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अदालत में आगे बढ़ चुका है ज्ञानवापी का मामला, एसएसआई सर्वे में आए मत्वपूर्ण साक्ष्य सामने

अदालत में आगे बढ़ चुका है ज्ञानवापी का मामला, एसएसआई सर्वे में आए मत्वपूर्ण साक्ष्य सामने
Jul 14, 2026, 07:25 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसीः ज्ञानवापी मामले का हल निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुलह-समझौते का निर्देश दिया है. मंगलवार को होने वाली मध्यस्तता में मुस्लिम पक्ष ने शामिल नहीं होने की घोषणा की है. वहीं ज्ञानवापी का मुकदमा अदालत में काफी आगे तक जा चुका है. अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने ज्ञानवापी परिसर के कई हिस्सों की जांच की है. इसकी रिपोर्ट अदालत में सौंप दी है. जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं. अभी परिसर के कई हिस्सों की जांच बाकी है. इसकी मांग को लेकर अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल है. सबसे चर्चित मुकदमा पांच महिलाओं द्वारा ज्ञानवापी स्थित मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग को लेकर है. इसमें 18 अगस्त 2021 को सिविल जज सीनियर डिविजन रविकुमार दिवाकर की अदालत में वाद दाखिल किया था.


अदालती आदेश पर ज्ञानवापी में अप्रैल 2022 में एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही हुई. इसमें 16 मई को मंदिर पक्ष ने ज्ञानवापी की पानी टंकी में शिवलिंग जैसी आकृति मिलने की बात कही. इसी मुकदमे में अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर में एएसआइ का सर्वे चार अगस्त 2024 से 91 दिन चला. रिपोर्ट जिला जज कोर्ट में दाखिल की गई. एएसआइ ने ज्ञानवापी परिसर में मौजूद इमारत की बाहरी दीवारों (खासतौर पर पश्चिमी दीवार), शीर्ष, मीनार, तलगृह में जांच की. रिपोर्ट में बताया कि ज्ञानवापी में विशाल मंदिर रहा होगा. मौजूद इमारत उसके अवशेष पर बनी है. देवी-देवताओं की मूर्तियां, कमल, घंटा, स्वास्तिक, डमरू, त्रिशूल के चिह्न समेत मंदिर के कई और साक्ष्य मिले हैं.


हिंदू पक्ष का दावा मंदिर तोड़कर बनाई गई वर्तमान इमारत

एसआई रिपोर्ट अनुसार मंदिर पक्ष का दावा है कि यहां आदिविश्वेश्वर का अष्टकोणीय विशाल मंदिर तोड़कर वर्तमान इमारत बनाई गई. जिला जज की अदालत में दाखिल मुकदमे की रिपोर्ट पर चर्चा शेष है. ज्ञानवापी स्थित जिन हिस्सों में जांच नहीं हो पाई उनमें पानी का टैंक (वजुखाना) है जिसमें मंदिर पक्ष शिवलिंग मिलने की बात कहता है। मंदिर पक्ष का दावा है कि पानी के टैंक में शिवलिंग मिला है तो नीचे उसका अरघा जरूर होगा. इसलिए टैंक व उसके नीचे एएसआइ सर्वे जरूरी है ताकि शिवलिंग और उसके नीचे अरघा की मौजूदगी स्पष्ट हो सके. ज्ञानवापी में मौजूद इमारत के मुख्य शिखर के नीचे, जहां मंदिर पक्ष स्वयंभू आदिविश्वेश्वर ज्योर्तिलिंग विद्यमान होने की बात कहता है, का भी एएसआइ से सर्वे के लिए स्थानीय अदालत व हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया है.


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ज्ञानवापी में शुरू हुआ पूजा-पाठ

ज्ञानवापी से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला 31 जनवरी 2024 को आया था. पं. सोमनाथ व्यास के नाती शैलेंद्र पाठक द्वारा दाखिल मुकदमे में जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश ने ज्ञानवापी स्थित व्यासजी के तलगृह में विश्वनाथ मंदिर द्वारा नाम निर्दिष्ट पुजारी से नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग की व्यवस्था का जिलाधिकारी को आदेश दिया था। अनुपालन में प्रशासन ने बैरिकेडिंग काटकर देर रात पूजा-पाठ का इंतजाम कर दिया।

1993 में ज्ञानवापी की बैरिकेडिंग की गई थी जिसके बाद व्यासजी के कमरे में आने-जाने पर रोक लग गई थी। वाराणसी की कोर्ट में चल रहा सबसे पुराना मुकदमा वर्ष 1991 में स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओर पं. सोमनाथ व्यास व अन्य द्वारा दाखिल है।

एएसआई को परिसर में मिले हिंदू चिह्न

ज्ञानवापी में सर्वे पर एएसआई ने जो रिपोर्ट दिया उसके मुताबिक दीवारों पर उकेरी गईं हिंदू धर्म से संबंधित तस्वीरें और लिखे गए शब्द बता रहे हैं कि यह पूर्व में विशाल मंदिर रहा होगा. एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार एक बीम पर नागरी लिपि में ‘कासी’ लिखा है. यह भी लिखा है कि यह 17वीं शताब्दी का है। इसकी तस्वीरें भी रिपोर्ट में हैं. एक अवशेष पर संस्कृत में श्रीमच्छा, पा भृगुवास, वद्विजातिश्च, आय अर्जानी, णरायै परोप, जातिभि: धर्मज्ञ: अंकित है. एएसआइ ने इसे 16वीं शताब्दी का अवशेष बताया है. ज्ञानवापी मुकदमे के वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन का कहना है कि एएसआई सर्वे के दौरान ज्ञानवापी में कई शिलालेख देखे गए. रिपोर्ट में सर्वेक्षण के दौरान 34 ऐसे शिलालेखों के मिलने की बात कही गई है जो पहले से मौजूद हिंदू मंदिरों के हैं और जिनका मौजूदा ढांचे के निर्माण और मरम्मत के दौरान दोबारा उपयोग किया गया है. इनमें देवनागरी, तेलुगु और कन्नड़ लिपियों के शिलालेख भी शामिल हैं. संरचना में पहले के शिलालेखों के पुन: उपयोग से पता चलता है कि पहले की संरचनाओं को नष्ट कर दिया गया था और उनके हिस्सों को मौजूदा संरचना के निर्माण में फिर से उपयोग किया गया. इन शिलालेखों में देवताओं के तीन नाम जैसे जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर पाए गए हैं. देवनागरी, तेलुगु और कन्नड़ लिपियों के शिलालेख भी मिले हैं।


1993 में की गई ज्ञानवापी की बैरिकेडिंग


1993 के पहले ज्ञानवापी मस्जिद में नियमित श्रृंगार गौरी का दर्शन पूजन होता था और बाद में बैरिकेडिंग कर दी गई थी. इस बाबत हिंदू पक्ष का दावा है कि बिना किसी आदेश के मां श्रृंगार गौरी का दर्शन- पूजन रोक दिया गया था. ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी प्रकरण में वादी पक्ष की ओर से नियिमत दर्शन-पूजन की मांग की गई है. इसके लिए वादी पक्ष ने अपना तर्क भी अदालत में दिया था. वादी संख्या एक राखी सिंह के वकील मानबहादुर सिंह ने अदालत के सामने कहा था कि मां श्रृंगार गौरी का दर्शन-पूजन वर्ष 1993 से पहले तक नियमित होता था. इसके बाद मस्जिद की बैरिकेडिंग की गई. इससे मस्जिद की पश्चिमी दीवार पर मौजूद मां श्रृंगार गौरी की प्रतिमा भी बैरिकेडिंग के अंदर ही आ गई. इसके चलते दर्शनार्थियों को वहां जाकर दर्शन-पूजन करने से रोक दिया गया. जबकि बैरिकेडिंग कहां से आ गई? इस बारे में किसी तरह का कोई लिखित आदेश आज तक मौजूद नहीं है. वर्ष 1993 में उत्तर प्रदेश में जब प्रदेश के चुनाव हुए तो दिसंबर माह में मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. उस समय केंद्र में पीवी नरसिंह राव की कांग्रेस सरकार थी. मगर, बैरिकेडिंग किसके आदेश पर हुई और मां श्रृंगार गौरी का दर्शन-पूजन किसने आदेश से रोका गया यह जानकारी किसी को नहीं है. मगर, आज लगभग तीन दशक बाद भी बैरिकेडिंग पर सवाल बरकरार है.

सुलह-समझौत से दो मामलों को हल करने का प्रयास

सुप्रीम कोर्ट ने सुलह-समझौते से ज्ञानवापी के दो मुकदमों को हल करने का निर्देश दिया है. इसमें पहला मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन का है। इसे हौजखास नई दिल्ली निवासी राखी सिंह, वाराणसी के सूरजकुंड लक्सा की लक्ष्मी देवी, सरायगोवर्धन चेतगंज की सीता साहू, मंजू व्यास, हनुमान पाठक की रेखा पाठक वादी के तौर पर हैं. इस मुकदमे में दूसरी ओर चीफ सेक्रट्ररी के माध्यिम से उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी वाराणसी, पुलिस कमिश्नर वाराणसी, ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है. वही दूसरा मुकदमा शैलेंद्र पाठक की ओर से दाखिल किया गया था. इसमें जिला जज की अदालत ने ज्ञानवापी स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजन-अर्चन का आदेश दिया है.

आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडी
आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडी
वाराणसी: आठ महीने पहले तक कुछ फीट चौडी दालमंडी की गली से आसमान नजर नहीं आता था। अब यह 17.5 मीटर चौड़ी हो गई है। आज भूमि पूजन के साथ इसके रोड बनने की शुरुआत भी हो गई। लेकिन यह बदलाव यूं ही नहीं हो गया। इस गली में बसे सैकड़ों लोगों के मकान दुकान टूटे, इस दर्द में उनके आंसु बहे। समय समय पर उनका आक्रोश भी झलका अरसे तक जिंदगी खाना बदोश भी रही।कभी तंग गलियों, भीड़ और दुकानों से गुलजार रहने वाली वाराणसी की दालमंडी अब एक नए रूप में नजर आएगी. लंबे समय से चल रहे चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद रविवार को यहां मॉडल सड़क के निर्माण की शुरुआत हो गई. चौक थाने के पास भूमि पूजन के साथ पीडब्ल्यूडी ने सड़क निर्माण का काम शुरू किया.भूमि पूजन विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने किया. करीब 650 मीटर लंबी दालमंडी की सड़क को 17.5 मीटर यानी करीब 60 फीट चौड़ा किया जाएगा. पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक करीब तीन महीने में सड़क का निर्माण पूरा कर इसे जनता को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है.वर्षों पुरानी तस्वीर अब बदलने की तैयारीदालमंडी सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि काशी की पुरानी पहचान का हिस्सा रही है. यहां की गलियों में वर्षों से कारोबार करने वाले दुकानदारों और रहने वाले परिवारों की यादें जुड़ी हैं. चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान कई घर और दुकानें टूट गईं. कहीं लोगों ने अपनी आंखों के सामने पुश्तैनी मकानों को गिरते देखा तो कहीं दुकानों के टूटने के साथ वर्षों पुराना कारोबार भी खत्म हुआ.प्रशासन के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए 181 मकानों में से करीब 150 मकानों को गिराया जा चुका है. बाकी मकानों पर भी कार्रवाई चल रही है. इसके अलावा 6 मस्जिदों के वे हिस्से भी हटाए गए जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे थे.अब इन्हीं टूटे हुए हिस्सों के बीच से एक नई सड़क का निर्माण शुरू हो रहा है. यानी जिस जगह कुछ समय पहले तक मलबा और टूटे मकान दिखाई दे रहे थे वहां आने वाले दिनों में एक चौड़ी और व्यवस्थित सड़क नजर आएगी.also read: कांवड़ मार्ग पर पुलिस कमिश्नर का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती.109 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजाचौड़ीकरण की कार्रवाई के तहत प्रभावित मकानों और धार्मिक स्थलों के लिए मुआवजे का प्रावधान किया गया. पीडब्ल्यूडी की ओर से अब तक 109 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है. परियोजना के लिए कुल 215.88 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया है.अधिकारियों ने प्रत्येक मकान की नापी निर्माण और सड़क की जद का आकलन करने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की. रजिस्ट्री के बाद धीरे-धीरे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ी.जुलाई 2025 से शुरू हुई थी प्रक्रियादालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को जुलाई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी. इसके बाद 23 जुलाई से मकानों की नापी शुरू हुई. नापी के बाद मकानों का मूल्यांकन और मुआवजा तय किया गया. अंतिम नापी के बाद संबंधित मकानों पर लाल निशान लगाए गए और फिर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हुई.स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए चौक थाने में पीडब्ल्यूडी का कैंप कार्यालय भी बनाया गया, जहां लोगों को दस्तावेज और रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी दी गई.29 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था ध्वस्तीकरणदालमंडी में ध्वस्तीकरण की पहली कार्रवाई 29 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी. शुरुआत में हथौड़े से मकान और दुकानें तोड़ी गईं. बाद में जनवरी 2026 में बुलडोजर की मदद से कार्रवाई तेज की गई.9 फरवरी को जर्जर बताए गए मकानों और दुकानों पर भी कार्रवाई हुई. उस दौरान विरोध के बीच एक व्यापारी ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की चेतावनी तक दे दी थी और अपनी दुकान में आग लगा दी थी. इस घटना ने चौड़ीकरण के दौरान लोगों की भावनाओं और उनके वर्षों पुराने आशियाने-कारोबार से जुड़े दर्द को सामने ला दिया था.पोकलैंड आने के बाद तेज हुई कार्रवाई8 जून 2026 को दालमंडी में पोकलैंड मशीन पहुंची. अगले दिन से मशीनों के जरिए ध्वस्तीकरण तेज कर दिया गया. जिन मकानों को हाथ से तोड़ने में मुश्किल हो रही थी, उन्हें मशीनों की मदद से जमींदोज किया गया.इसके बाद मस्जिदों के चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्सों को भी संबंधित कमेटियों की सहमति से हटाया गया. जुलाई में खुदा बक्श उर्फ लंगड़े हाफिज मस्जिद के जद में आने वाले हिस्से को भी हटाने का काम शुरू हुआ. यहां मस्जिद से जुड़ी करीब 24 दुकानें भी हटाई गईं.अब मलबे की जगह दिखेगी नई सड़कध्वस्तीकरण के बाद अब दालमंडी से मलबा हटाने का काम चल रहा है. भूमि पूजन के साथ सड़क निर्माण की शुरुआत हो गई है. नई सड़क के दोनों तरफ पटरी बनाई जाएगी. सड़क के नीचे बिजली, पानी और सीवर की व्यवस्था करने की योजना है. इससे वर्षों से दिखाई देने वाला तारों का जंजाल भी हटाया जाएगा.नई सड़क नई व्यवस्था की शुरुआत जरूर है, लेकिन इसके साथ दालमंडी के लोगों की पुरानी यादें भी जुड़ी हैं. जिन घरों में पीढ़ियां बीतीं, जिन दुकानों से परिवारों की रोजी-रोटी चली और जिन गलियों में लोगों ने अपना पूरा जीवन देखा, अब वहां एक नई तस्वीर बनने जा रही है.प्रशासन इसे काशी की आधुनिक और व्यवस्थित सड़क के रूप में देख रहा है, जबकि स्थानीय लोगों के लिए यह बदलाव उनकी पुरानी पहचान और नई उम्मीदों के बीच का सफर है.अब देखना होगा कि अगले तीन महीनों में दालमंडी की यह पुरानी तस्वीर किस तरह एक नई और आधुनिक सड़क में बदलती है.
कांवड़ मार्ग पर पुलिस कमिश्नर का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती.
कांवड़ मार्ग पर पुलिस कमिश्नर का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती.
वाराणसी: श्रावण मास में कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था बनाए रखने को लेकर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट पूरी तरह अलर्ट है. इसी क्रम में पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल ने शनिवार को मंडुवाडीह से गोदौलिया तक शहरी कांवड़ मार्ग का आकस्मिक स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों का जायजा लिया.पुलिस आयुक्त ने कांवड़ मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर रुककर व्यवस्थाओं को देखा और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली. उन्होंने यह भी देखा कि कांवड़ यात्रियों के आवागमन के दौरान किसी तरह की बाधा तो नहीं आ रही है. निरीक्षण के दौरान उन्होंने मार्ग में बनाए गए विश्राम स्थलों का भी जायजा लिया और वहां मौजूद कांवड़ यात्रियों से सीधे संवाद कर सुविधाओं की जानकारी ली.कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ मार्ग पर यातायात व्यवस्था को हर हाल में सुचारु रखा जाए. मार्ग पर किसी भी तरह का अतिक्रमण और अवैध पार्किंग कांवड़ यात्रियों के आवागमन में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सड़क और कांवड़ मार्ग से अतिक्रमण को तत्काल हटाने तथा अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए.उन्होंने कहा कि श्रावण मास के दौरान कांवड़ मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए. पुलिसकर्मी लगातार मार्ग पर मौजूद रहकर यातायात का संचालन करें और भीड़ बढ़ने की स्थिति में तत्काल प्रभावी कदम उठाएं.पुलिस आयुक्त ने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार पैदल गश्त करने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह स्वयं भी क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करें और किसी भी तरह की समस्या सामने आने पर तत्काल उसका समाधान कराएं.निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. मार्ग में संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए.also read:छात्राओं पर अश्लील इशारे और फब्तियां कसने वाला युवक गिरफ्तार...पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण मास को देखते हुए कांवड़ मार्ग पर लगातार निगरानी की जा रही है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कांवड़ यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो और यात्रा के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रहे.
छात्राओं पर अश्लील इशारे और फब्तियां कसने वाला युवक गिरफ्तार...
छात्राओं पर अश्लील इशारे और फब्तियां कसने वाला युवक गिरफ्तार...
वाराणसी: मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में महिलाओं और छात्राओं पर अश्लील इशारे करने और फब्तियां कसकर परेशान करने के आरोप में मिशन शक्ति/एंटी रोमियो टीम ने एक युवक को गिरफ्तार किया है.पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है.पुलिस के अनुसार मिशन शक्ति/एंटी रोमियो टीम क्षेत्र में भ्रमण और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मोहली बीर बाबा मंदिर के पास एक युवक आने-जाने वाली महिलाओं और छात्राओं पर अशोभनीय इशारे कर रहा है और अभद्र टिप्पणियां कर उन्हें परेशान कर रहा है.सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में ले लिया पूछताछ में उसकी पहचान अभिषेक कुमार (20), पुत्र पारसनाथ बिंद, निवासी ग्राम डौमेला, थाना मिर्जामुरादपुलिस ने मामले में मु0अ0सं0 0230/2026, धारा 296 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर मिशन शक्ति/एंटी रोमियो टीम की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है.कार्रवाई करने वाली टीम में मिशन शक्ति प्रभारी म0उ0नि0 अनुजा गोस्वामी, रिक्रूट महिला कांस्टेबल पूनम और रिक्रूट कांस्टेबल विवेक कुमार सिंह शामिल रहे.