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अंडमान की ओंगे जनजाति 65 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीका से आए प्रारंभिक होमो सैपियंस की वंशज : डा. थंगराज

अंडमान की ओंगे जनजाति 65 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीका से आए प्रारंभिक होमो सैपियंस की वंशज : डा. थंगराज
Dec 02, 2025, 11:08 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: अंडमान द्वीपसमूह में निवास करने वाले निग्रिटो समुदायों में से एक ओंगे जनजाति समुदाय 65 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीका से आए होमो सैपियंस की प्रारंभिक खेप के वंशज हैं. इस जनजाति का अस्तित्व अब खतरे में है. जनजाति के महज 135 सदस्य ही अब तक बचे थे, हाल ही में एक शिशु के जन्म के बाद अब उनकी संख्या 136 हो गई है.

यह स्थिति उनकी सांस्कृतिक और जैविक अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती है. ये जानकारी प्रसिद्ध जेनेटिक विशेषज्ञ, सीएसआइआर-सेंटर फार सेल्युलर एंड मालिक्यूलर बायोलाजी (सीसीएमबी) हैदराबाद के भटनागर फेलो ‘विज्ञानश्री’ डा. कुमारस्वामी थंगराज ने दी. वह सोमवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत भारतीय उपमहाद्वीप के जीनोमिक इतिहास पर चर्चा कर रहे थे.


जनजाति की आबादी में गिरावट


ओंगे जनजाति के डीएनए विश्लेषण के आधार पर डा. थंगराज ने बताया कि इस समुदाय के पूर्वज अफ्रीका से लगभग 65 हज़ार वर्ष पूर्व दक्षिणी मार्ग से भारतीय उपमहाद्वीप पहुंचे थे. यह प्रवास मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जब होमो सेपियंस ने अफ्रीकी महाद्वीप छोड़कर एशिया के तटीय क्षेत्रों की ओर प्रस्थान किया, जो आधुनिक गैर-अफ्रीकी आबादी का मूल स्रोत है.

उन्होंने बताया कि ओंगे लोगों का जीनोटाइप पूर्वी एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई निग्रिटो समूहों से निकटता रखता है, लेकिन उन्होंने निएंडरथल डीएनए के न्यूनतम प्रभाव को भी उजागर किया, जो अफ्रीका से प्रवास की पुष्टि करता है. कहा कि कि औपनिवेशिक काल में सेलुलर जेल बनाने के दौरान अंग्रेजों द्वारा इनकी हत्या से लेकर वर्तमान पर्यावरणीय दबावों तक, ओंगे आबादी में भारी गिरावट आई है. 1901 में 672 से घटकर आज 136 रह गई है.


कंकाल झील का रहस्‍योद्धाटन


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बाहरी संपर्क, बीमारियां और वनों की कटाई उन्हें विलुप्ति की कगार पर पहुंचा चुके हैं. डा. थंगराज ने त्तराखंड के चमोली जिले में 5,020 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ‘कंकाल झील’ या ‘मिस्ट्री लेक’ के नाम से प्रसिद्ध रूपकुंड झील में मिले कंकालों के डीएनए विश्लेषण के आधार पर बताया कि ये कंकाल एक साथ मरे लोगों के नहीं हैं.

बताया क‍ि तथ्‍यों के व‍िपरीत यह कम-से-कम तीन अलग-अलग समूहों के हैं, जो लगभग 1,000 साल के अंतराल में वहां पहुंचे थे. कार्यक्रम का संचालन ज्ञान लैब की शोधार्थी देबश्रुति दास व संयोजन प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने किया. प्रो. एससी लाखोटिया, प्रो. राजीव रमन, प्रो. एके सिंह, डा. चंदना बसु, प्रो. परिमल दास, डा. ऋचा आर्य, डा. राघव, डा. गीता आदि भी मौजूद रहे.

BHU में छात्रसंघ बहाली की मांग तेज, 29 अक्टूबर को निकलेगा छात्र मार्च; अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान.
BHU में छात्रसंघ बहाली की मांग तेज, 29 अक्टूबर को निकलेगा छात्र मार्च; अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान.
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। शनिवार को विश्वविद्यालय के कला संकाय लॉन में आयोजित छात्र महापंचायत में छात्रसंघ बहाली और लोकतांत्रिक छात्र अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। महापंचायत में शामिल छात्र-छात्राओं ने सर्वसम्मति से 29 अक्टूबर को छात्र मार्च निकालने और इसके बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का निर्णय लिया।छात्र महापंचायत में तय किया गया कि 29 अक्टूबर को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से छात्रसंघ भवन तक मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर धरना शुरू किया जाएगा। छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी होने तक आंदोलन को संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।महापंचायत में छात्रों ने कहा कि छात्रसंघ विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने और उनके अधिकारों की आवाज उठाने के लिए एक मंच मिलता है। छात्रों के मुताबिक, लंबे समय से विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली की मांग उठाई जा रही है। अब इस मांग को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।छात्रों ने विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों से 29 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि छात्र एकजुट होकर छात्रसंघ की बहाली की मांग को प्रभावी तरीके से उठा सकते हैं।ALSO READ : वाराणसी में संदिग्ध हालात में सफाईकर्मी की मौत, घर में खून से लथपथ मिला शवछात्र महापंचायत के इस फैसले के बाद बीएचयू में छात्रसंघ बहाली का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब 29 अक्टूबर को प्रस्तावित छात्र मार्च और उसके बाद शुरू होने वाले धरने पर सबकी नजर रहेगी।
वाराणसी में संदिग्ध हालात में सफाईकर्मी की मौत, घर में खून से लथपथ मिला शव
वाराणसी में संदिग्ध हालात में सफाईकर्मी की मौत, घर में खून से लथपथ मिला शव
वाराणसी : आदमपुर थाना क्षेत्र के गोलाघाट में शनिवार को नगर निगम के सफाई कर्मी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में हड़कंप मच गया. उसके शरीर पर चोटों के निशान को देखते हुए हत्‍या की आशंका जताई जा रही है. सूचना के बाद पुलिस शव को कब्‍जे में लेने के साथ अग्रिम कार्रवाई में जुट गई है.वहीं क्षेत्र में मौत को लेकर तरह - तरह की चर्चा व्‍याप्‍त है. उसके चेहरे, सिर पर गंभीर जख्‍म के निशान मिले हैं.सफाईकर्मी के चचेरे भाई ने बताया कि बीती रात खाना खाकर वह अपने घर गोलाघाट चला गया था. इस बीच शनिवार की सुबह नमो घाट पर एयर शो के समय सफाई कर्मियों ने उसके न आने पर तलाश शुरू की. कुछ लोग उसके घर पहुंचे तो युवक का शव घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला. फर्श पर खून फैला था. मृतक के शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान होने की बात सामने आई है.ALSO READ : वाराणसी के इस गांव में एक महीने में चार मौतों से दहशत, तेज बुखार एवं जोड़ों में दर्द से परेशान लोगघटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं है. मामले में हत्या या दुर्घटना समेत किसी भी आशंका की पुष्टि नहीं हुई है. मृतक की पहचान विनोद कुमार के रूप में हुई है. घटना के कारणों का पता जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा.
वाराणसी के इस गांव में एक महीने में चार मौतों से दहशत, तेज बुखार एवं जोड़ों में दर्द से परेशान लोग
वाराणसी के इस गांव में एक महीने में चार मौतों से दहशत, तेज बुखार एवं जोड़ों में दर्द से परेशान लोग
वाराणसी : काशी विद्यापीठ ब्लॉक के मंगलपुर गांव में लोग तेज बुखार, जोड़ों में दर्द और प्लेटलेटस गिरने से परेशान हैं. एक महीने में गांव के 4 लोगों की मौत होने के बाद ग्रामीणों को डेंगू, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी का भय सता रहा है. सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची. लोगों की जांच हुई तो 10 लोगों में बुखार जैसे लक्षण मिले हैं. जिन लोगों की मौत हुई है, उसके पीछे परिजन डेंगू से मौत की बात कह रहे हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग ने इन्कार किया है.जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार, टीम भेजकर जांच करने के साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. मंगलपुर गांव में अधिकांश लोगों को बुखार है. प्लेटलेटस भी कम होता जा रहा है. जमालूद्दीन (35), गुलाम रब्बानी (66), आयशा बेगम (52) और मद्दर बेगम (48) की मौत हुई है. परिजनों ने मौत की वजह डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियां बताई है. उनका कहना है कि जोड़ों में तेज दर्द, बुखार के साथ ही कई दिनों से प्लेटलेटस भी कम हो रहा था. नुरैन, तौफीक, सलाउद्दीन , जरदार, रामसुंदर पटेल बीमार हैं.परिजनों ने एएनएम को नहीं दी कोई जांच रिपोर्टजिला मलेरिया अधिकारी एससी पांडेय का कहना है कि मंगलपुर गांव में कुछ लोगों के एक महीने के भीतर 4 मौत की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच कराई. 10 लोगों में बुखार और मौसमी बीमारी के लक्षण मिले हैं. जरूरी दवाइयां देने के साथ ही उन्हें जागरूक किया जा रहा है. जिन लोगों के मौत की सूचना मिली, उनके घर आशा, एएनएम को भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी गई तो परिजनों ने रिपोर्ट देने से मना कर दिया. डेंगू से मौत हुई है तो परिजन रिपोर्ट क्यों नहीं दे रहे हैं. यह समझ नहीं आ रहा है. एक बार फिर विभागीय टीम गांव में जाएगी.ALSO READ : वाराणसी में पीएम के दौरे को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, देखें पूरी लिस्टमंगलपुर गांव में टीम भेजकर जांच करवाई गई. परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को कोई रिपोर्ट नहीं दी है, जिससे लोगों के बीमार होने और मौत की वजह की सही जानकारी मिल सके. दो दिन का विशेष अभियान चलाकर लोगों के सेहत की जांच कराई जाएगी।.- डॉ. एनपी सिंह, सीएमओ