बीएचयू में पर्यटन विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, पौधरोपण के साथ हुआ व्याख्यान

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित सेंटर फॉर टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्टडीज़ (CTHS) में एम.टी.टी.एम. के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के दीक्षारम्भ कार्यक्रम के तहत पौधरोपण अभियान और आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया. “लेट्स प्लांट टुडे फॉर अ बेटर टुमॉरो” थीम पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संबंधों पर चर्चा हुई.
कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित मुख्य अतिथि एवं वक्ता रहे, बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे.
प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि सेंटर फॉर टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्टडीज़ की स्थापना पर्यटन शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल है, उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर और संबद्ध महाविद्यालयों में संचालित पर्यटन एवं कार्यालय प्रबंधन से जुड़े पाठ्यक्रमों को अब केंद्र के अंतर्गत एकीकृत रूप से संचालित किया जाएगा. उन्होंने नए पाठ्यक्रम विकसित करने और रिक्त पदों पर नियुक्ति के प्रयासों की भी जानकारी दी. वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को देखते हुए उन्होंने धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन में अध्ययन और शोध की संभावनाओं पर जोर दिया.
मुख्य वक्ता प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि भारत प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संसाधनों से समृद्ध देश है. विद्यार्थियों को अपनी विरासत को गहराई से समझने के साथ उसके ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन और प्रभावी इंटरप्रिटेशन करना चाहिए, ताकि भारतीय विरासत को वैश्विक मंच पर बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सके. उन्होंने मास टूरिज्म के साथ क्वालिटी, रिस्पॉन्सिबल और एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई.
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बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने संग्रहालयों, विरासत स्थलों, स्थानीय शिल्प और पर्यटन के बीच संबंधों पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया, उन्होंने कहा कि संग्रहालयों और स्थानीय शिल्पकारों के सहयोग से क्षेत्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है. हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण-संवर्धन तथा उन्हें पर्यटन से जोड़कर स्थानीय शिल्प को व्यापक पहचान दिलाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई.
कार्यक्रम में डॉ. निशांत, उप निदेशक, भारत कला भवन संग्रहालय, डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह, छात्र सलाहकार और डॉ. संजय सिंह समेत शिक्षक एवं शोधार्थी मौजूद रहे. संचालन डॉ. प्रवीण सिंह राणा ने किया, डॉ. अनिल कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया, कार्यक्रम का समन्वय डॉ. प्रवीण सिंह राणा और डॉ. अनिल कुमार सिंह ने किया.



