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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर BHU में जीवंत हुई नौटंकी, ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर BHU में जीवंत हुई नौटंकी, ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन
Aug 14, 2026, 03:23 PM
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Posted By gagan arora

वाराणसी: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लोकनाट्य परंपरा नौटंकी को नए मंचीय रूप में प्रस्तुत किया गया। विश्वविद्यालय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में संगीतमय नाटक ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का प्रभावशाली मंचन हुआ। प्रस्तुति में सत्य, साहस, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ रहने जैसे मूल्यों को केंद्र में रखा गया।


रंगशाला, विश्वविद्यालय थिएटर सेल ने संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो, अमेरिका के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया। नाटक का निर्देशन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो में कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर और सातवीं पीढ़ी के सांगीत कलाकार प्रो. देवेंद्र शर्मा ने किया।


कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर और विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने हरिश्चंद्र के चरित्र में निहित सत्यनिष्ठा, नैतिक साहस और त्याग को राष्ट्र-निर्माण के मूल्यों से जोड़ा।


निर्देशक प्रो. देवेंद्र शर्मा ने प्रस्तुति से पहले नाटक की विषयवस्तु और सांगीत-नाट्य परंपरा की विशेषताओं पर विचार रखे। वे दुनिया भर में सांगीत-नाट्य की 1,000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उन्होंने अमेरिका में नौटंकी मंडली स्थापित कर कई प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है और प्रतिवर्ष राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी देते हैं।


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रंगशाला के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सांगीत, स्वांग और नौटंकी भारतीय लोकनाट्य की ऐसी परंपराएं हैं, जिनमें संगीत, काव्य, अभिनय, नृत्य और लोकभाषा का अनूठा समन्वय मिलता है। आधुनिक मनोरंजन माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे सांस्कृतिक जीवन से दूर हुई है। रंगशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना और इसे नए रूप में आगे बढ़ाना है।


मंच पर दिखी ‘मिनी इंडिया’ की झलक


‘सत्य हरिश्चंद्र’ की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ असम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पुडुचेरी के विद्यार्थियों की सहभागिता ने मंच पर ‘मिनी इंडिया’ की झलक पेश की। इससे नौटंकी की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का संदेश भी सामने आया।


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प्रमुख भूमिकाओं में तरुण सिंह भदौरिया और प्रियांशु शुक्ला ने हरिश्चंद्र, सिफारिश और धीरज सेन ने विश्वामित्र तथा रितुल और अम्रपाली शर्मा ने तारावती की भूमिका निभाई। रितिका सिंह ने तारावती के साथ विष्णु की भूमिका भी निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावी प्रस्तुति दी।


नाटक के संगीत पक्ष ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। नगाड़े पर जगदीश जी, हारमोनियम पर कृपा सिंधु और ढोलक पर गुरुदयाल जी ने लाइव संगत की। पारंपरिक वाद्य-संगत ने प्रस्तुति के दृश्यों में लय, भाव और नाटकीय प्रभाव को और मजबूत किया।


कार्यक्रम के अंत में संगीत एवं मंच कला संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंचन ने नौटंकी की पारंपरिक जीवंतता को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक दर्शकों के लिए नए अंदाज में प्रस्तुत किया और लोकनाट्य की इस समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल का संदेश दिया।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर BHU में जीवंत हुई नौटंकी, ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन


वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लोकनाट्य परंपरा नौटंकी को नए मंचीय रूप में प्रस्तुत किया गया। विश्वविद्यालय के पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में संगीतमय नाटक ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का प्रभावशाली मंचन हुआ। प्रस्तुति में सत्य, साहस, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ रहने जैसे मूल्यों को केंद्र में रखा गया।


रंगशाला, विश्वविद्यालय थिएटर सेल ने संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो, अमेरिका के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया। नाटक का निर्देशन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो में कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर और सातवीं पीढ़ी के सांगीत कलाकार प्रो. देवेंद्र शर्मा ने किया।


कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर और विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का मंचन विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने हरिश्चंद्र के चरित्र में निहित सत्यनिष्ठा, नैतिक साहस और त्याग को राष्ट्र-निर्माण के मूल्यों से जोड़ा।


निर्देशक प्रो. देवेंद्र शर्मा ने प्रस्तुति से पहले नाटक की विषयवस्तु और सांगीत-नाट्य परंपरा की विशेषताओं पर विचार रखे। वे दुनिया भर में सांगीत-नाट्य की 1,000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उन्होंने अमेरिका में नौटंकी मंडली स्थापित कर कई प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है और प्रतिवर्ष राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी देते हैं।


रंगशाला के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सांगीत, स्वांग और नौटंकी भारतीय लोकनाट्य की ऐसी परंपराएं हैं, जिनमें संगीत, काव्य, अभिनय, नृत्य और लोकभाषा का अनूठा समन्वय मिलता है। आधुनिक मनोरंजन माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे सांस्कृतिक जीवन से दूर हुई है। रंगशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना और इसे नए रूप में आगे बढ़ाना है।


मंच पर दिखी ‘मिनी इंडिया’ की झलक


‘सत्य हरिश्चंद्र’ की प्रस्तुति की खास बात यह रही कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ असम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पुडुचेरी के विद्यार्थियों की सहभागिता ने मंच पर ‘मिनी इंडिया’ की झलक पेश की। इससे नौटंकी की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का संदेश भी सामने आया।


प्रमुख भूमिकाओं में तरुण सिंह भदौरिया और प्रियांशु शुक्ला ने हरिश्चंद्र, सिफारिश और धीरज सेन ने विश्वामित्र तथा रितुल और अम्रपाली शर्मा ने तारावती की भूमिका निभाई। रितिका सिंह ने तारावती के साथ विष्णु की भूमिका भी निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावी प्रस्तुति दी।


नाटक के संगीत पक्ष ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। नगाड़े पर जगदीश जी, हारमोनियम पर कृपा सिंधु और ढोलक पर गुरुदयाल जी ने लाइव संगत की। पारंपरिक वाद्य-संगत ने प्रस्तुति के दृश्यों में लय, भाव और नाटकीय प्रभाव को और मजबूत किया।


कार्यक्रम के अंत में संगीत एवं मंच कला संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंचन ने नौटंकी की पारंपरिक जीवंतता को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक दर्शकों के लिए नए अंदाज में प्रस्तुत किया और लोकनाट्य की इस समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल का संदेश दिया।

बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता, वैभवी यादव ने हासिल किया प्रथम स्थान.
बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता, वैभवी यादव ने हासिल किया प्रथम स्थान.
वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में राजभाषा पखवाड़ा के तहत मंगलवार को बरेका इंटर कॉलेज में हिन्दी वाक् प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महाप्रबंधक आशुतोष पंत के दिशा-निर्देशन में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिन्दी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने और राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के समन्वयक धर्मवीर सिंह, वरिष्ठ अनुवादक गुरुराजन और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।प्रतियोगिता के लिए ‘अनेकता में एकता की संवाहक हिन्दी’ और ‘हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की आत्मा है’ विषय निर्धारित किए गए थे। विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों में हिन्दी भाषा की सामर्थ्य, आत्मीयता, संस्कृति और संस्कारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान तुलसीदास, कबीरदास, मुंशी प्रेमचंद और भारतेन्दु हरिश्चंद्र जैसी हिन्दी साहित्य की विभूतियों का भी स्मरण किया गया।विद्यालय के समन्वयक धर्मवीर सिंह ने हिन्दी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने हाल ही में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों द्वारा हिन्दी गीतों के उल्लेख का जिक्र किया। शिक्षिका करुणा सिंह ने हिन्दी कविता प्रस्तुत की।प्रतियोगिता में भूगोल प्रवक्ता विकास कुमार पाण्डेय और हिन्दी शिक्षक उमैर अहमद अंसारी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों का मूल्यांकन प्रस्तुतीकरण, विषय-वस्तु और अभिव्यक्ति के आधार पर किया।ALSO READ: रामनगर चौक से किला रोड तक अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने स्ट्रीट वेंडरों के साथ की बैठक..परिणाम में कक्षा 11-‘अ’ की छात्रा वैभवी यादव ने प्रथम, कक्षा 10-‘अ’ के छात्र अनमोल प्रजापति ने द्वितीय और कक्षा 9-‘ब’ के छात्र उत्कर्ष केशरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।कार्यक्रम का संचालन हिन्दी शिक्षिकाएं शालिनी उपाध्याय और वंदना शुक्ला ने किया। आयोजन को सफल बनाने में राकेश चौधरी और करुणा सिंह का विशेष योगदान रहा।
रामनगर चौक से किला रोड तक अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने स्ट्रीट वेंडरों के साथ की बैठक..
रामनगर चौक से किला रोड तक अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने स्ट्रीट वेंडरों के साथ की बैठक..
वाराणसी। रामनगर में सड़क और पाथवे पर दुकानें व ठेले लगाने से होने वाली यातायात संबंधी परेशानियों को लेकर पुलिस ने मंगलवार को स्ट्रीट वेंडरों के साथ बैठक की। थाना रामनगर में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्रा ने रामनगर चौक चौराहा से किला रोड तक सब्जी, फल, चाट, चाउमीन, फास्ट फूड, चाय-नमकीन आदि के ठेले लगाने वाले दुकानदारों और पाथवे पर दुकान लगाने वाले स्ट्रीट वेंडरों को बुलाकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।बैठक के दौरान प्रभारी निरीक्षक ने वेंडरों से कहा कि सड़क पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न किया जाए। ठेले और दुकान इस तरह लगाए जाएं, जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित न हो और पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।पुलिस ने वेंडरों को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने और निर्धारित स्थान पर ही दुकान लगाने की अपील की। साथ ही स्पष्ट किया कि सड़क और पाथवे पर इस तरह सामान न फैलाया जाए, जिससे आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो।पुलिस के अनुसार बैठक का उद्देश्य रामनगर चौक से किला रोड तक यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और आम लोगों के आवागमन में किसी तरह की बाधा को रोकना है।ALSO READ: जलस्तर घटने के बाद मणिकर्णिका घाट पर की गई सफाई, गंगा की तलहटी से निकाले करीब 100 किलो कपड़े...
जलस्तर घटने के बाद मणिकर्णिका घाट पर की गई सफाई, गंगा की तलहटी से निकाले करीब 100 किलो कपड़े...
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वाराणसी : गंगा का जलस्तर घटने के बाद मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर बड़े पैमाने पर नगर निगम वाराणसी द्वारा सफाई अभियान चलाया गया, जिसके तहत नदी की तलहटी से लगभग 100 किलो छोड़े गए कपड़े और कचरा निकाला गया है. बाढ़ का पानी उतरने के बाद नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला एवं उनकी टीम तथा नगर निगम ने इस विशेष अभियान को अंजाम दिया, ताकि नदी के पारिस्थितिक तंत्र और जलीय जीवन को नुकसान से बचाया जा सके.मणिकर्णिका घाट की तलहटी और किनारों से निकाले गए इन कपड़ों और पॉलिथीन को इकट्ठा करके बाहर निकाला गया. नमामि गंगे और नगर निगम प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे स्नान या अनुष्ठान के बाद अपने कपड़े नदी में न छोड़ें. गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने बताया कि गंगा में बाढ़ आने और फिर जलस्तर घटने के बाद घाटों पर भारी मात्रा में सिल्ट (गाद), प्लास्टिक और आस्था के नाम पर छोड़े गए पुराने कपड़े जमा हो जाते हैं. गंगा तटों और जल में स्नान के बाद पुराने कपड़े, पॉलिथीन या पूजन सामग्री न छोड़ने की लगातार अपील की जा रही है ताकि मां गंगा को प्रदूषण से बचाया जा सके.उन्होंने कहा कि गंगा नदी हमारी जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और पहचान का हिस्सा भी है. इसे स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों का सक्रिय योगदान और जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है. श्रमदान के दौरान नगर निगम के स्वच्छता कर्मचारी मौजूद रहे.ALSO. READ :सोलर कारोबारी लूटकांड में एक और गिरफ्तार, रॉड से हमला कर लूटे थे नकदी-मोबाइल