BHU में पेड़ों की अवैध कटाई पर छात्रों ने उठाई आवाज, 2.65 करोड़ की NGT पेनल्टी दोषी अधिकारियों से वसूलने की मांग

वाराणसी: 20 अगस्त काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में पेड़ों की अवैध कटाई के मामले को लेकर छात्र प्रतिनिधियों और पर्यावरण-प्रेमी विद्यार्थियों ने कुलपति/कुलसचिव को पत्र सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, छात्रों ने परिसर में 33 बहुमूल्य पेड़ों की अवैध कटाई पर NGT द्वारा लगाए गए करीब 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि विश्वविद्यालय के बजट से नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूलने की मांग की है.
छात्रों ने पत्र में कहा है कि प्रशासनिक लापरवाही से हुए वित्तीय नुकसान का भार सार्वजनिक धन पर नहीं डाला जाना चाहिए, इसके लिए CCS (CCA) Rules, 1965 के Rule 11 और सुप्रीम कोर्ट के Lucknow Development Authority vs. M.K. Gupta (1994) के सिद्धांतों का हवाला देते हुए दोषी अधिकारियों के वेतन और संपत्ति से राशि की व्यक्तिगत वसूली की मांग की गई है.
नामजद FIR और विभागीय जांच की मांग
छात्रों ने विश्वविद्यालय स्तर पर तत्काल आंतरिक निष्पक्ष विभागीय जांच कराने की मांग की है, उनका कहना है कि जांच के आधार पर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों को चिन्हित किया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद आपराधिक FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए. पत्र में U.P. Protection of Trees Act, 1976 और BNS, 2023 की विभिन्न धाराओं का भी उल्लेख किया गया है.
1300 पेड़ों का डिजिटल ट्री सेंसस कराने की मांग
छात्रों ने परिसर के सभी करीब 1,300 पेड़ों का डिजिटल ट्री सेंसस कराने की मांग रखी है, इसके तहत प्रत्येक पेड़ की 100 प्रतिशत जियो-टैगिंग कर उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और डेटा को आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में पेड़ों की कटाई और संरक्षण की निगरानी पारदर्शी तरीके से हो सके.
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978 पौधों के संरक्षण और ग्रीन ऑडिट पर जोर
पत्र में NGT के आदेश के तहत परिसर में लगाए गए 978 पौधों की निरंतर सिंचाई, सुरक्षा और थर्ड-पार्टी सर्वाइवल ऑडिट की पारदर्शी व्यवस्था कराने की भी मांग की गई है, छात्रों का कहना है कि इससे पौधों के संरक्षण की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और पौधरोपण के बाद उनकी निगरानी सुनिश्चित होगी.
छात्रों की निगरानी समिति और वार्षिक ग्रीन ऑडिट की मांग
छात्रों ने पर्यावरण विशेषज्ञों, प्रोफेसरों और छात्र प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित करने की मांग की है, समिति की सहमति के बिना परिसर में एक भी पेड़ नहीं काटे जाने और वार्षिक ग्रीन ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग की गई है.
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सात कार्यदिवसों के भीतर इन मांगों पर लिखित और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो छात्र समुदाय शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होगा.



