बीएचयू में निकली तिरंगा रैली, कुलपति ने कहा- तिरंगा राष्ट्रीय पहचान और गौरव का प्रतीक

वाराणसी : हर घर तिरंगा अभियान-2026 के तहत काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में गुरुवार को तिरंगा रैली निकाली गई. राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), बीएचयू के तत्वावधान में आयोजित रैली को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने मालवीय भवन प्रांगण से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. कुलपति स्वयं भी हाथ में तिरंगा लेकर विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के साथ रैली में शामिल हुए.रैली मालवीय भवन से शुरू होकर डीएसडब्ल्यू चौराहा, वाणिज्य संकाय होते हुए एम्फीथिएटर मैदान पहुंचकर संपन्न हुई. इस दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया.
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस किसी संस्था, कार्यालय या घर तक सीमित उत्सव नहीं, बल्कि पूरे देश का राष्ट्रीय पर्व है. उन्होंने कहा कि तिरंगा भारत की राष्ट्रीय पहचान, अस्मिता और गौरव का प्रतीक है. दुनिया के किसी भी कोने में तिरंगा दिखाई देने पर भारतीय होने का भाव जागृत होता है. यह देशवासियों को एक सूत्र में बांधने का काम करता है. उन्होंने कहा कि तिरंगे की शान और देश की स्वतंत्रता के लिए असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, स्वतंत्रता दिवस उनके त्याग और बलिदान को याद कर उनसे प्रेरणा लेने का अवसर भी है.

कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय पर्व से जुड़ी गतिविधियों में युवा पीढ़ी की भागीदारी प्रेरणादायक है. छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि युवा 2047 के विकसित भारत के ध्वजवाहक हैं. आने वाले वर्षों में देश के निर्माण और विकास में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी.एनएसएस बीएचयू की समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने युवाओं से कम से कम दो स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी पढ़ने का आह्वान किया, उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर वर्तमान को बेहतर बनाया जा सकता है, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के महासचिव प्रो. अनुपम नेमा ने युवाओं से जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की.
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तिरंगा रैली के माध्यम से बीएचयू परिसर में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे.



