समान शिक्षा की मांग के साथ शुरू हुई तीन दिवसीय पदयात्रा, ग्रामीणों ने किया स्वागत...

वाराणसी : समान शिक्षा की मांग के साथ आज बनारस में तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू हुई. समाजसेवी मैगसेसे सम्मान से सम्मानित डॉ संदीप पांडे की अगुवाई में मुंशी प्रेमचंद के जन्मस्थली लमही में जनसभा से यात्रा का आरंभ हुआ. यात्रा के प्रमुख पड़ावों की जानकारी देते हुए आयोजन से जुड़े नंदलाल मास्टर ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद के गाँव लमही से जनकवि सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' के गाँव खेवली तक यात्रा जाएगी. वहाँ से लोकबंधु राजनारायण के गाँव गंजारी से होते हुए बीएचयू सिंह द्वार पर यात्रा का समापन होगा.
लमही गांव में यात्रा का स्वागत ग्रामीणों ने किया. प्रेमचंद जी की जन्मस्थली में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि देश में जाति, धर्म, लिंग, वर्ग आदि के आधार पर अनेक प्रकार की गैर-बराबरियाँ मौजूद हैं. संविधान का अनुच्छेद 15 स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा. किंतु वास्तविकता यह है कि हम आज भी एक समानतामूलक समाज के निर्माण से बहुत दूर हैं. आज चहुंओर जाति धर्म भाषा क्षेत्र अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव और हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं, जिनमें अनेक अवसरों पर स्वयं राज्य की नीतियाँ और कार्यप्रणाली भी जिम्मेदार दिखाई देती हैं.

मुंशी प्रेमचंद ने अपने साहित्य और जीवन-दर्शन में बार-बार यह स्थापित किया कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, नैतिक चेतना और मानवीय समानता की आधारशिला है. उनकी रचनाओं में गाँव, किसान, मजदूर, स्त्री और वंचित समाज की पीड़ा के साथ शिक्षा के लोकतांत्रिक महत्व को गहराई से रेखांकित किया गया है. महात्मा गांधी की बुनियादी तालीम (नई तालीम) भी इसी विचार पर आधारित थी कि शिक्षा मातृभाषा, श्रम, स्थानीय ज्ञान, नैतिक मूल्यों और समाज से जुड़ाव के आधार पर सबके लिए समान रूप से उपलब्ध हो. आज जब शिक्षा तेजी से बाज़ार के हवाले होती जा रही है, तब प्रेमचंद और गांधी दोनों की शिक्षा-दृष्टि हमें याद दिलाती है कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था ही लोकतंत्र को मजबूत कर सकती है, जिसमें अमीर और गरीब, शहर और गाँव, सभी बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो.
इस पदयात्रा के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्ष 2015 के उस निर्णय को लागू करने की मांग उठाई गई, जिसमें न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने सुझाव दिया था कि सरकारी वेतन पाने वाले कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी विद्यालयों में सुनिश्चित की जाए. यदि ऐसा हो सके, तभी सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार होगा, गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और वे अपने परिवार की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ सकेंगे.
वक्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे काकरोच जनता पार्टी के धरने के प्रति अपना समर्थन दिया तथा शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और जवाबदेही के प्रश्न पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.
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आज की यात्रा लमही से शुरू होकर बड़ालाल पुर, नातिनियादाई, नवलपुर, तरना से होते हुए खेवली गांव पंहुची वहां पर सुदामा पांडेय धूमिल जी कि प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नुक्कड़ सभा किया गया. मौके पर सुनील सिंह एवं समाज सेवी मनीष पटेल ने लोगों का स्वागत किया, उसके पश्चात पदयात्रा रात्रि विश्राम हेतु कोरौती पहुंची. आज की यात्रा में प्रमुख रूप से संदीप पांडेय, नन्दलाल मास्टर, फादर आनंद, फादर प्रवीण, रामजनम यादव, अजित गौरव, आज़ाद गौतम, प्रमोद, रंजीत, गणेश, विजय, हीरा यादव, अवदेश यादव, अनिल मौर्या, मधुबाला, मनीषा, सीमा, अनीता, आशा राय, नेहा, काजल, ज्योति. सरोज आदि लोग शामिल रहे.



