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वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के अनुप्रयोग पर बीएचयू में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के अनुप्रयोग पर बीएचयू में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू
Sep 02, 2026, 03:10 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कला संकाय के शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से ‘वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई का अनुप्रयोग’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एएआईएसआर-2026 मंगलवार से शुरू हुई। 1 से 3 सितंबर तक आयोजित यह कार्यशाला हाइब्रिड माध्यम से हो रही है, जिसमें विभिन्न विषयों के शिक्षक, शोधकर्ता, विद्यार्थी और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।


शारीरिक शिक्षा विभाग के करण सिंह हॉल में आयोजित उद्घाटन सत्र में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल कुछ विशेष क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, कंप्यूटर विजन और वर्गीकरण जैसी तकनीकों के माध्यम से एआई वैज्ञानिक अनुसंधान को नई गति दे रहा है।


उन्होंने कहा कि एआई की मदद से ऐसे शोध कार्य, जिन्हें पूरा करने में पहले करीब एक वर्ष लग जाता था, उन्हें अब एक माह या 15 दिनों में पूरा करना संभव हो सकता है। इससे शोधकर्ताओं को समय बचाने के साथ अधिक गहन और महत्वपूर्ण शोध प्रश्नों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।


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कुलपति ने शिक्षकों की भूमिका में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का काम केवल विद्यार्थियों को एआई या सर्च इंजन के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें विषय की गहरी समझ और व्यापक ज्ञान भी देना चाहिए। तकनीकी बदलावों के अनुरूप शिक्षण और मूल्यांकन की पद्धतियों में भी बदलाव जरूरी है।


उन्होंने कहा कि एआई के इस्तेमाल के लिए अत्याधुनिक संसाधनों की अनिवार्यता नहीं है। कई मुक्त और कम लागत वाले एआई टूल उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग शोधकर्ता अपने काम में कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला के सभी सत्रों में सक्रिय भागीदारी और विशेषज्ञों के साथ संवाद करने की अपील की।


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विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय कुमार सिंह, कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी-बीएचयू ने एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए विकसित किए जा रहे संसाधनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समर्पित प्रयोगशालाओं और लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन सामग्री, प्रायोगिक सत्र, जिज्ञासा समाधान और परियोजना मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


उन्होंने अंतर्विषयक अध्ययन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि खनन, धातुकर्म, औषधि विज्ञान समेत अलग-अलग विषयों के विद्यार्थी अपने क्षेत्र के आंकड़ों का इस्तेमाल कर वास्तविक समस्याओं के लिए एआई आधारित समाधान विकसित कर सकते हैं। तेजी से बदलती तकनीक के दौर में निरंतर सीखने और व्यावहारिक कौशल विकसित करने को उन्होंने जरूरी बताया।


कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने समकालीन विषय पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए शारीरिक शिक्षा विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है और शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के क्षेत्र को भी तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को विकसित करना होगा।


विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ ले रहे हिस्सा


शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विक्रम सिंह ने बताया कि कार्यशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और सनबीम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस समेत विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को वैज्ञानिक अनुसंधान और शारीरिक शिक्षा में एआई के उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देंगे।


कार्यशाला में प्रो. श्रीराम पाण्डेय, डॉ. शाश्वत प्रियम खरे, डॉ. बृज किशोर और श्री संदीप मुखर्जी समेत अन्य विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। कंप्यूटर विज्ञान, सूचना विज्ञान, शारीरिक शिक्षा और उच्च शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई आधारित दृष्टिकोणों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य है।


कार्यक्रम के दौरान ‘हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. बीसी कपरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला के आगामी सत्रों में एआई के विभिन्न अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, परिचर्चा और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे।

वाराणसी में 11 वर्षीय बालिका से छेड़छाड़ का आरोप, सेना के कर्मचारी पर केस,मासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ मुकदमा ...
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वाराणसीःमासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में कैंट थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी.परिजनों ने पुलिस को बताया कि 11 साल की बच्ची दूध लेने के लिए घर से बाहर गई थी. इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले सेना के हवालदार ने उसे अपने कमरे में बुलाया. कमरे के अंदर उसने बच्ची के साथ गलत हरकत शुरू कर दिया. घटना के बाद बच्ची वहां से अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी बात बताई. बच्ची की बात सुनकर परिवार के लोग परेशान हो गए.उन्होंने मामले की जानकारी कैंट थाना पुलिस को दी और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया. पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. बच्ची और उसके परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है.ALSO READ:ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रसाथ ही पुलिस आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी साक्ष्य जुटा रही है. जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस और परिवार की ओर से बच्ची की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है.आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बनारस में नदी में होगी जलयानों की मरम्मत....
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वाराणसीः इनलैंड वाटरवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने रामनगर में बंदरगाह के उत्तरी छोर पर चार बीघा क्षेत्र में बनने वाले शिप रिपेयरिंग सेन्टर की शुरुआत की है. इसके साथ ही वाराणसी देश का पहला शहर होगा जहां नदी में जलयानों की मरम्मयत की जाएगी.कार्यदायी संस्था लार्सन एन्ड टुब्रो जिओ स्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है. यहां जहाजों को रिपेयर करने के लिए उत्त्तरी छोर पर एक वाटर चैनल बनाया जाएगा जहा जहाज नदी की मुख्य धारा से अंदर चैनल में रिपेयर होने के लिए आएंगे.कार्यदायी संस्था फिलहाल रिपेयर फैसिलिटी के प्लेटफार्म को बनाने का काम कर रही है उनके मुख्य अभियंता रमेश जोशी ने बताया कि प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करना है. बताया कि बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के लिए जल्दी ही काम शुरू करना पड़ा.ALSO READ: ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रइस बाबत उन्होंने बताया कि देश मे किसी भी नदी पर बनने वाला यह पहला शिप रिपेयरिंग सेंटर है. यहां कुछ जहाजों को क्रेन के माध्यम से ड्राई डाक सूखी सतह पर लाकर रिपेयर करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही जहाज में पानी की सतह से ऊपर की खराबी को नदी में ही ठीक कर दिया जाएगा.बताया रि देश मे अभी तक शिप रिपेयरिंग सेन्टर समुद्रों के किनारे ही बनाये जाते है देश मे किसी नदी के ऊपर पहली बार शिप रिपेयरिंग सेन्टर बन रहा है. पहले जहाजों को रिपेयरिंग के लिए कोलकाता जाना होता था जो अब बनारस में भी संभव है.
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।