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काशी की गंगा लहरों पर गूंज रही कजरी की मिठास, पद्मश्री मालिनी अवस्थी क्रूज पर दे रहीं संगीत की अनूठी पाठशाला

काशी की गंगा लहरों पर गूंज रही कजरी की मिठास, पद्मश्री मालिनी अवस्थी क्रूज पर दे रहीं संगीत की अनूठी पाठशाला
Jul 28, 2026, 03:54 PM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : सावन की रिमझिम फुहारों, गंगा की लहरों और काशी की आध्यात्मिक आभा के बीच इन दिनों लोकसंगीत की अमूल्य धरोहर कजरी की मधुर स्वर लहरियां गूंज रही हैं। पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी गंगा के बीच क्रूज (बजरा) पर देश-विदेश से आए विद्यार्थियों को कजरी गायन का प्रशिक्षण दे रही हैं। यह अनूठी संगीत कार्यशाला केवल गायन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और प्रकृति से जुड़ने का भी अद्भुत अवसर बन गई है।


छह वर्षों से सावन में आयोजित हो रही कार्यशाला


पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ की कृपा और आशीर्वाद से पिछले छह वर्षों से प्रत्येक वर्ष आषाढ़ और सावन के महीने में कजरी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ना और कजरी की विरासत को आगे बढ़ाना है।


उन्होंने बताया कि शुरुआती तीन कार्यशालाएं मिर्जापुर में आयोजित की गई थीं, क्योंकि कजरी का उद्गम स्थल मिर्जापुर को माना जाता है। इसके बाद चुनार, चंदौली और राजदरी जैसे प्राकृतिक स्थलों पर भी कार्यशालाएं आयोजित हुईं। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी को चुना गया, ताकि गंगा और बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी में विद्यार्थियों को प्रकृति के सान्निध्य में संगीत का प्रशिक्षण दिया जा सके।


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प्रकृति के बीच सीख रहे हैं संगीत


मालिनी अवस्थी का कहना है कि कजरी केवल सुरों का संगीत नहीं, बल्कि प्रकृति की अनुभूति है। उनका मानना है कि जब तक विद्यार्थी वर्षा की बूंदों, पत्तों की सरसराहट, बादलों की गर्जना और प्रकृति की ध्वनियों को महसूस नहीं करेंगे, तब तक वे कजरी के भावों को सही मायने में अभिव्यक्त नहीं कर पाएंगे।


इसी उद्देश्य से दो दिन राजदरी और तीन दिन गंगा के बीच क्रूज पर कार्यशाला आयोजित की गई है। सभी विद्यार्थी एक साथ इसी बजरे पर रहते हैं, भोजन करते हैं, अभ्यास करते हैं और दिनभर संगीत साधना में लीन रहते हैं।


देश-विदेश से पहुंचे 56 प्रतिभागी


इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी प्रतिभागी पहुंचे हैं। कुल 56 विद्यार्थी इस बार प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें सिंगापुर के साथ-साथ भागलपुर, हैदराबाद, उदयपुर, अहमदाबाद, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, आगरा, गोरखपुर, सिवान सहित देश के कई शहरों से संगीत प्रेमी शामिल हुए हैं।


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प्रतिभागियों की आयु भी इस कार्यशाला की विशेषता है। सबसे छोटी छात्रा 18 वर्ष की है, जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ प्रतिभागी भी पूरे उत्साह के साथ कजरी सीख रहे हैं। 60 से 75 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं भी पूरे समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।


युवाओं में लोकसंगीत के प्रति बढ़ा समर्पण


मालिनी अवस्थी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को लेकर कई तरह की धारणाएं बनाई जाती हैं, लेकिन इस कार्यशाला में शामिल अधिकांश छात्र-छात्राओं की उम्र 21 से 26 वर्ष के बीच है और उनमें लोकसंगीत सीखने का अद्भुत समर्पण, अनुशासन और विनम्रता देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह देखकर विश्वास और मजबूत होता है कि भारतीय लोक परंपराओं का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।


गुरु पूर्णिमा पर होगा समापन


पांच दिवसीय इस कार्यशाला का समापन गुरु पूर्णिमा के अवसर पर होगा। सुबह 10 बजे सभी विद्यार्थी मंच पर अपनी सीखी हुई कजरियों की प्रस्तुति देंगे। मालिनी अवस्थी ने संगीत प्रेमियों को इस विशेष आयोजन में शामिल होने का आमंत्रण देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा से सुंदर अवसर कोई नहीं हो सकता, जब गुरु अपने शिष्यों को ज्ञान देकर अपने गुरुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करे।


केवल संगीत नहीं, जीवन जीने की कला भी


इस कार्यशाला की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल गायन का अभ्यास नहीं कराया जाता। विद्यार्थियों को योग, ध्यान और एकाग्रता का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। मालिनी अवस्थी बताती हैं कि अच्छा गायक बनने के लिए केवल स्वर नहीं, बल्कि मन की स्थिरता और आत्मिक संतुलन भी जरूरी है।


वह बताती हैं कि पांच दिनों तक प्रत्येक विद्यार्थी के साथ व्यक्तिगत संवाद भी किया जाता है। कई युवा अपने करियर, संगीत साधना और जीवन से जुड़ी दुविधाएं साझा करते हैं। देर रात तक चलने वाली इन बैठकों में उन्हें मार्गदर्शन दिया जाता है। मालिनी अवस्थी कहती हैं कि यह अनुभव उन्हें अपने गुरुजनों के साथ बिताए दिनों की याद दिलाता है।


वर्षा में भीगकर गाने का अलग ही आनंद


उन्होंने एक रोचक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यशाला के दौरान जब सभी विद्यार्थी गंगा किनारे कजरी का अभ्यास कर रहे थे, तभी अचानक बारिश शुरू हो गई। लेकिन कोई भी भीतर जाने को तैयार नहीं हुआ। सभी बारिश में भीगते हुए गाते रहे।


मालिनी अवस्थी ने मुस्कुराते हुए कहा कि "कजरी गायन में न छाते की जरूरत होती है और न रेनकोट की। भीगकर गाने का जो आनंद है, वही इस लोकसंगीत की आत्मा है।"


उनका कहना है कि वर्षा केवल मौसम नहीं, बल्कि जेठ की तपती धरती को मिला इंद्रदेव का आशीर्वाद है। इसी आनंद और प्रकृति के उत्सव को कजरी के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है।


कजरी की समृद्ध परंपरा


मालिनी अवस्थी ने कहा कि कजरी विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसकी सबसे मजबूत जड़ें पूर्वांचल की धरती में हैं। काशी, मिर्जापुर, चुनार और चंदौली में आज भी कजरी के अखाड़े मौजूद हैं, जहां गुरु-शिष्य परंपरा के तहत इस विधा का संरक्षण किया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रेमधन व्यास और अंबिकादत्त व्यास जैसे साहित्यकारों ने कजरी को समृद्ध किया। वहीं हीरालाल यादव, गुल्लू यादव, पंडित राम कैलाश यादव, उर्मिला श्रीवास्तव, सिद्धेश्वरी देवी और गिरिजा देवी जैसी महान विभूतियों ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।


उनके अनुसार बनारस घराने का शायद ही कोई शास्त्रीय गायक हो, जिसने कजरी न गाई हो। कजरी की अधिकांश धुनें राग देश, सारंग, सोरठ और मेघ जैसे वर्षा ऋतु के रागों पर आधारित हैं। यही कारण है कि इन्हें सुनते ही मानो आकाश में काले बादल उमड़ आते हैं और बरसात का वातावरण जीवंत हो उठता है।


पहला कजरी गीत आज भी याद


अपने जीवन की पहली कजरी का जिक्र करते हुए मालिनी अवस्थी ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले यह कजरी गाई थी—


"बरसे सावनवा के बैरी बदरवा, कजरवा धुल-धुल जाए मोर राम..."


इसके बाद उन्होंने अवधी शैली की प्रसिद्ध कजरी—


"अरे रामा, कृष्ण बने मनिहारन..."


सीखी और गाई।


लोक परंपरा के संरक्षण का अनूठा प्रयास


गंगा की गोद में, सावन की फुहारों के बीच आयोजित यह कजरी कार्यशाला केवल संगीत सीखने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति, प्रकृति, आध्यात्मिकता और गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने का एक अनूठा प्रयास है। इसमें शामिल विद्यार्थी केवल बेहतर गायक बनकर नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ लेकर लौट रहे हैं।

आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडी
आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडी
वाराणसी: आठ महीने पहले तक कुछ फीट चौडी दालमंडी की गली से आसमान नजर नहीं आता था। अब यह 17.5 मीटर चौड़ी हो गई है। आज भूमि पूजन के साथ इसके रोड बनने की शुरुआत भी हो गई। लेकिन यह बदलाव यूं ही नहीं हो गया। इस गली में बसे सैकड़ों लोगों के मकान दुकान टूटे, इस दर्द में उनके आंसु बहे। समय समय पर उनका आक्रोश भी झलका अरसे तक जिंदगी खाना बदोश भी रही।कभी तंग गलियों, भीड़ और दुकानों से गुलजार रहने वाली वाराणसी की दालमंडी अब एक नए रूप में नजर आएगी. लंबे समय से चल रहे चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद रविवार को यहां मॉडल सड़क के निर्माण की शुरुआत हो गई. चौक थाने के पास भूमि पूजन के साथ पीडब्ल्यूडी ने सड़क निर्माण का काम शुरू किया.भूमि पूजन विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने किया. करीब 650 मीटर लंबी दालमंडी की सड़क को 17.5 मीटर यानी करीब 60 फीट चौड़ा किया जाएगा. पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक करीब तीन महीने में सड़क का निर्माण पूरा कर इसे जनता को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है.वर्षों पुरानी तस्वीर अब बदलने की तैयारीदालमंडी सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि काशी की पुरानी पहचान का हिस्सा रही है. यहां की गलियों में वर्षों से कारोबार करने वाले दुकानदारों और रहने वाले परिवारों की यादें जुड़ी हैं. चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान कई घर और दुकानें टूट गईं. कहीं लोगों ने अपनी आंखों के सामने पुश्तैनी मकानों को गिरते देखा तो कहीं दुकानों के टूटने के साथ वर्षों पुराना कारोबार भी खत्म हुआ.प्रशासन के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए 181 मकानों में से करीब 150 मकानों को गिराया जा चुका है. बाकी मकानों पर भी कार्रवाई चल रही है. इसके अलावा 6 मस्जिदों के वे हिस्से भी हटाए गए जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे थे.अब इन्हीं टूटे हुए हिस्सों के बीच से एक नई सड़क का निर्माण शुरू हो रहा है. यानी जिस जगह कुछ समय पहले तक मलबा और टूटे मकान दिखाई दे रहे थे वहां आने वाले दिनों में एक चौड़ी और व्यवस्थित सड़क नजर आएगी.also read: कांवड़ मार्ग पर पुलिस कमिश्नर का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती.109 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजाचौड़ीकरण की कार्रवाई के तहत प्रभावित मकानों और धार्मिक स्थलों के लिए मुआवजे का प्रावधान किया गया. पीडब्ल्यूडी की ओर से अब तक 109 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है. परियोजना के लिए कुल 215.88 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया है.अधिकारियों ने प्रत्येक मकान की नापी निर्माण और सड़क की जद का आकलन करने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की. रजिस्ट्री के बाद धीरे-धीरे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ी.जुलाई 2025 से शुरू हुई थी प्रक्रियादालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को जुलाई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी. इसके बाद 23 जुलाई से मकानों की नापी शुरू हुई. नापी के बाद मकानों का मूल्यांकन और मुआवजा तय किया गया. अंतिम नापी के बाद संबंधित मकानों पर लाल निशान लगाए गए और फिर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हुई.स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए चौक थाने में पीडब्ल्यूडी का कैंप कार्यालय भी बनाया गया, जहां लोगों को दस्तावेज और रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी दी गई.29 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था ध्वस्तीकरणदालमंडी में ध्वस्तीकरण की पहली कार्रवाई 29 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी. शुरुआत में हथौड़े से मकान और दुकानें तोड़ी गईं. बाद में जनवरी 2026 में बुलडोजर की मदद से कार्रवाई तेज की गई.9 फरवरी को जर्जर बताए गए मकानों और दुकानों पर भी कार्रवाई हुई. उस दौरान विरोध के बीच एक व्यापारी ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की चेतावनी तक दे दी थी और अपनी दुकान में आग लगा दी थी. इस घटना ने चौड़ीकरण के दौरान लोगों की भावनाओं और उनके वर्षों पुराने आशियाने-कारोबार से जुड़े दर्द को सामने ला दिया था.पोकलैंड आने के बाद तेज हुई कार्रवाई8 जून 2026 को दालमंडी में पोकलैंड मशीन पहुंची. अगले दिन से मशीनों के जरिए ध्वस्तीकरण तेज कर दिया गया. जिन मकानों को हाथ से तोड़ने में मुश्किल हो रही थी, उन्हें मशीनों की मदद से जमींदोज किया गया.इसके बाद मस्जिदों के चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्सों को भी संबंधित कमेटियों की सहमति से हटाया गया. जुलाई में खुदा बक्श उर्फ लंगड़े हाफिज मस्जिद के जद में आने वाले हिस्से को भी हटाने का काम शुरू हुआ. यहां मस्जिद से जुड़ी करीब 24 दुकानें भी हटाई गईं.अब मलबे की जगह दिखेगी नई सड़कध्वस्तीकरण के बाद अब दालमंडी से मलबा हटाने का काम चल रहा है. भूमि पूजन के साथ सड़क निर्माण की शुरुआत हो गई है. नई सड़क के दोनों तरफ पटरी बनाई जाएगी. सड़क के नीचे बिजली, पानी और सीवर की व्यवस्था करने की योजना है. इससे वर्षों से दिखाई देने वाला तारों का जंजाल भी हटाया जाएगा.नई सड़क नई व्यवस्था की शुरुआत जरूर है, लेकिन इसके साथ दालमंडी के लोगों की पुरानी यादें भी जुड़ी हैं. जिन घरों में पीढ़ियां बीतीं, जिन दुकानों से परिवारों की रोजी-रोटी चली और जिन गलियों में लोगों ने अपना पूरा जीवन देखा, अब वहां एक नई तस्वीर बनने जा रही है.प्रशासन इसे काशी की आधुनिक और व्यवस्थित सड़क के रूप में देख रहा है, जबकि स्थानीय लोगों के लिए यह बदलाव उनकी पुरानी पहचान और नई उम्मीदों के बीच का सफर है.अब देखना होगा कि अगले तीन महीनों में दालमंडी की यह पुरानी तस्वीर किस तरह एक नई और आधुनिक सड़क में बदलती है.
कांवड़ मार्ग पर पुलिस कमिश्नर का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती.
कांवड़ मार्ग पर पुलिस कमिश्नर का औचक निरीक्षण, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती.
वाराणसी: श्रावण मास में कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था बनाए रखने को लेकर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट पूरी तरह अलर्ट है. इसी क्रम में पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल ने शनिवार को मंडुवाडीह से गोदौलिया तक शहरी कांवड़ मार्ग का आकस्मिक स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों का जायजा लिया.पुलिस आयुक्त ने कांवड़ मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर रुककर व्यवस्थाओं को देखा और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली. उन्होंने यह भी देखा कि कांवड़ यात्रियों के आवागमन के दौरान किसी तरह की बाधा तो नहीं आ रही है. निरीक्षण के दौरान उन्होंने मार्ग में बनाए गए विश्राम स्थलों का भी जायजा लिया और वहां मौजूद कांवड़ यात्रियों से सीधे संवाद कर सुविधाओं की जानकारी ली.कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ मार्ग पर यातायात व्यवस्था को हर हाल में सुचारु रखा जाए. मार्ग पर किसी भी तरह का अतिक्रमण और अवैध पार्किंग कांवड़ यात्रियों के आवागमन में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सड़क और कांवड़ मार्ग से अतिक्रमण को तत्काल हटाने तथा अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए.उन्होंने कहा कि श्रावण मास के दौरान कांवड़ मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए. पुलिसकर्मी लगातार मार्ग पर मौजूद रहकर यातायात का संचालन करें और भीड़ बढ़ने की स्थिति में तत्काल प्रभावी कदम उठाएं.पुलिस आयुक्त ने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार पैदल गश्त करने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह स्वयं भी क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करें और किसी भी तरह की समस्या सामने आने पर तत्काल उसका समाधान कराएं.निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. मार्ग में संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए.also read:छात्राओं पर अश्लील इशारे और फब्तियां कसने वाला युवक गिरफ्तार...पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण मास को देखते हुए कांवड़ मार्ग पर लगातार निगरानी की जा रही है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कांवड़ यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो और यात्रा के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रहे.
छात्राओं पर अश्लील इशारे और फब्तियां कसने वाला युवक गिरफ्तार...
छात्राओं पर अश्लील इशारे और फब्तियां कसने वाला युवक गिरफ्तार...
वाराणसी: मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में महिलाओं और छात्राओं पर अश्लील इशारे करने और फब्तियां कसकर परेशान करने के आरोप में मिशन शक्ति/एंटी रोमियो टीम ने एक युवक को गिरफ्तार किया है.पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है.पुलिस के अनुसार मिशन शक्ति/एंटी रोमियो टीम क्षेत्र में भ्रमण और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मोहली बीर बाबा मंदिर के पास एक युवक आने-जाने वाली महिलाओं और छात्राओं पर अशोभनीय इशारे कर रहा है और अभद्र टिप्पणियां कर उन्हें परेशान कर रहा है.सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में ले लिया पूछताछ में उसकी पहचान अभिषेक कुमार (20), पुत्र पारसनाथ बिंद, निवासी ग्राम डौमेला, थाना मिर्जामुरादपुलिस ने मामले में मु0अ0सं0 0230/2026, धारा 296 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर मिशन शक्ति/एंटी रोमियो टीम की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है.कार्रवाई करने वाली टीम में मिशन शक्ति प्रभारी म0उ0नि0 अनुजा गोस्वामी, रिक्रूट महिला कांस्टेबल पूनम और रिक्रूट कांस्टेबल विवेक कुमार सिंह शामिल रहे.