशक, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बीएचयू) और प्रोफेसर रोयाना सिंह (पूर्व चीफ प्रॉक्टर, बीएचयू) शामिल थीं. इस चर्चा का संचालन डॉ. चंदना बसु, वैज्ञानिक, सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स, बीएचयू ने किया. प्रोफेसर श्वेता प्रसाद ने युवा शोधकर्ताओं को खुद के प्रति सच्चा रहने पर जोर दिया, जबकि प्रोफेसर हलदार ने कहा कि महिलाएं प्लास्टिक और कांच की गेंदों की जुग्लर होती हैं, जो पेशेवर और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को संतुलित करती हैं तथा जीवन की सबसे नाजुक प्राथमिकताओं की रक्षा करती हैं.

पुरुष की सफलता के पीछे एक महिला का हाथ
प्रोफेसर रोयाना सिंह ने उल्लेख किया कि जहां अक्सर कहा जाता है कि हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है, वहीं कई सफल महिलाओं की सबसे मजबूत स्तंभ उनकी माताएं होती हैं. एनएएसआई-वाराणसी चैप्टर की चेयरपर्सन प्रोफेसर माधुलिका अग्रवाल ने समापन में कहा, “इस कार्यक्रम में भागीदारी देखकर हृदय प्रसन्न हुआ. ऐसे आयोजन महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ संवाद, प्रेरणा और सामूहिक प्रतिबद्धता को बढ़ावा देते हैं, जिससे एक अधिक समावेशी एवं समान शिक्षा वातावरण का निर्माण होता है.”
यह भी पढ़ें: मजदूर की मौत पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कार्रवाई ना होने पर थाने का किया घेराव
इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित शिक्षकों ने शिरकत की, जिनमें इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के डीन प्रोफेसर आर.के. श्रीवास्तव, एनएएसआई वाराणसी चैप्टर की चेयरपर्सन प्रोफेसर माधुलिका अग्रवाल, प्रोफेसर आर.के. अस्थाना, प्रोफेसर एस.बी. अग्रवाल, प्रोफेसर नंदिता घोषाल, प्रोफेसर राधा चौबे, प्रोफेसर बी.पी. मंडल, प्रोफेसर रिचा रघुवंशी, प्रोफेसर मुक्ता सिंह, प्रोफेसर कल्पना गुप्ता, प्रोफेसर शैलजा सुंकरी, प्रोफेसर गीता गौतम, डॉ. रिचा आर्या, डॉ. संगीता उज्जवल और डॉ. लावण्या सेल्वागनेश शामिल थे. कार्यक्रम का आयोजन प्रोफेसर शशि पांडेय (वनस्पति विभाग) और प्रोफेसर नीलम श्रीवास्तव (भौतिकी विभाग, एमएमवी) ने संयोजक के रूप में किया, जबकि डॉ. चंदना बसु (सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स) आयोजन सचिव की भूमिका में रहीं.



