बिना गंगा स्नान के काशी पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बीजेपी पर कसा तंज, पुलिस अलर्ट

वाराणसी : माधी पूर्णिमा पर बिना गंगा स्नान किए आखिरकार शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बुधवार की रात करीब साढ़े नौ बजे वाराणसी स्थित श्रीविद्या मठ पहुंच गए. उनके आने की सूचना मिलते ही पुलिस अलर्ट हो गई. सुरक्षा को लेकर मठ के आसपास सुरक्षा और खुफिया तंत्र का जाल बिछाया गया है. उधर, शाम ढलने के बाद मौन धारण करने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दर्शन के लिए उनके भक्त श्रीविद्या मठ पहुंचे लेकिन निजी सुरक्षा कर्मियों ने किसी से भी मुलाकात नहीं होने दी. इस दौरान स्वामी सीधे अपने कक्ष में रात्रि विश्राम को पहुंचे.

बता दें कि प्रयागराज में माघ मेले में बसंत पंचमी पर पालकी शोभायात्रा निकाल संगम स्नान करने की परंपरा को निभाने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तैयार हुए थे लेकिन मेला प्रशासन ने शोभायात्रा की अनुमति नहीं दी थी. इससे शंकराचार्य समेत संत समाज क्षुब्ध रहा और शंकराचार्य ने प्रदेश सरकार को खूब कोसा. इस दौरान हुए विवाद के बीच शंकराचार्य सुबह प्रयागराज से काशी के लिए कूच किए. प्रयागराज से काशी के बीच जगह-जगह भक्तों ने शंकराचार्य का स्वागत और अभिनंदन किया. भदोही स्थित अजोरा आश्रम में ठहरने के दौरान स्वागत हुआ. देर शाम स्वामी अपने भक्तों के साथ काशी रवाना हुए.
बार्डर पर पुलिस फोर्स भी सतर्क रही. वायरलेस सेट पर स्वामी के गुजरने की लोकेशन पाकर संबंधित थाने की पुलिस फोर्स सुरक्षा में तैनात रही. रात लगभग 9.30 बजे शंकराचार्य भेलूपुर थाना क्षेत्र के केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ में प्रवेश किए. हालांकि उनके आने की सूचना पर दिन में ही चहल पहल बनी रही. अनुयायियों और शिष्यों के आने का सिलसिला लगा रहा और हर कोई पल-पल की खबर लेता रहा. स्वामी के आने पर बटुकों ने भी स्वागत किया. भेलूपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार त्रिपाठी ने बताया कि रात में शंकराचार्य सुरक्षित अपने मठ पहुंच गए. आगमन पर पुलिस फोर्स सतर्क रही.
भाजपा पर कसा तंज, कहा न्याय की आशा न करें
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी पहुंचकर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोगों ने वीडियो में देखा कि बटुकों को उनकी चोटी पकड़कर उन्हें अपमानित किया जा रहा है. अपनी गलती को गलती न मानना और अपने अपराध को न स्वीकार करना ये उन पर निर्भर करता है. जो अपराध किया वो सबके सामने आ ही गया है. अपने लोगों ने तो संयम से 11 दिन प्रयागराज में रहकर उनको मौका दिया कि आपसे जो अपराध हुआ है चाहे तो आप सुधार सकते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुधारा. इसके बाद काशी वापस लौट गए हैं. इस पार्टी की सरकार में न्याय की कोई आशा न करे यही संदेश मिला है.
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यूजीसी के नए नियमों का किया विरोध
यूजीसी के नए नियमों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह नियम इसी लिए लाया गया है कि उनकी कमियां जो हैं उसकी चर्चा कोई न करे. सवाल ये है कि यूजीसी जैसा नियम जो सनातन धर्म के लिए बहुत बड़ा खतरा है. सनातन धर्म में जातियां हैं, जातियां इसलिए नहीं हैं कि एक दूसरे से लड़ें, ये इसलिए है कि सभी लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे. ये पुराने लोगों की बनाई गई परंपरा है. अब यूजीसी के सहारे इन लोगों ने एक जाति को दूसरे जाति के सामने लाकर खड़ा कर दिया है. इससे आपस में लड़कर उनको मरना ही मरना है. पूरे सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए एक मशीन ले आए हैं. यूजीसी के नियम हिंदू समाज के लिए घातक हैं. इसलिए हम इसका विरोध करते हैं.



