वाराणसी की अनोखी शिव भक्त हैं नूर फातिमा

वाराणसी : कचहरी में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में चर्चित नूर फातिमा की पहचान एक तेज-तर्रार क्रिमिनल लॉयर की है, लेकिन उनकी एक और विशेष पहचान है-वे शिव की परम भक्त हैं और पांच वक्त की नमाज़ भी अदा करती हैं. आस्था और सौहार्द का यह अनोखा संगम उन्हें काशी की अनोखी शिव भक्तिनी बनाता है.महाशिवरात्रि के अवसर पर उनके द्वारा स्थापित रूद्रेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं. मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल है.

नूर फातिमा ने बताया की आज महाशिवरात्रि पर मैं रात भर जागरण करूंगी, आज मेरे भोलेनाथ की शादी है.और बताती है, बाबा विश्वनाथ मेरे आराध्य हैं.जब-जब मैं मुश्किलों में आती हूं, वो मुझे रास्ता दिखाते हैं.उनकी आस्था इतनी गहरी है कि वे बिना जलाभिषेक किए कोई भी काम शुरू नहीं करतीं.
कालोनी के लोगों से बातचीत कर बनवाया मंदिर

नूर फातिमा ने बताया की कालोनी के लोगों से मंदिर बनवाने के लिए बातचीत की और मंदिर का निर्माण कार्य 27 नंवबर 2004 में पहली ईंट स्वयं रखकर शुरू किया.यह मंदिर तीन महीने में बनकर तैयार हुआ.मंदिर के बनने के बाद अब रोजाना यहां दर्शन को आती हूं.साथ ही पूरा मोहल्ला यहां पूजा करने आता है. तब से आज तक रोजाना सुबह शाम यहां बाबा भोलेनाथ को जल चढाने आती हूं.
नूर फातिमा ने जब मंदिर बनवाना शुरू किया, तब से मांस-मछली से कोसों दूर हूं. उनकी यह साधना और समर्पण समाज में धार्मिक सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश देता है.

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रूद्रेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि काशी में आस्था की कोई सीमाएं नहीं—यहां भक्ति ही सबसे बड़ा धर्म है.
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नमाज और रमजान के रोजों के साथ दर्शन रोजाना
नूर फातिमा ने बताया की मैंने इस्लाम धर्म छोड़ा नहीं है.मै पांचो वक़्त की नमाजी हूं और रमजान में सारे रोजे भी रखती हूं. लेकिन मेरा जो शिव आराधना का टाइम है वह बदलता नहीं. मै रोजाना सुबह और शाम यहां मंदिर में जल और माला चढ़ाने के लिए आती हूं.



