श्रावणी उपाकर्म में गूंजा संस्कृत-संस्कृति और संस्कार का संदेश...

वाराणसी: सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शुक्रवार को श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के अवसर पर श्रावणी उपाकर्म एवं ऋषि पूजन का आयोजन हर्षोल्लास और वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। कार्यक्रम में संस्कृत परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध, संस्कृति और संस्कार के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि गुरु और शिक्षक संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के संदर्भ में विद्यार्थियों को उत्तम कर्म करने का पाठ पढ़ाएं। श्रेष्ठ गुरु ही श्रेष्ठ विद्यार्थियों का निर्माण कर सकते हैं और श्रेष्ठ विद्यार्थियों के माध्यम से ही श्रेष्ठ भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि यही विद्यार्थी आगे चलकर भारत की पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र नाथ पांडेय ने श्रावणी उपाकर्म की धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस दिन स्नान के बाद नए जनेऊ का पूजन किया जाता है। जनेऊ की गांठ में ब्रह्म का वास तथा इसके धागों में सप्तऋषियों का वास माना जाता है। ब्रह्म और सप्तऋषियों के पूजन के बाद विधि-विधान से श्रावणी उपाकर्म संपन्न किया जाता है।
मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य एवं न्यायशास्त्र के विद्वान प्रो. रामपूजन पाण्डेय ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म को द्विजन्म के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का पहला जन्म माता के गर्भ से होता है, जबकि गुरु के सानिध्य में शिक्षा एवं संस्कार प्राप्त करने के बाद उसका दूसरा जन्म माना जाता है। गुरुकुल परंपरा में गुरु अपने शिष्यों को राष्ट्र, समाज और परिवार के प्रति उत्तम चरित्र, नैतिकता, राष्ट्रीयता, संस्कार, संस्कृति तथा दया-करुणा की भावना का पाठ पढ़ाते थे।
उन्होंने कहा कि संस्कृत दिवस और रक्षाबंधन का पर्व भी इसी दिन मनाया जाता है। श्रावणी उपाकर्म को पापों के प्रायश्चित और आत्मशुद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है।
इससे पूर्व वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र नाथ पांडेय सहित शिक्षक और विद्यार्थियों ने सुबह करीब 9:30 बजे गंगा तट पर स्नान एवं विधि-विधान के साथ ऋषि पूजन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के वेद विभाग में सुबह 10:30 बजे षोडशोपचार विधि से सप्तऋषि, गौरी और गणेश का पूजन किया गया। पूजन में संस्कृत, संस्कृति, संस्कार, दया, करुणा और राष्ट्रीयता की भावना के लिए मंगलकामना की गई।
कार्यक्रम का आयोजन वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पांडेय के निर्देशन में तथा डॉ. विजय कुमार शर्मा के आचार्यत्व एवं संयोजकत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. ज्ञानेन्द्र सांपकोटा, डॉ. पप्पू चौबे, डॉ. संजय कुमार तिवारी, संतोष दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।श्रावणी उपाकर्म में गूंजा संस्कृत-संस्कृति और संस्कार का संदेश
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कार्यक्रम का आयोजन वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पांडेय के निर्देशन में तथा डॉ. विजय कुमार शर्मा के आचार्यत्व एवं संयोजकत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. ज्ञानेन्द्र सांपकोटा, डॉ. पप्पू चौबे, डॉ. संजय कुमार तिवारी, संतोष दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।



