Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

समान शिक्षा की मांग के साथ शुरू हुई तीन दिवसीय पदयात्रा, ग्रामीणों ने किया स्‍वागत...

समान शिक्षा की मांग के साथ शुरू हुई तीन दिवसीय पदयात्रा, ग्रामीणों ने किया स्‍वागत...
Jul 13, 2026, 11:16 AM
|
Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : समान शिक्षा की मांग के साथ आज बनारस में तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू हुई. समाजसेवी मैगसेसे सम्मान से सम्मानित डॉ संदीप पांडे की अगुवाई में मुंशी प्रेमचंद के जन्मस्थली लमही में जनसभा से यात्रा का आरंभ हुआ. यात्रा के प्रमुख पड़ावों की जानकारी देते हुए आयोजन से जुड़े नंदलाल मास्टर ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद के गाँव लमही से जनकवि सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' के गाँव खेवली तक यात्रा जाएगी. वहाँ से लोकबंधु राजनारायण के गाँव गंजारी से होते हुए बीएचयू सिंह द्वार पर यात्रा का समापन होगा.


लमही गांव में यात्रा का स्वागत ग्रामीणों ने किया. प्रेमचंद जी की जन्मस्थली में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि देश में जाति, धर्म, लिंग, वर्ग आदि के आधार पर अनेक प्रकार की गैर-बराबरियाँ मौजूद हैं. संविधान का अनुच्छेद 15 स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा. किंतु वास्तविकता यह है कि हम आज भी एक समानतामूलक समाज के निर्माण से बहुत दूर हैं. आज चहुंओर जाति धर्म भाषा क्षेत्र अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव और हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं, जिनमें अनेक अवसरों पर स्वयं राज्य की नीतियाँ और कार्यप्रणाली भी जिम्मेदार दिखाई देती हैं.


EEE


मुंशी प्रेमचंद ने अपने साहित्य और जीवन-दर्शन में बार-बार यह स्थापित किया कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, नैतिक चेतना और मानवीय समानता की आधारशिला है. उनकी रचनाओं में गाँव, किसान, मजदूर, स्त्री और वंचित समाज की पीड़ा के साथ शिक्षा के लोकतांत्रिक महत्व को गहराई से रेखांकित किया गया है. महात्मा गांधी की बुनियादी तालीम (नई तालीम) भी इसी विचार पर आधारित थी कि शिक्षा मातृभाषा, श्रम, स्थानीय ज्ञान, नैतिक मूल्यों और समाज से जुड़ाव के आधार पर सबके लिए समान रूप से उपलब्ध हो. आज जब शिक्षा तेजी से बाज़ार के हवाले होती जा रही है, तब प्रेमचंद और गांधी दोनों की शिक्षा-दृष्टि हमें याद दिलाती है कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था ही लोकतंत्र को मजबूत कर सकती है, जिसमें अमीर और गरीब, शहर और गाँव, सभी बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो.


इस पदयात्रा के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्ष 2015 के उस निर्णय को लागू करने की मांग उठाई गई, जिसमें न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने सुझाव दिया था कि सरकारी वेतन पाने वाले कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी विद्यालयों में सुनिश्चित की जाए. यदि ऐसा हो सके, तभी सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार होगा, गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और वे अपने परिवार की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ सकेंगे.

वक्‍ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे काकरोच जनता पार्टी के धरने के प्रति अपना समर्थन दिया तथा शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और जवाबदेही के प्रश्न पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.


ALSO READ : ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों को मध्यस्थता करने को बोला...


आज की यात्रा लमही से शुरू होकर बड़ालाल पुर, नातिनियादाई, नवलपुर, तरना से होते हुए खेवली गांव पंहुची वहां पर सुदामा पांडेय धूमिल जी कि प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नुक्कड़ सभा किया गया. मौके पर सुनील सिंह एवं समाज सेवी मनीष पटेल ने लोगों का स्वागत किया, उसके पश्चात पदयात्रा रात्रि विश्राम हेतु कोरौती पहुंची. आज की यात्रा में प्रमुख रूप से संदीप पांडेय, नन्दलाल मास्टर, फादर आनंद, फादर प्रवीण, रामजनम यादव, अजित गौरव, आज़ाद गौतम, प्रमोद, रंजीत, गणेश, विजय, हीरा यादव, अवदेश यादव, अनिल मौर्या, मधुबाला, मनीषा, सीमा, अनीता, आशा राय, नेहा, काजल, ज्योति. सरोज आदि लोग शामिल रहे.

नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।