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बीएचयू की पुष्‍प प्रदर्शनी में अध्‍यात्‍म और विज्ञान का दिखा मेल, पीएम ने महामना को किया याद

बीएचयू की पुष्‍प प्रदर्शनी में अध्‍यात्‍म और विज्ञान का दिखा मेल, पीएम ने महामना को किया याद
Dec 25, 2025, 09:39 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी - काशी हिंदू विश्वविद्यालय में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 164वीं जयंती के अवसर पर तीन दिवसीय वार्षिक मालवीय स्‍मृति पुष्प प्रदर्शनी का आज गुरुवार को उद्घाटन हुआ. यह तीन दिवसीय आयोजन 27 दिसंबर तक मालवीय भवन में आयोजित किया गया है. इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य समाज में बागवानी और पुष्प कला की समृद्ध परंपरा का उत्सव मनाना है. यह प्रदर्शनी न केवल बीएचयू की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा को दर्शाती है, बल्कि विज्ञान, प्रकृति और आध्यात्मिकता के सुंदर समन्वय का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है.

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इस पुष्प प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों के अलावा बाहर की संस्‍थाओं द्वारा लगभग 400 प्रकार की पुष्प एवं साग-भाजी की आकर्षक प्रदर्शनियां लगाई गई है. इन प्रदर्शनियों का विशेषज्ञ जजों द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. यह कई महीनों की कठिन मेहनत और सतत देखभाल का परिणाम होती है, जिसे देखने के लिए लोगों को पूरे वर्ष प्रतीक्षा रहती है. तीन दिनों तक चलने वाली भव्य पुष्प प्रदर्शनी को देखने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में छात्र, शिक्षक, कर्मचारी एवं आम नागरिक माली भवन पहुंचते है, इस वर्ष भी उद्घाटन के पहले दिन ही भारी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति देखी गई.

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विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत मेल- कुलपति


पुष्प प्रदर्शनी का बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने फीता काटकर शुभारंभ किया, इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, उद्घाटन के पश्चात कुलपति ने पुष्प प्रदर्शनी के साथ-साथ साग-भाजी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और प्रदर्शनी में लगे कलात्मक व नवाचारी प्रयोगों की सराहना की. कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान, चिकित्सा, संस्कृति और आध्यात्मिकता सहित अनेक विषयों का समन्वित शिक्षण एवं अनुसंधान कार्य होता है. इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) विभाग द्वारा पुष्पों से इसरो की प्रतिकृति और कलश का निर्माण किया गया है, जो विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत मेल को दर्शाता है.

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उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल सौंदर्य का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और विज्ञान को केंद्र में रखकर समाज को संदेश देने का एक सशक्त माध्यम भी है. महामना मालवीय जयंती के अवसर पर आयोजित यह पुष्प प्रदर्शनी बीएचयू की रचनात्मकता, अनुशासन और सामूहिक प्रयासों का जीवंत उदाहरण है, जो विश्वविद्यालय को एक बार फिर देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाती है.

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इस पर आधारित है प्रदर्शनी

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इस वर्ष की प्रदर्शनी को इसरो के मिशन की सफलता और प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ी जैविक खेती की भावना पर आधारित किया गया है. प्रदर्शनी में हरियाली को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैविक खेती, फलों, फूलों, सब्जियों और पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. प्रमुख आकर्षणों में रसायन मुक्त सब्जियों, पौधों की दुर्लभ प्रजातियों और विश्वविद्यालय परिसर से एकत्रित सूखी पत्तियों से तैयार उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (पत्ती खाद) की प्रदर्शनी और बिक्री शामिल है. इस प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल बागवानी को बढ़ावा देना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि लोग जैविक खेती के प्रति जागरूक हों और अपने जीवन में इसे अपनाएं.

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पीएम ने महामना को याद कर ल‍िखा


मातृभूमि की सेवा में आजीवन समर्पित रहे भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए समाज सुधार के साथ राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. देश के शिक्षा जगत में उनका अतुलनीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता.

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आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
आखिर कैसे चकनाचूर हुई Salim-Javed की आईकॉनिक जोड़ी?
Salim-Javed: जावेद अख्तर और सलीम खान ने अलग होने से पहले 24 फिल्मों में साथ काम किया था, जिनमें से 22 हिट रही थी. जिनमें दीवार, शोले, डॉन और जंजीर जैसी फिल्में हिंदी सिनेमा को देने वाली मशहूर जोड़ी सलीम-जावेद पर प्राइम वीडियो ने डॉक्युसीरीज एंग्री यंग मेन रिलीज की है. इस सीरीज में सलीम-जावेद जोड़ी के सलीम खान और जावेद अख्तर से जुड़ी अनदेखी और अनकही बातों को पेश किया गया है. इस सुपरहिट जोड़ी ने एक साथ 24 फिल्मों की कहानी संग संवाद लिखे जो ब्लॉकबस्टर रही. लेकिन 21 जून 1981 को ये जोड़ी ऐसे टूटी मानों इन दोनों के बीच का एक गहरा रिश्ता चकनाचूर हो गया. वो जोड़ी जिसका कलम चलाना फिल्म के हिट होने की गारंटी थी.पल भर में कैसे बिखर गई बेस्ट जोड़ीये वहीं जोड़ी है जिसने विज्ञापन देकर शोले के हर सेंटर से एक करोड़ रुपये कमाने का दावा किया था, फिर फिल्म का ये आंकड़ा तीन करोड़ तक पहुंच गया. वो जोड़ी जिसने जंजीर के पोस्टर पर खुद ही एक पेंटर को पैसे देखकर सलीम जावेद का नाम लिखवा दिया था. वो जोड़ी जो एक समय फिल्म के हीरो से ज्यादा फिल्म लिखने की फीस ले रही थी. इस जोड़ी ने सिर्फ 18 दिन के अंदर ब्लॉकबस्टर फिल्म दीवार लिख डाली थी. इतनी खूबिया होने के बाद भी ये जोड़ी बिखर कर रह गई, जिसका कारण हर कोई जानना चाहता है.इसे लेकर एंग्री यंग मेन में एक प्रसिद्ध भारतीय कवि, गीतकार और पटकथा लेखक हैंजावेद अख्तर खुद बताते हैं कि जोड़ी कैसे टूटी. उन्होंने बताया कि करियर का बसंत जा रहा था. हमारे काम में थकान आ रही थी. कभी हम दोनों 24 में से 18 घंटे साथ रहते थे. लेकिन अब हमारे सर्कल अलग हो रहे थे. दोस्त अलग हो रहे थे. इस तरह मैंने अलग होने का फैसला लिया, इस पर सलीम खान ने कहा कि जावेद अलग होना चाहते थे. ऐसे में रोकने के कोई मायने नहीं थे. इस तरह 1981 में भारतीय सिनेमा के इतिहास की ये सबसे सफल जोड़ी अलग हो गई.सलीम और जावेद के अलग होने पर रो पड़ी स्क्रिप्टराइटिंग पर अफसोस सलीम और जावेद के अलग होने के बाद ये जोड़ी अकेले-अकेले स्क्रिप्टराइटिंग की दुनिया में कुछ भी यादगार नहीं कर सकी. हालांकि सलीम खान ने नाम जैसी फिल्म लिखी और जावेद अख्तर ने बेताब, मशाल और अर्जुन जैसी फिल्में. लेकिन सलीम-जावेद जैसा इतिहास ये दोहरा नहीं पाए. हालांकि सलीम-जावेद से अलग होने के बाद जावेद अख्तर ने गीतकार के तौर पर अपनी पहचान कायम कर ली. उनके सलीम खान से अलग होने की एक वजह उनका लिरिक्स की दुनिया की ओर रुझान भी बताया जाता है. लेकिन इस जोड़ी का अलग होना सिर्फ उनके फैन्स का नुकसान था बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी बहुत बड़ा आघात था.
वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
वाराणसी में आज बूथ पर मतदाता सूची पढ़ेंगे बीएलओ
वाराणसी : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 18 जनवरी रविवार को बूथ पर मतदाता सूची पढ़े जाने की तिथि नियत की गयी है. इस तिथि पर सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने नियत मतदेय स्थलों पर प्रातः 10.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक ए०एस०डी०/अन कलेक्टेबल सूची के साथ उपस्थित रहकर आलेख्य मतदाता सूची पढ़ेंगे तथा फार्म-6, 6ए 7 एवं 8 प्राप्त करेंगें.अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी बिपिन कुमार ने बताया कि उक्त तिथि पर जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा पर्यवेक्षकीय अधिकारियों द्वारा बूथों का भ्रमण किया जायेगा. भ्रमण के दौरान यदि कोई बूथ लेविल आफिसर अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरूद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी. उक्त अभियान दिवसों के दिन जनपद के समस्त शिक्षण संस्थान/कार्यालय एवं अन्य संस्थान जहाँ पर मतदेय स्थल स्थापित है, खुले रहेंगे.ALSO READ : जनसंचार बनाम सोशल मीडिया : पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है - प्रो. केजी सुरेशउन्होंने जनसामान्य से अपील की है कि 18 जनवरी को अपने निर्दिष्ट बूथ पर जाकर आलेख्य प्रकाशित मतदाता सूची में अपना नाम देख सकते हैं तथा 01 जनवरी, 2026 को जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो गयी हो अथवा पूर्ण हो रही हो और उनका नाम अभी तक मतदाता सूची में दर्ज नही हो पाया है, वे उक्त तिथि को अपने मतदान केन्द्र पर उपस्थित होकर निर्वाचक नामावली में अपना नाम सम्मिलित कराने हेतु फार्म-6 मय घोषणा पत्र (अनुलग्नक-4) के साथ निर्धारित प्रपत्र (नए मतदाताओं के लिए), फार्म-7 (मतदाता सूची से नाम अपमार्जन हेतु) एवं फार्म-8 (मतदाता सूची में प्रविष्टि में संशोधन अथवा स्थानान्तरण किये जाने हेतु) में पूर्ण विवरण भरकर एवं आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर बी.एल.ओ. को उपलब्ध करा दें. मतदाताओं द्वारा ऑनलाइन के माध्यम से आयोग के ऐप ECINET mobile app एवं वेबसाइट https://voters.eci.gov.in के माध्यम से भी फार्म-6 (घोषणा-पत्र के साथ निर्धारित प्रपत्र) फार्म-7 एवं फार्म-8 भरकर सबमिट कर सकते हैं.
BMC हार से तिलमिलाए राज ठाकरे, सामने आया रिएक्शन
BMC हार से तिलमिलाए राज ठाकरे, सामने आया रिएक्शन
बृहन्मुंबई नगर निगम यानि (BMC) के सामने आए चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है. ठाकरे परिवार के हाथों से मुंबई महानगरपालिका की सत्ता जो छिन्न गई है. जी हां, चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ने ही 'मराठी मानुस' और 'क्षेत्रीय अस्मिता' के मुद्दे पर पीछे न हटने का संकल्प ले बैठे है. जहां राज ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर मराठी लोगों के खिलाफ कुछ भी हुआ तो हम सत्ता में बैठे लोगों का ऐसा हाल करेंगे कि उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर होना ही पड़ेगा. क्योंकि, हमारा संघर्ष मराठी लोगों के लिए, मराठी भाषा के लिए, मराठी पहचान के लिए और एक समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है और हमेशा रहेगा.यही संघर्ष हमारा अस्तित्व है. इसलिए इन मराठियों के हक के लिए हम हमेशा ही लड़ेगा, जरूरी नहीं कि ये हक की लड़ाई सत्ता में रहकर ही लड़ी जाए, बिना सत्ता के भी इस संघर्ष को जीता जा सकता है. इन बातों का मतलब साफ है, अक्सर सत्ताधारी ताकतें और उनके संरक्षण में रहने वाले लोग मराठियों का शोषण करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगे. इसलिए, हमें अपने मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए, चुनाव तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सांसों में मराठी बसी है. वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने एक पोस्ट में दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है', यह तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी लोगों को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसके वे हकदार हैं.मराठियों के लिए संघर्ष का संकल्प जानकारी के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 227 वार्डों में से 65 में जीत हासिल की है, अपने चाचा बाल ठाकरे के नक्शेकदम पर चलने वाले राज ठाकरे ने कहा कि इस हार का मतलब यह नहीं है कि हिम्मत हार जाएंगे और हार मान लेंगे. उन्होंने अपने राज्य और मराठियों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है.मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ावहीं, राज ठाकरे ने आगे कहा कि चाहे एमएमआर क्षेत्र हो या पूरा राज्य, सत्ताधारी ताकतें मराठी लोगों को परेशान करने और उनका शोषण करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. इसलिए, हमें अपने मराठी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए. मुंबई चुनाव में मिली हार के बाद राज ठाकरे ने कहा कि हम उन सभी चीजों का विश्लेषण करेंगी और जो गलती हुई है, उसमें सुधार करेंगे। उन्होंने पार्टी को बिल्कुल नए सिरे से खड़ा करने का संकल्प लिया.