स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर BHU में जीवंत हुई नौटंकी, ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन

वाराणसी: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लोकनाट्य परंपरा नौटंकी को नए मंचीय रूप में प्रस्तुत किया गया। विश्वविद्यालय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में संगीतमय नाटक ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का प्रभावशाली मंचन हुआ। प्रस्तुति में सत्य, साहस, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ रहने जैसे मूल्यों को केंद्र में रखा गया।
रंगशाला, विश्वविद्यालय थिएटर सेल ने संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो, अमेरिका के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया। नाटक का निर्देशन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो में कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर और सातवीं पीढ़ी के सांगीत कलाकार प्रो. देवेंद्र शर्मा ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर और विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने हरिश्चंद्र के चरित्र में निहित सत्यनिष्ठा, नैतिक साहस और त्याग को राष्ट्र-निर्माण के मूल्यों से जोड़ा।
निर्देशक प्रो. देवेंद्र शर्मा ने प्रस्तुति से पहले नाटक की विषयवस्तु और सांगीत-नाट्य परंपरा की विशेषताओं पर विचार रखे। वे दुनिया भर में सांगीत-नाट्य की 1,000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उन्होंने अमेरिका में नौटंकी मंडली स्थापित कर कई प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है और प्रतिवर्ष राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी देते हैं।

रंगशाला के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सांगीत, स्वांग और नौटंकी भारतीय लोकनाट्य की ऐसी परंपराएं हैं, जिनमें संगीत, काव्य, अभिनय, नृत्य और लोकभाषा का अनूठा समन्वय मिलता है। आधुनिक मनोरंजन माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे सांस्कृतिक जीवन से दूर हुई है। रंगशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना और इसे नए रूप में आगे बढ़ाना है।
मंच पर दिखी ‘मिनी इंडिया’ की झलक
‘सत्य हरिश्चंद्र’ की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ असम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पुडुचेरी के विद्यार्थियों की सहभागिता ने मंच पर ‘मिनी इंडिया’ की झलक पेश की। इससे नौटंकी की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का संदेश भी सामने आया।
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प्रमुख भूमिकाओं में तरुण सिंह भदौरिया और प्रियांशु शुक्ला ने हरिश्चंद्र, सिफारिश और धीरज सेन ने विश्वामित्र तथा रितुल और अम्रपाली शर्मा ने तारावती की भूमिका निभाई। रितिका सिंह ने तारावती के साथ विष्णु की भूमिका भी निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावी प्रस्तुति दी।
नाटक के संगीत पक्ष ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। नगाड़े पर जगदीश जी, हारमोनियम पर कृपा सिंधु और ढोलक पर गुरुदयाल जी ने लाइव संगत की। पारंपरिक वाद्य-संगत ने प्रस्तुति के दृश्यों में लय, भाव और नाटकीय प्रभाव को और मजबूत किया।
कार्यक्रम के अंत में संगीत एवं मंच कला संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंचन ने नौटंकी की पारंपरिक जीवंतता को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक दर्शकों के लिए नए अंदाज में प्रस्तुत किया और लोकनाट्य की इस समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल का संदेश दिया।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर BHU में जीवंत हुई नौटंकी, ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन
वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लोकनाट्य परंपरा नौटंकी को नए मंचीय रूप में प्रस्तुत किया गया। विश्वविद्यालय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में संगीतमय नाटक ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का प्रभावशाली मंचन हुआ। प्रस्तुति में सत्य, साहस, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ रहने जैसे मूल्यों को केंद्र में रखा गया।
रंगशाला, विश्वविद्यालय थिएटर सेल ने संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो, अमेरिका के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया। नाटक का निर्देशन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो में कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर और सातवीं पीढ़ी के सांगीत कलाकार प्रो. देवेंद्र शर्मा ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर और विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने हरिश्चंद्र के चरित्र में निहित सत्यनिष्ठा, नैतिक साहस और त्याग को राष्ट्र-निर्माण के मूल्यों से जोड़ा।
निर्देशक प्रो. देवेंद्र शर्मा ने प्रस्तुति से पहले नाटक की विषयवस्तु और सांगीत-नाट्य परंपरा की विशेषताओं पर विचार रखे। वे दुनिया भर में सांगीत-नाट्य की 1,000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उन्होंने अमेरिका में नौटंकी मंडली स्थापित कर कई प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है और प्रतिवर्ष राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी देते हैं।
रंगशाला के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सांगीत, स्वांग और नौटंकी भारतीय लोकनाट्य की ऐसी परंपराएं हैं, जिनमें संगीत, काव्य, अभिनय, नृत्य और लोकभाषा का अनूठा समन्वय मिलता है। आधुनिक मनोरंजन माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे सांस्कृतिक जीवन से दूर हुई है। रंगशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना और इसे नए रूप में आगे बढ़ाना है।
मंच पर दिखी ‘मिनी इंडिया’ की झलक
‘सत्य हरिश्चंद्र’ की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ असम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पुडुचेरी के विद्यार्थियों की सहभागिता ने मंच पर ‘मिनी इंडिया’ की झलक पेश की। इससे नौटंकी की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का संदेश भी सामने आया।
प्रमुख भूमिकाओं में तरुण सिंह भदौरिया और प्रियांशु शुक्ला ने हरिश्चंद्र, सिफारिश और धीरज सेन ने विश्वामित्र तथा रितुल और अम्रपाली शर्मा ने तारावती की भूमिका निभाई। रितिका सिंह ने तारावती के साथ विष्णु की भूमिका भी निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावी प्रस्तुति दी।
नाटक के संगीत पक्ष ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। नगाड़े पर जगदीश जी, हारमोनियम पर कृपा सिंधु और ढोलक पर गुरुदयाल जी ने लाइव संगत की। पारंपरिक वाद्य-संगत ने प्रस्तुति के दृश्यों में लय, भाव और नाटकीय प्रभाव को और मजबूत किया।
कार्यक्रम के अंत में संगीत एवं मंच कला संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंचन ने नौटंकी की पारंपरिक जीवंतता को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक दर्शकों के लिए नए अंदाज में प्रस्तुत किया और लोकनाट्य की इस समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल का संदेश दिया।



