गणतंत्र दिवस की परेड में दिखा भारत की झलक, परंपरा और विरासत ने मोह लिया मन

देशभर में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. 26 जनवरी 1950 के दिन देश का संविधान लागू किया गया था. इसी के साथ भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ था. 1950 में संविधान के लागू होने से ही भारत में इस दिन को मनाने की एक प्रथा बनी. देश की राजधानी दिल्ली में हर साल राजपथ (अब कर्तव्यपथ) पर परेड निकाली जाएगी, भारत के गणराज्य बनने से अब तक यह प्रथा हर साल देश के लोगों को गौरवान्वित करती है.

कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के जवानों की धमक, लड़ाकू विमानों की आसमान में गर्जना दुनिया को भारत की ताकत का संदेश देती है. परेड में शामिल राज्यों की झांकी देश की अनूठी कला, परंपरा और विरासत की झलक दिखाती हैं.

गणतंत्र दिवस पर दिखी भारत की परंपरा
गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी विशेष अतिथि को बुलाना भी भारत की परंपरा है. इस विशेष बात को एक परंपरा के तौर पर साल 1950 से ही निभाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर इस साल यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल हो रहे हैं. गणतंत्र दिवस पर बुलाए जाने वाले विशेष अतिथि की सीट राष्ट्रपति की सीट के ठीक बराबर में लगाई जाती है. 26 जनवरी पर इस परेड को देखने के लिए भारी संख्या में लोग कर्तव्य पथ पर पहुंचते हैं.

कौन करता है मुख्य अतिथि का चुनाव
गणतंत्र दिवस 2026 के लिए मुख्य अतिथि का चुनाव की प्रक्रिया विदेश मंत्रालय से होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय में संभावित अतिथियों की एक लिस्ट तैयार की जाती है. लिस्ट में जिन अतिथियों के नाम शामिल किए जाते हैं, उनकी उपलब्धता के बारे में भी पता लगाना रक्षा मंत्रालय का काम होता है. रक्षा मंत्रालय के लिस्ट बनाने के बाद मुख्य अतिथि के चुनाव का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय में लिया जाता है. इसके लिए चुने गए देशों से संपर्क भी किया जाता है, इस प्रक्रिया को पूरा करने में काफी समय लगता है.

जाने कैसे तय होता है मुख्य अतिथि
भारत में हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख नेता आते हैं. इन राष्ट्राध्यक्षों का चुनाव भारत के वैश्विक संबंधों को ध्यान में रखकर किया जाता है. गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल यूरोपीय संघ का प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है. 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाली बैठक के बाद व्यापारिक संबंधों से जुड़े कई बड़े एलान किए जा सकते हैं.

भारत में जब 1950 में इस परंपरा शुरुआत हुई थी, तब पहली बार इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए थे. भारत उस दौरान नए स्वतंत्र हुए देशों के साथ बेहकर रिश्ते बनाने पर जोर दे रहा था.



