उद्धव और राज की राहें फिर होंगी जुदा, BMC पार्षद नॉमिनेशन पर छिड़ा विवाद

महाराष्ट्र में मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ आए थे. इस गठबंधन को हुए दो महीने का वक्त भी नहीं बीता कि, इनके बीच हो रहे नोकझोंक अब चर्चा का विषय बन बैठी हैं. इसकी वजह बीएमसी में नॉमिनेटेड पार्षद है जिन्हें लेकर ये दोनों भाई एक-दूजे के सामने आ खड़े हैं. सूत्रों के मुताबिक, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं ने सोशल मीडिया पर कुछ अजीबों-गरीब मैसेज पोस्ट किए हैं. जैसे, "जब दिल में प्यार ही नहीं है तो प्यार क्यों करना?" हालांकि, उद्धव ठाकरे कैंप ने इस सोशल मीडिया पोस्ट को ज्यादा अहमियत नहीं दी है और कहा है कि दोनों भाई एक रहेंगे.

कॉपोरेटर्स का नॉमिनेशन बना झगड़े का मुद्दा
इस गठबंधन के बीच हो रहे झगड़े के केंद्र में कॉपोरेटर्स का नॉमिनेशन है. 227 चुने हुए कॉर्पोरेटर्स के अलावा, 2023 के बदलाव के बाद बीएमसी में अब 10 नॉमिनेटेड कॉर्पोरेटर्स हैं, राजनीतिक दल इन कॉर्पोरेटर्स को सदन में अपनी संख्या के हिसाब से नॉमिनेट करेंगे, हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में 65 सीटें जीतने वाली उद्धव ठाकरे की शिवसेना यानि यूबीटी) 10 में से तीन पार्षदों को नॉमिनेट करने का दम रखती है, लेकिन 89 सीटें जीतने वाली भाजपा 4 पार्षदों को नॉमिनेट कर सकती है.

बाकी बची पार्टियां जैसे कांग्रेस, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एआईएमआईएम बाकी तीन पार्षदों को चुनने की हकदार है. वहीं यूबीटी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली राज ठाकरे की एमएनएस ने तीन में से एक नॉमिनेटेड सीट की मांग की है, ये वहीं एमएनएस है जिसने बीएमसी चुनावों में सिर्फ छह सीटों पर अपना दबदबा कायम रखा था. इस जीत को देखते ही उद्धव ठाकरे ने एमएनएस की मांग को स्वीकार करने के बजाय ठुकरा ही अपनी समझदारी समझी, जिससे गठबंधन में तनाव पैदा हो गया है.

शिंदे से मुलाकात को देख राजनीति में हलचल
इन सभी नोकझोंक के बीच राज ठाकरे की डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ हाल ही में एक मीटिंग बुलाई गई थी, इस बैठक के बाद से अफवाहें और भी तेज हो गई, जहां एमएनएस नेता अविनाश अभ्यंकर ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि, पार्टी ने हाल ही में संगठन के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अपने राज्य के बड़े नेताओं से मुलाकात की.

इम मुलाकात में नॉमिनेटेड कॉर्पोरेटर्स के मुद्दे का जिक्र कर कहा कि, "यह दो भाइयों और दो पार्टियों के बीच का अलायंस है. इसलिए राज ठाकरे ये तय करेंगे कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कोटे में सीट लेनी है या फिर नहीं. हालांकि, इस मसले पर अभी तक कोई भी फाइनल फैसला नहीं हुआ है. देर से सही पर राज ठाकरे और पार्टी के सीनियर लीडर्स इस पर फैसला लेंगे. जिस पर हर किसी की नजरे टिकी हुई है.



