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वाराणसी के राजातालाब में महिलाओं ने भरी हुंकार, शराब पर प्रतिबंध की उठाई मांग

वाराणसी के राजातालाब में महिलाओं ने भरी हुंकार, शराब पर प्रतिबंध की उठाई मांग
Mar 10, 2026, 12:38 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और यौन उत्पीड़न के खिलाफ मंगलवार को बडी संख्‍या में महिलाओं ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया. आक्रोशित महिलाओं ने उत्तर प्रदेश में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की जोरदार मांग उठाई. घरेलू कामगार महिला स्वयं सहायता समूह, किशोरी संगठन, लोक समिति, दिहाड़ी मजदूर संगठन और आशा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महिला महापंचायत में आराजी लाइन और सेवापुरी ब्लॉक के करीब 80 गांवों से लगभग तीन हजार महिलाएं शामिल हुईं. महिलाओं ने ढोल-नगाड़ों, तख्तियों और बैनरों के साथ राजातालाब बाजार से तहसील तक जनआक्रोश रैली निकाली.


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प्रदर्शन से बनी जाम की स्थिति


महिलाओं के प्रदर्शन से जीटी रोड पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई. महिलाओं और लड़कियों की हुंकार से पूरा तहसील परिसर गूंज उठा. रैली के दौरान महिलाओं ने “चुप नहीं रहना है, हिंसा नहीं सहना है”, “महिला हिंसा बंद करो”, “छेड़खानी पर रोक लगाओ”, “शराब बेचना बंद करो”, “हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो”, “भीख नहीं अधिकार चाहिए, जीने का सम्मान चाहिए” तथा “भेदभाव मिटाएंगे, नया समाज बनाएंगे” जैसे नारे लगाए.तहसील पहुंचकर महिलाओं ने शराब बिक्री, महिला हिंसा, बाल विवाह और सामाजिक गैरबराबरी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया तथा राष्ट्रपति को संबोधित 13 सूत्रीय ज्ञापन उपजिलाधिकारी शांतुन कुमार सिनसिनवार को सौंपा.


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महिला हिंसा के खिलाफ महिला महा सम्मेलन का आयोजन


रैली के बाद सिंचाई विभाग के डाक बंगले में महिला हिंसा के खिलाफ महिला महा सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन लोक चेतना समिति की निदेशिका रंजू सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता जागृति राही, पूनम सिंह, तनुजा मिश्रा ग्राम प्रधान राजेंद्र पटेल तथा लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने दीप प्रज्वलित कर किया. सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जागृति राही ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग होना होगा और समाज में बराबरी के लिए उनकी राजनीतिक भागीदारी जरूरी है. सामाजिक कार्यकर्ता तनुजा मिश्रा ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों को अपने अधिकारों और विभिन्न कानूनों की जानकारी होना आवश्यक है. लोक चेतना समिति की निदेशिका रंजू सिंह ने कहा कि आज हर गांव और शहर में महिलाओं और लड़कियों के साथ हिंसा, छेड़खानी और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं. सरकार को ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए संगठित होकर आगे आना होगा.


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महिला संगठन की संयोजिका अनीता पटेल ने कहा कि गांवों में शराब की बढ़ती लत का खामियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है. घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और मारपीट जैसी घटनाओं के पीछे शराब एक बड़ी वजह है, इसलिए प्रदेश में शराबबंदी लागू की जानी चाहिए. कार्यक्रम में मुख्य रूप से ग्राम प्रधान अध्यक्ष मुकेश कुमार, ग्राम प्रधान संजय यादव,ग्राम प्रधान राजेंद्र पटेल, रंजू सिंह, अनीता पटेल, सरिता सोनी, रामप्रकाश मास्टर, आशा, मधुबाला, शबनम, पूनम, शर्मिला, मुकेश प्रधान, प्रेमा, चंद्रकला, ममता, कुसुम, पूजा, सितारा, सुमन, प्रीति, नीतू, सुषमा, सरोज, नंदलाल मास्टर, राजेश, अमित, पूनम सिंह, श्यामसुंदर, रामबचन, सुनील सहित बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और ग्रामीण उपस्थित रहे. धरने का नेतृत्व नंदलाल मास्टर ने किया. कार्यक्रम का संचालन आशा राय और सोनी ने किया, अध्यक्षता अनीता ने की तथा धन्यवाद ज्ञापन मनीषा ने किया.

सावन में खिल उठी फूल मंडी, फूलों के कारोबार से जुड़े 500 किसान परिवार की बढ़ी आय...
सावन में खिल उठी फूल मंडी, फूलों के कारोबार से जुड़े 500 किसान परिवार की बढ़ी आय...
वाराणसी:सावन की शुरुआत के साथ ही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पूरी तरह शिवमय हो गई है। काशी विश्वनाथ मंदिर समेत शहर के छोटे-बड़े सभी शिवालयों में फूलों और विशेष मालाओं से भव्य श्रृंगार किया जा रहा है। बाबा भोलेनाथ को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, मदार और नीलकंठ की मालाओं की मांग बढ़ने से बनारस की सबसे पुरानी बांसफाटक फूल मंडी में कारोबार दोगुना हो गया है।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए सुगंधित फूल, मालाएं और पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसका सीधा असर फूल कारोबार पर देखने को मिल रहा है। बांसफाटक स्थित फूल मंडी सुबह से देर रात तक ग्राहकों से गुलजार है।फूल मंडी के संचालक एकांश अग्रवाल ने बताया कि सावन शुरू होने से पहले ही मंदिरों के श्रृंगार की एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है। केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के कई जिलों से भी विशेषकर सावन के सोमवार के लिए मालाओं और फूलों के ऑर्डर आते हैं।उन्होंने बताया कि कछवा, सारनाथ, चिरईगांव, संदहा, जालूपुरा और भगवानपुर समेत आसपास के गांवों से किसान अपने खेतों और बगीचों के फूल लेकर मंडी पहुंचते हैं। पूरा परिवार मिलकर मालाएं तैयार करता है और उन्हें बेचकर आजीविका चलाता है। इस मंडी से करीब 200 से 300 परिवार जुड़े हुए हैं। सावन में प्रतिदिन चार से पांच क्विंटल बेलपत्र की बिक्री हो जाती है।इस बार लगातार गर्मी और बारिश के कारण फूलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जो फूल तैयार हो रहे हैं, वे भी जल्दी खराब हो रहे हैं। उत्पादन कम और मांग अधिक होने से फूलों और विशेष मालाओं के दामों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है।आम दिनों में 50 से 60 रुपये में बिकने वाली मदार की माला सावन में 100 से 120 रुपये प्रति पीस बिक रही है। धतूरा 500 से 600 रुपये, बेलपत्र 250 से 300 रुपये प्रति किलो, जबकि सामान्य दिनों में 20 रुपये की नीलकंठ माला अब 50 से 80 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई है। छोटी फूल मालाएं भी 30 से 50 रुपये प्रति पीस बिक रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही रही तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।फूल व्यापारी सुनील गुप्ता ने बताया कि बांसफाटक मंडी काशी की सबसे पुरानी फूल मंडी है। यहां बनने वाली पारंपरिक मालाएं अन्य कहीं आसानी से नहीं मिलतीं। वाराणसी के प्रमुख मंदिरों—काशी विश्वनाथ, संकट मोचन, दुर्गाकुंड, महामृत्युंजय समेत कई प्रमुख शिवालयों में इसी मंडी से फूल और मालाएं भेजी जाती हैं। यहां सभी धर्मों के लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार फूल और मालाएं खरीदने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस मंडी से कई परिवार तीन पीढ़ियों से जुड़े हैं और सावन का महीना उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है।किसान जितेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि मंडी से जुड़े लगभग 20 प्रतिशत किसान पंचकोशी क्षेत्र से आते हैं और कई परिवार पिछले 70 वर्षों से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। एक गजरा या विशेष माला तैयार करने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान के लिए मालाएं तैयार करते हैं और फिर उन्हें बेचने के लिए मंडी लेकर आते हैं।सावन की शुरुआत के साथ काशी की फूल मंडी एक बार फिर आस्था और आजीविका का बड़ा केंद्र बन गई है। एक ओर जहां शिवभक्त बाबा के श्रृंगार के लिए विशेष फूल और मालाएं खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों किसान और फूल कारोबारियों के परिवारों की रोजी-रोटी भी इसी कारोबार पर निर्भर है। मौसम की मार से उत्पादन भले प्रभावित हुआ हो, लेकिन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के चलते फूलों की मांग लगातार बनी हुई है। व्यापारियों का मानना है कि सावन के आगामी सोमवारों में मांग और बढ़ेगी, जिससे फूलों का कारोबार भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
वाराणसी मंडल के 11 रेलकर्मी 'एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित, डीआरएम ने सराहा उत्कृष्ट कार्य...
वाराणसी मंडल के 11 रेलकर्मी 'एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित, डीआरएम ने सराहा उत्कृष्ट कार्य...
वाराणसी. पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में संरक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 रेलकर्मियों को 'एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) आशीष जैन ने भारतेन्दु सभागार में आयोजित समारोह में चयनित रेलकर्मियों को पुरस्कार प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की।डीआरएम आशीष जैन ने कहा कि भारतीय रेल की सर्वोच्च प्राथमिकता यात्रियों की संरक्षा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि वाराणसी मंडल के विभिन्न विभागों ने बेहतर समन्वय, टीम भावना और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करते हुए संरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने संभावित दुर्घटनाओं को टालने और रेल संपत्ति व यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कर्मचारियों की सतर्कता, त्वरित निर्णय क्षमता और दायित्वबोध की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायी बताया।ALSO READप्लास्टिक मुक्त काशी के लिए नगर निगम का अभियान तेज, 372 दुकानों पर लगाए जागरूकता स्टीकर...उन्होंने सभी रेलकर्मियों से हर परिस्थिति में सजगता, अनुशासन और उत्तरदायित्व के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।समारोह में अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) अशोक कुमार वर्मा, अपर मंडल रेल प्रबंधक (इन्फ्रा) अजय सिंह, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी आशुतोष शुक्ला सहित मंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।सम्मानित रेलकर्मी:रवि रंजन पटेल, प्रवीण कुमार राय, रास बिहारी पाण्डेय, संदीप कुमार, राजेश कुमार, उदय कुमार, उमेश कुमार दास, शम्भू शरण कुमार, मनोज कुमार (कांटावाल), शशांक शर्मा तथा मनोज कुमार (कांस्टेबल) को जून-2026 माह के लिए 'एक्सीलेंस अवार्ड' प्रदान किया गया।
प्लास्टिक मुक्त काशी के लिए नगर निगम का अभियान तेज, 372 दुकानों पर लगाए जागरूकता स्टीकर...
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वाराणसी. सावन माह और कांवड़ यात्रा के दौरान काशी को स्वच्छ एवं सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने गुरुवार को विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया। अभियान के तहत मैदागिन से गोदौलिया तक 372 दुकानों पर जागरूकता स्टीकर लगाए गए और लोगों से प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की अपील की गई।नगर निगम की आईईसी टीम ने मैदागिन से गोदौलिया तक जागरूकता रैली निकालकर दुकानदारों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं को प्लास्टिक मुक्त काशी का संदेश दिया। दुकानों पर लगाए गए स्टीकरों के माध्यम से स्वच्छता और सिंगल यूज़ प्लास्टिक के बहिष्कार का आह्वान किया गया।ALSO READ : कांवड़ मार्ग पर खुली मीट दुकानों पर नगर निगम की कार्रवाई, 24,500 रुपये जुर्माना वसूला...अभियान के तहत दशाश्वमेध घाट पर हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने प्लास्टिक मुक्त काशी का संकल्प लिया। युवाओं और श्रद्धालुओं को अभियान से जोड़ने के लिए घाट पर विशेष सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने नागरिकों, व्यापारियों, कांवड़ यात्रियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे बाबा विश्वनाथ की नगरी को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाए रखने में सहयोग करें तथा प्रतिबंधित पॉलीथिन और सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग न करें। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि सावन माह के दौरान यह जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा।