कार्टून कैरेक्टर जैसे पिचकारियों से सज गया बाजार, छाई रौनक

वाराणसी- उत्तर-प्रदेश के जिले में जैसे जैसे होली का त्योहार नजदीक आ रहा है बाजार रंगों से पटने लगा है. चौक, हडहा, गोदौलिया, लंका और सिगरा समेत ग्रामीण बाजारों में पिचकारी, गुलाल और होली से संबंधित सामान की बिक्री में तेजी आई है. व्यापारियों के अनुसार, इस वर्ष पिछले साल की तुलना में लगभग 25 से 30 प्रतिशत अधिक माल मंगाया गया है, और पहले सप्ताह में ही 30 से 40 प्रतिशत तक की खपत हो चुकी है.

आर्गेनिक और फूलों की पंखुड़ियों से बने प्राकृतिक रंग
इस बार बाजार में पिचकारियों के नए-नए डिज़ाइन ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं. कार्टून कैरेक्टर, टैंक मॉडल, प्रेशर गन, बैकपैक स्टाइल और एलईडी लाइट वाली पिचकारियां बच्चों के बीच खासा लोकप्रिय हैं. पिचकारियों की कीमत 20 रुपये से लेकर 800 रुपये तक है. इसके अलावा, हर्बल गुलाल, आर्गेनिक रंग, फूलों की पंखुड़ियों से बने प्राकृतिक रंग, रंगीन गुब्बारे, स्प्रे कलर, होली स्पेशल टी-शर्ट, टोपी और मुखौटे भी बाजार में उपलब्ध हैं. व्यापारी राजेश कुमार का कहना है कि मोदी-योगी पिचकारी और कमल के फूल वाली पिचकारी की मांग अधिक है.

प्रेशर और चाइनीज पिचकारियां भी बाजार में उपलब्ध हैं. मोदी मुखौटे की बिक्री भी अच्छी हो रही है. मिट्टी की पिचकारियों की मांग में वृद्धि हुई है. काशी और आसपास के जिलों में बने उत्पादों को दुकानदार प्राथमिकता दे रहे हैं. इस बार होलिका दो मार्च को जलेगी लेकिन होली चार मार्च को ज्योतिषीय विधान के अनुसार पड़ रही है. लिहाजा होली का बाजार तीन दिनों तक की रौनक वाला होगा.

बिक्री में तेजी के संकेत
वर्ष 2005 के बाद से सस्ती चीनी पिचकारियों ने बाजार में तेजी से जगह बनाई थी. कम कीमत और आकर्षक डिज़ाइन के कारण इनकी मांग बढ़ी, लेकिन हाल के वर्षों में आयात नियमों की सख्ती और स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन से स्थानीय निर्माताओं को फिर से अवसर मिला है. अरबाज अहमद बताते हैं कि होली तक बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है, जिससे बाजार पूरी तरह गुलजार रहेगा. त्योहारी सीजन में होली से जुड़ा कारोबार लगभग 10-15 दिनों में होता है, जिसमें अंतिम 3-4 दिन सबसे अधिक बिक्री होती है. यदि शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्र और थोक मंडी की सप्लाई को जोड़ दिया जाए, तो आंकड़ा 50 करोड़ रुपये के आसपास भी पहुंच सकता है.



