बीएचयू की पुष्प प्रदर्शनी में अध्यात्म और विज्ञान का दिखा मेल, पीएम ने महामना को किया याद

वाराणसी - काशी हिंदू विश्वविद्यालय में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 164वीं जयंती के अवसर पर तीन दिवसीय वार्षिक मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी का आज गुरुवार को उद्घाटन हुआ. यह तीन दिवसीय आयोजन 27 दिसंबर तक मालवीय भवन में आयोजित किया गया है. इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य समाज में बागवानी और पुष्प कला की समृद्ध परंपरा का उत्सव मनाना है. यह प्रदर्शनी न केवल बीएचयू की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा को दर्शाती है, बल्कि विज्ञान, प्रकृति और आध्यात्मिकता के सुंदर समन्वय का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है.

इस पुष्प प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों के अलावा बाहर की संस्थाओं द्वारा लगभग 400 प्रकार की पुष्प एवं साग-भाजी की आकर्षक प्रदर्शनियां लगाई गई है. इन प्रदर्शनियों का विशेषज्ञ जजों द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. यह कई महीनों की कठिन मेहनत और सतत देखभाल का परिणाम होती है, जिसे देखने के लिए लोगों को पूरे वर्ष प्रतीक्षा रहती है. तीन दिनों तक चलने वाली भव्य पुष्प प्रदर्शनी को देखने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में छात्र, शिक्षक, कर्मचारी एवं आम नागरिक माली भवन पहुंचते है, इस वर्ष भी उद्घाटन के पहले दिन ही भारी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति देखी गई.

विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत मेल- कुलपति
पुष्प प्रदर्शनी का बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने फीता काटकर शुभारंभ किया, इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, उद्घाटन के पश्चात कुलपति ने पुष्प प्रदर्शनी के साथ-साथ साग-भाजी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और प्रदर्शनी में लगे कलात्मक व नवाचारी प्रयोगों की सराहना की. कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान, चिकित्सा, संस्कृति और आध्यात्मिकता सहित अनेक विषयों का समन्वित शिक्षण एवं अनुसंधान कार्य होता है. इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) विभाग द्वारा पुष्पों से इसरो की प्रतिकृति और कलश का निर्माण किया गया है, जो विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत मेल को दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल सौंदर्य का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और विज्ञान को केंद्र में रखकर समाज को संदेश देने का एक सशक्त माध्यम भी है. महामना मालवीय जयंती के अवसर पर आयोजित यह पुष्प प्रदर्शनी बीएचयू की रचनात्मकता, अनुशासन और सामूहिक प्रयासों का जीवंत उदाहरण है, जो विश्वविद्यालय को एक बार फिर देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाती है.


इस पर आधारित है प्रदर्शनी

इस वर्ष की प्रदर्शनी को इसरो के मिशन की सफलता और प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ी जैविक खेती की भावना पर आधारित किया गया है. प्रदर्शनी में हरियाली को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैविक खेती, फलों, फूलों, सब्जियों और पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. प्रमुख आकर्षणों में रसायन मुक्त सब्जियों, पौधों की दुर्लभ प्रजातियों और विश्वविद्यालय परिसर से एकत्रित सूखी पत्तियों से तैयार उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (पत्ती खाद) की प्रदर्शनी और बिक्री शामिल है. इस प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल बागवानी को बढ़ावा देना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि लोग जैविक खेती के प्रति जागरूक हों और अपने जीवन में इसे अपनाएं.
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पीएम ने महामना को याद कर लिखा
मातृभूमि की सेवा में आजीवन समर्पित रहे भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए समाज सुधार के साथ राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. देश के शिक्षा जगत में उनका अतुलनीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता.






