यूपी पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, योगी सरकार के फैसले के बाद तस्वीर साफ

The path for UP Panchayat elections is clear, with the Yogi government's decision making the picture clear.
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कराने का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो चुका है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट आज पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर बड़ा फैसला ले सकती है. जी हां, होने वाली कैबिनेट मीटिंग में नए ओबीसी आयोग को मंजूरी मिलना काफी हद तक तय माना जा रहा है. चुनाव आयोग ही पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करेगा. हालांकि, अब 26 मई तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं लग रहा है. ऐसे में चुनाव बरसात बाद अक्टूबर-नवंबर या फिर मार्च में विधानसभा चुनाव के बाद ही कराया जा सकता है.

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
बता दें, ओबीसी आयोग सभी 75 जिलों में बैठक करने के बाद ही जातिवार और आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा कर आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. इसमें 4-5 महीनों का समय लग सकता है. ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव आरक्षण की जो सिफारिशें आएंगी, उस पर फिर राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी जाएगी, जिनके निस्तारण करने में भी एक महीने का वक्त लग सकता है.

पार्टी संगठनों पर बुरा असर पड़
ऐसे में पंचायत चुनाव हाल फिलहाल होना मुश्किल लग रहा है. क्योकि, मॉनसून में बारिश के दौरान और धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई को देखते हुए भी पंचायत चुनाव होना काफी मुश्किल लग रहा हैं. लेकिन अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव को देखते हुए चार महीने पहले पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए राजनीतिक जोखिम भरा फैसला हो सकता है. पंचायत चुनाव में अक्सर गुटबाजी, वर्चस्व और राजनीतिक टकराव देखा जाता है. दलीय मर्यादाएं तार-तार हो जाती हैं.इसका पार्टी संगठनों पर बुरा असर पड़ सकता है.
ओबीसी आयोग के गठन का आदेश
यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव, क्षेत्र पंचायत चुनाव और जिला पंचायत चुनाव का मामला काफी समय से लटका हुआ है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को ओबीसी आयोग के गठन का आदेश दिया है. हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता ने समय से पंचायत चुनाव कराने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी. याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनाव टालना और ग्राम प्रधान की जगह प्रशासकों को जिम्मेदारी देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है.

बात करें, वर्ष 2021 की तो इस साल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल में चार चरणों में कराए गए थे, दो मई को मतों की गिनती हुई थी।26 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक हुई थी, जबकि जुलाई में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठकें हुई थीं. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक पंचायत चुनाव से पूर्व ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाना जरूरी है, जिसे सोमवार को कैबिनेट से स्वीकृति मिली.
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