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वाराणसी के VVIP घाट पर हत्‍या ने खाेली सुरक्षा की पोल, रक्षक ही बने भक्षक

वाराणसी के VVIP घाट पर हत्‍या ने खाेली सुरक्षा की पोल, रक्षक ही बने भक्षक
May 25, 2026, 10:00 AM
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Posted By Preeti Kumari

A murder at Varanasi's VVIP ghat exposed security lapses, with the protectors becoming predators.


वाराणसी: शहर के प्रसिद्ध वीवीआईपी नमो घाट पर बीते रविवार हुई युवक की हत्या ने सुरक्षा की पोल खोल दी है. हो भी क्‍यों नहीं जब सुरक्षा में लगे बाउंसर ही भक्षक बन गए. इस समय यह जघन्‍य मामला पूरे शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. दोस्तों के साथ घूमने आए युवक की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या किए जाने के बाद घाट पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुडे लोगों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. लोग इसके लिए प्रशासनिक व्‍यवस्‍था, पुलिस और स्‍मार्ट सिटी पर भी दोषारोपण कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्‍योंकि नमो घाट को शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचते हैं. अंतरराष्‍ट्रीय और राष्‍ट्रीय आयोजन भी होते हैं. इसके बावजूद इस तरह की घटना ने सुरक्षा दावों की कलई खोल कर रख दी है.


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युवक को जान से हाथ धोना पडा


हालांकि जब हो हल्‍ला मचा तो पुलिस की आंख खुली और आनन फानन त्वरित कार्रवाई करते हुए सिक्योरिटी एजेंसी संचालक सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. बाउंसरों के भरोसे छोडने के कारण इस तरह की घटनाएं कभी हो सकती हैं. आरोप है कि यह बाउंसर सुरक्षा कम भौकाल अधिक जमाते हैं जिसके चलते एक युवक को जान से हाथ धोना पडा.


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मामूली विवाद में लाठी-डंडे से पीटकर हत्या


सोनभद्र से चार दोस्तों के साथ शनिवार की रात तीन बजे नमो घाट घूमने और गंगा स्नान करने आए सब्जी विक्रेता के बेटे राजेश जायसवाल उर्फ चिंटू (19) की निजी सुरक्षा कर्मियों ने मामूली विवाद में लाठी-डंडे से पीटकर हत्या कर दी. दोस्त देर रात ही घाट तक जाना चाह रहे थे लेकिन सुरक्षा कर्मी रोक रहे थे. राजेश के चार दोस्तों को भी बेरहमी से पीटा गया.


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मृतक के पिता बद्रीनारायण जायसवाल की तहरीर पर आदमपुर थाने की पुलिस ने रविवार को बाबा विश्वनाथ ट्रेडर्स सिक्योरिटी के संचालक अनुज सिंह, सुरक्षा कर्मी व चंदौली निवासी पवन यादव, सूरज यादव, चोलापुर के मनीष यादव और मिर्जापुर के राहुल यादव के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास समेत अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर ली. साथ ही सिक्योरिटी एजेंसी संचालक सहित पांच आरोपियों को राजघाट से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, अनुज सिंह ने बिना किसी कागजी अनुमति और किसी रिकॉर्ड के चारों सुरक्षा कर्मियों को घाट पर तैनात किया था। सिक्योरिटी एजेंसी का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा. पुलिस आयुक्त को पत्र लिख दिया गया है.


सत्यापन के रिकॉर्ड नहीं, एजेंसी का लाइसेंस होगा निरस्त


एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया कि बाबा विश्वनाथ सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक अनुज सिंह ने सुरक्षा कर्मियों को बिना किसी दस्तावेज के नौकरी पर रखा था. एक तरह से सभी फर्जी सुरक्षा कर्मी हैं. सत्यापन का कोई रिकाॅर्ड नहीं है. एजेंसी संचालक के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है.


पुलिस ने मामले को हल्के में लिया


नमो घाट पर पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने निजी सुरक्षा कर्मियों ने पर्यटक राजेश उर्फ चिंटू की जान ले ली. दोस्तों के मुताबिक, 19 साल का राजेश अचेत होकर गिर गया था फिर भी निजी सुरक्षाकर्मी उसे बेरहमी से पीट रहे थे. इससे राजेश का शरीर काला पड़ गया था. शरीर पर डंडे के कई निशान पड़ गए. मिन्नतें करते रहे। माफी मांगते रहे फिर भी सुरक्षाकर्मियों ने नहीं छोड़ा. पिकेट की पुलिस को सूचना दी गई, तो उसने भी मामले को हल्के में लिया. पुलिस ने कहा कि पहले राजेश को कबीरचौरा अस्पताल में भर्ती कराओ, फिर ऑटो से राजेश को अस्पताल ले गए. बाद में अन्य पुलिस कर्मी अस्पताल पहुंचे. आदमपुर इंस्पेक्टर भी सुबह के समय घटनास्थल पर पहुंच सके. उच्चाधिकारियों को हत्या की सूचना रविवार की सुबह ही दी गई. हालांकि पुलिस ने सूचना मिलते ही प्रभावी कार्रवाई की बात कही है.


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मौत खींच ले गई नमो घाट


प्रारंभित छानबीन में पता चला कि मृतक के दोस्त रोहित की बहन और जीजा ट्रेन से वाराणसी आ रहे थे. उसको लेने के लिए रोहित ने खलियारी के ही शिवाजी की कार किराये पर ली. कार में उसके साथ रोहित के अलावा उसके दोस्त भी सवार हो गए. बृजेश को वाराणसी में आंख दिखानी थी. बाकी लोगों को लौटना था. जब वाराणसी पहुंचे तो पता चला कि ट्रेन देरी से आएगी. इस पर वह नमो घाट पहुंचे जहां निजी सुरक्षाकर्मियों ने हमला बोल दिया. प्रधान प्रतिनिधि बेउवा राजेश चौरसिया ने बताया कि उसके बड़े पिता विशुन जायसवाल का रविवार को दसवां था. सिर्फ दोस्त के बहन-जीजा को लेने के लिए वाराणसी गया था लेकिन माैत नमो घाट तक ले गई.


घटना की जानकारी के बाद स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक अमरेंद्र तिवारी की ओर से कार्यदायी संस्था रोबस्ट के संचालक पुनीत मित्तल से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है. घाट पर तैनात गार्ड का क्राइम रिकॉर्ड भी तलब किया गया है. जवाब न देने की स्थिति में अनुबंध के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। - शाकंभरी, पीआरओ, स्मार्ट सिटी


सवालों के घेरे में प्रमुख पर्यटन स्थल की सुरक्षा


राजेश उर्फ चिंटू की मौत के बाद नमो घाट की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है. घाट का संचालन करने वाली आरके वैदिक कंपनी और सुरक्षा संभाल रही बाबा सिक्योरिटी सर्विस गैर प्रशिक्षित गार्डों से ड्यूटी करा रही है. बाबा सिक्योरिटी सर्विस कंपनी का संचालक अनुज सिंह पिछले एक साल से नमो घाट की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहा था. दो शिफ्ट में 15-15 सुरक्षा कर्मी तैनात कर रहा था.


नमो घाट पर अराजकता की स्थिति, पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं


4 दिसंबर 2025 : नमो घाट पर नमस्ते हैंड के पास नाव लगाकर सवारी बैठाने के लिए नाविकों के दो गुट भिड़े. लाठी-डंडे चले.

21 मार्च 2026 : नमो घाट फेस-2/3 के बीच जेटी के पास जबरन नाव लगाने का विवाद. आरोप है कि बजड़ा संचालक अभिषेक साहनी, गोविंद साहनी समेत करीब 14 नाविकों ने घाट के मैनेजर मनीष सिंह की पिटाई की थी. मनीष सिंह का हाथ टूट गया था. पीड़ित ने नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

27 मार्च 2026 : नमो घाट फेस-3 के पास विवाद के बाद नगर निगम की जेटी जबरन खोल दी गई. वहां नाव बांध दी गई थी. आदमपुर पुलिस ने नाव हटवाई और दोबारा जेटी लगवाई.

30 मार्च 2026 : सारनाथ के सराय मोहना निवासी मंजू देवी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई थी. पीड़िता ने इस मामले में अभिषेक साहनी, गोविंद साहनी समेत अन्य लोगों के खिलाफ आदमपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी.


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दशाश्वमेध के शीतला घाट पर बंद फ्लैट में आग, शॉर्ट सर्किट से भड़की लपटों पर 15 मिनट में काबू
दशाश्वमेध के शीतला घाट पर बंद फ्लैट में आग, शॉर्ट सर्किट से भड़की लपटों पर 15 मिनट में काबू
वाराणसी: दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के शीतला घाट के पास रविवार शाम 7 बजे एक कॉम्परेटिव भवन के तीसरे तल स्थित बंद फ्लैट में अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण ऐसी में शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। सूचना मिलते ही दशाश्वमेध पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।जानकारी के अनुसार भवन संख्या डी-17/136 एक कॉम्परेटिव भवन है, जिसे पहले फ्लैट प्रणाली के तहत बनाया गया था। समय के साथ इसमें बने अलग-अलग फ्लैट लोगों को बेच दिए गए और वर्तमान में प्रत्येक निवासी अपने-अपने हिस्से का मालिक है। भवन के भूतल पर कटरे में कई दुकानें संचालित होती हैं, जबकि भवन के बगल में एमआरके होटल (MRK Hotel) स्थित है। जिस फ्लैट में आग लगी, वह भी इसी भवन का हिस्सा है।स्थानीय निवासी महावीर प्रसाद जैपुरिया ने बताया कि घटना के समय वह घर पर नहीं थे। उनकी पत्नी फ्लैट में मौजूद थीं, जिन्हें आसपास के लोगों ने सुरक्षित नीचे उतार दिया। उन्होंने बताया कि जिस फ्लैट में आग लगी, उसमें कोई नहीं रहता था और वह लंबे समय से बंद था। फ्लैट में केवल एक बेड और कुछ पुराना कबाड़ रखा हुआ था, जो आग की चपेट में आकर जल गया। भवन के मालिक धनमल बताए जा रहे हैं, जो वर्तमान में रानीपुर में रहते हैं।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। फायर कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही मिनटों में आग पर काबू पा लिया, जिससे आग आसपास के फ्लैटों और नीचे मौजूद दुकानों तक नहीं फैल सकी।मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी ने बताया कि शीतला घाट के पास स्थित भवन के दूसरे/ऊपरी तल पर आग लगने की सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आई है। मकान उस समय खाली था। आग पर लगभग 10 से 15 मिनट में नियंत्रण पा लिया गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। केवल एक बेड और कुछ कबाड़ का सामान जलकर नष्ट हुआ है। मामले की जांच की जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग की जानकारी नहीं मिलती और दमकल की टीम तुरंत मौके पर नहीं पहुंचती, तो आग होटल, दुकानों और आसपास के अन्य फ्लैटों तक फैल सकती थी। लोगों की सतर्कता और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।
काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, सजकर तैयार हुई भगवान जगन्नाथ की पालकी...
काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, सजकर तैयार हुई भगवान जगन्नाथ की पालकी...
वाराणसी : काशी के प्रसिद्ध लक्खा मेलों में शामिल ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक पालकी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कारीगर पालकी की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट में जुटे हैं। इसी पालकी में विराजमान होकर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा मंदिर से निकलकर रथयात्रा स्थल तक पहुंचेंगे, जहां से ऐतिहासिक रथयात्रा का शुभारंभ होगा।मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि भगवान की यह पालकी सेखुआ (साखू) की मजबूत लकड़ी से बनाई जाती है। इसकी विशेषता इसकी मजबूती और लंबी आयु है। वर्तमान में उपयोग की जा रही पालकी लगभग 15 से 20 वर्ष पुरानी है, जिसे पुरानी पालकी के जर्जर होने के बाद तैयार कराया गया था। हर वर्ष रथयात्रा से पहले इसकी विशेष मरम्मत और सजावट की जाती है, ताकि भगवान की यात्रा पूरी गरिमा और भव्यता के साथ संपन्न हो सके।उन्होंने बताया कि 15 जुलाई को पालकी को फूल-मालाओं, रंग-बिरंगी झालरों और पारंपरिक सजावट से अलंकृत किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा पहले पालकी में विराजमान होकर मंदिर से निकलते हैं। काशी की संकरी गलियों में विशाल रथ का प्रवेश संभव नहीं होने के कारण श्रद्धालु भगवान की पालकी को अपने कंधों पर उठाकर रथयात्रा स्थल तक ले जाते हैं। इस दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है और जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।रथयात्रा स्थल पर भगवान का रात्रि विश्राम होता है। अगले दिन प्रातःकाल भगवान भव्य रथ पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले में दूर-दराज़ से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मेले की समाप्ति के बाद भगवान पुनः इसी पालकी के माध्यम से अपने मंदिर वापस लौटते हैं।मंदिर प्रशासन के अनुसार रथयात्रा के समापन के बाद पालकी को मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा जाता है और उसकी नियमित देखभाल की जाती है। मंदिर के निर्माण एवं विस्तार कार्य पूर्ण होने के बाद पालकी और उससे जुड़े अन्य धार्मिक उपकरणों के संरक्षण की और बेहतर व्यवस्था की जाएगी।ALSO READ : रंग मल्हार में संदूक पर दिखाया कला कौशल, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश...धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष 1790 में मंदिर की स्थापना के साथ ही काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा प्रारंभ हुई थी। तब से लेकर आज तक यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और भगवान जगन्नाथ की यह पालकी श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है। हर वर्ष रथयात्रा से पहले पालकी की सजावट और उसकी तैयारियां इस ऐतिहासिक आयोजन के शुभारंभ का प्रमुख आकर्षण होती हैं।
रंग मल्हार में संदूक पर दिखाया कला कौशल, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश...
रंग मल्हार में संदूक पर दिखाया कला कौशल, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश...
वाराणसी : संदूक शब्द से ही लोहे के काले रंग के बक्से की छवि जेहन में आती है जिसका उपयोगी जरूरी सामानों को रखने के लिए किया जाता है. जरा सोचिए इस संदूक पर खूबसूरत कलाकृति हो तो कितना आकर्षक लगेगा. उसका इस्तेमाल करने वाला जितनी बार देखेगा उसका मन खिल उठेगा. ऐसे ही लुभावने संदूक तैयार किए गए बीएचयू के फाइन आट्सर् फैकल्टी के अहिवासी आर्ट गैलरी में. रविवार को यहां दो दिवासीय '17वीं रंग मल्हार' अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत हुई. इस बार इसका विषय संदूक था जिस पर देश-विदेश के कलाकारों ने अपना कौशल दिखाया. कला के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए हरियाली और अच्छी वर्षा की कामना की.कार्यक्रम के संयोजक सुरेश जांगिड़ ने बताया कि 'रंग मल्हार' की अवधारणा भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध राग 'मेघ मल्हार' से प्रेरित है. मान्यता है कि इस राग के गायन और वादन से प्रकृति प्रसन्न होकर वर्षा करती है. इसी सोच के साथ पिछले 17 वर्षों से हर वर्ष जुलाई के दूसरे रविवार को 'रंग मल्हार' का आयोजन किया जाता है, ताकि प्रकृति में संतुलन बना रहे और धरती पर हरियाली कायम रहे.हवा महल तो किसी ने सजाया मोरउन्होंने बताया कि इस वर्ष कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता के लिए 'बाक्स' या 'संदूक' को कैनवास के रूप में चुना है. यह बाक्स केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि पुरानी यादों, पारिवारिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है. पुराने समय में लोग इसी संदूक में अपनी बहुमूल्य वस्तुएं, दस्तावेज और बचपन की किताबें-स्लेट आदि संभालकर रखते थे. आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, विरासत और प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से इस विषय का चयन किया गया है.कार्यशाला में कलाकारों ने पुराने संदूकों, जूते के डिब्बों, अटैचियों और अन्य उपयोग से बाहर हो चुकी वस्तुओं को अपनी कला का माध्यम बनाया. कहीं पुराने संदूक पर मोर और प्राकृतिक दृश्यों की मनमोहक आकृतियां बनाई गईं, तो कहीं पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को रंगों के माध्यम से जीवंत किया गया. कलाकार ने बाक्स पर जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल की आकृति उकेरी, जिसने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया.17 सालों से चली आ रही रंग मल्हार की परंपरा'रंग मल्हार' की शुरुआत करीब 17 वर्ष पहले प्रसिद्ध कलाकार डा. विद्यासागर उपाध्याय की प्रेरणा से हुई थी. उस समय कम वर्षा होने से लोग चिंतित थे. तब कलाकारों ने मिलकर बारिश के आह्वान के लिए छतरियों को रंगों से सजाया और उनके साथ जुलूस निकाला. संयोगवश उसी दिन शाम को जोरदार बारिश हुई. तभी से यह आयोजन एक परंपरा बन गया.ALSO READ : चाइनीज मांझा की तलाश में पुलिस ने पतंगबाजों को पकड़ाकार्यक्रम की विशेषता यह भी रही है कि हर वर्ष किसी नए माध्यम पर पेंटिंग की जाती है. अब तक छतरियों, मास्क, साइकिल, लालटेन, झंडे, थाली, चाय की केतली और यहां तक कि कार को भी रंगों से सजाया जा चुका है. इन कलाकृतियों के माध्यम से समाज में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाता है.आयोजकों ने युवाओं से अपनी संस्कृति, परंपराओं और उन चीजों को सहेजने की अपील की, जिनसे उनकी भावनाएं और संस्कार जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और प्रकृति से जोड़ने का सशक्त साधन भी है.