रोक, सजा की बात सब हवा में, अब भी बदन को रेत रहा चाइनीज मांझा...

वाराणसी : रामनगर के तपोवन निवासी अमित सिंह की लंका पर दवा की दुकान है. बीते रविवार को बाइक पर सवार होकर दुकान से घर लौट रहे थे. सामने घाट से रामनगर की ओर उतर रहे थे तभी चाइनीज मांझा उनके चेहरे पर आ गिरा. जब तक वह संभलते मांझा ने उनकी चेहरे को बुरी तरह से रेत दिया. खून से लथपथ पर जमीन पर गिर पड़े. वह चाइनीज मांझा के पहले शिकार नहीं है. इसने पिछले कुछ सालों में पांच लोगों की जान ली है जिसमें एक सात साल की मासूम भी शामिल है. इसके वार से घायलों की संख्या पांच सौ से अधिक होगी. प्रतिबंध के बावजूद बिक्री पर इसकी बिक्री पर रोक लगाने में पुलिस व प्रशासन नाकाम है. जबकि बिक्री को रोकने के लिए तमाम नियम व कानून बने.
अब तक पांच की गई जान
चीन के मंझे की चपेट में आने से छह साल में सात साल की मासूम सहित पांच लोगों की मौत हो चुकी है. दो लोगों की जान तो चौकाघाट फ्लाईओवर पर जा चुकी है. 29 अगस्त 2020 को नदेसर निवासी संदीप की सात साल की बेटी कृतिका पांडेयपुर फ्लाईओवर पर चीनी मंझे की चपेट में आ गई थी. उसका भी गला कट गया था. कृतिका को स्कूटी से ले कर जा रहे पिता संदीप की अंगुली कट गई थी. इस घटना में मासूम की मौत हो गई थी.
पांच जून 2021 को चौकाघाट फ्लाईओवर पर भदोही निवासी मेडिकल रिप्रजेंटेटिव आकाश शुक्ला (30 साल) की चीन के मंझे की चपेट में आने से मौत हो गई थी. 15 जनवरी 2022 को बिजली निगम के सेवानिवृत्त एसडीओ और शायर ओवैस अंसारी( 65 साल) की मौत हो गई थी. वह गोलाघाट के रहने वाले थे. 28 सितंबर 2018 को सिगरा थाना क्षेत्र के मुन्ना विल्सन की भी चौकाघाट फ्लाईओवर पर चीन के मंझे से गला कटने से मौत हो गई थी. 31 दिसंबर 2024 का को आदमपुर का रहने वाला 25 वर्षीय विवेक शर्मा बाइक से घर लौट रहे थे, तभी चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के पास सड़क पर लटक रहे चाइनीज मांझा उसकी गर्दन में फंस गया. मांझे की धार इतनी तेज थी कि उनकी गर्दन कट गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई. इस हादसे नें मृतक परिवार और पूरे इलाके को झकझोर दिया था.
एनजीटी पहुंचा चाइनीज मांझा से मौत का मामला
वाराणसी में चाइनीज मांझा विवेक शर्मा की मौत का मामले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंचा. मृतक की मां ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांगा की है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था. न्यायाधिकरण की चार सदस्यीय पीठ ने इस मामले को गंभीर माना. एनजीटी नें सुनवाई के दौरान सरकार और प्रशासन से सख्त सवाल पूछे. पीठ नें कहा कि जब चाइनीज मांझा पहले से ही प्रतिबंधित है, तो फिर यह खुलेआम बाजार में कैसे बिक रहा है और आखिर इस मौत की जिम्मेदारी किसकी है. याचिकाकर्ता की ओर से वकील सौरभ तिवारी ने कहा कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है, बावजूद इसके यह धड़ल्ले से बेचा जा रहा है. प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही की वजह से विवेक शर्मा जैसे होनहार युवक की जान गई.
पुलिस ने बनाए सख्त नियम लेकिन काम नहीं आए
वाराणसी में पतंगबाजी का समय ठंड के मौसम में होता. मकर संक्रांति पर वाराणसी सहित आसपास के शहरों में जमकर पतंगबाजी होती है. हालांकि पतंगबाजी का शौक रखने वाले इसे पूरे साल उड़ाते हैं. पतंग उड़ाने के लिए चाइनजी मांझा का प्रयोग करते हैं जो राह चलते लोगों के मौत की वजह भी बन रहा है. पुलिस की ओर से चाइनीज मांझा की बिक्री पर रोक लगाने और बेचने वालों के खिलाफ जेल भेजने जैसी कार्रवाई करने के बाद भी धड़ल्ले से कारोबार हो रहा है. पहले दालमंडी और अब ये औरंगाबाद के इलाके में शिफ्ट हो गया है. दालमंडी में चल रहे ध्वस्तीकरण के कारण मांझा बेचने वाले औरंगाबाद के अलावा शहर के अलग- अलग इलाकों में ठिकाना बना चुके हैं. पतंग की दुकान चलाने वाले चोरी-छिपे इसे बेच रहे हैं.
गिरफ्तारी से लेकर जेल तक
चाइनीज मांझा से हो रहे हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए. बीते जनवरी व फरवरी माह में पुलिस ने लगातार चाइनीज मांझे की बिक्री वाली जगह को चिह्नित कर अभियान चलाया. सभी थानेदारों को आदेश दिया गया था कि चाइनीज मांझा बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों पर मुकदमा दर्ज करें. चाइनीज मांझा से पतंग उड़ाने वालों की ड्रोन से निगरानी की गई. चाइनीज मांझा इस्तेमाल करने वाले नाबालिगों माता-पिता तथा अभिभावकों को भी स्वतः देखने हेतु निर्देशित किया गया है. . चेतावनी दी गई कि नाबालिग के संदर्भ में उनके माता-पिता को संबंधित थाने बुलाकर कार्रवाई की जाएगी तथा वयस्कों के खिलाफ भी चाइनीज मांझा का प्रयोग पाये जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. चाइनीज मांझा बेचने वाले एक दर्जन दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. चौकाघाट पर हुई युवक की मौत के मामले में तीन दुकानदारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया. इसके बावजूद बिक्री पर रोक नहीं लग सकी.
आसानी से नहीं टूटता चाइनीज मांझा
पतंगबाजों के लिए तीन तरह से मांझा को तैयार किया जाता है. पहले पतली डोर पर चावल के आटे व शीशे के चूरे व रंग लगाकर तैयार जाता है. यह मांझा उतना खतरनाक नहीं होता है, यह मार्केट में आसानी से बिकता भी है. दूसरा पतंगबाज जो खासतौर पर बड़े आयोजन में शामिल होते है उनके लिए जो मांझा तैयार किया जाता है उसमें पतली डोर में ग्लास की डस्ट लगाकर तैयार किया जाता है. जिसे चाइनीज मांझा कहा जाता है उसे फिशिंग डोर से तैयार किया जाता है. ग्लास डस्ट के साथ गंधक लगाकर इसे तैयार किया जाता है. इसकी वजह से यह बहुत शार्प और मजबूत होता है. आसानी से नहीं टूटता है.
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मुख्यमंत्री ने दिया आदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चाइनीज मांझे को लेकर 'जीरो टालरेंस' नीति अपनाई है. इसके अनुसार, यदि चाइनीज मांझे से किसी की भी गर्दन कटने से मौत होती है, तो इसे हादसा नहीं बल्कि 'हत्या' माना जाएगा और दोषी पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सरकार के निर्देशों के तहत, चाइनीज का उपयोग करना, बेचना या खरीदना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. ऐसा करते पाए जाने पर पांच साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.



