कार से मोबिल गिरने का झांसा देकर उड़ाए 17 लाख के जेवर , दो टप्पेबाज गिरफ्तार

वाराणसी : सिगरा पुलिस व एसओजी टीम की संयुक्त टीम ने टप्पेबाजी के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस संबंध में गिरोह के दो शातिरों को रेलवे की वसुंधरा कालोनी के खंडहरनुमा मकान से दबोचा गया. उनके पास से 1.62 लाख नकद, 848 नाक की कील (अनुमानित कीमत करीब 17 लाख रुपये) एवं 02 फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए. दोनों ने पिछले दिनों सिगरा थाना क्षेत्र के महमूरगंज में हुई टप्पेबाजी की घटना में शामिल होना स्वीकार किया. कार्रवाई के दौरान गिरोह के अन्य सदस्य पहले ही फरार हो चुके थे.

गिरफ्तार आरोपियों में .रमण जाधव निवासी जान्हवी पार्क पावर्ती नगर थाना वटवा जिला अहमदाबाद गुजरात एवं प्रेम विश्वनाथ जाधव निवासी झूलेलाल नई चाली के पास सेजपुर टावर नरोडा पाटिया अहमदाबाद गुजरात शामिल हैं.
जाने पूरा मामला
पुलिस के अनुसार शिकायत कर्ता ने केस दर्ज कराया था कि उसके द्वारा सोने के बने गहनों का फेरी लगाकर व्यापार किया जाता है. व्यापार के कार्य से 11 दिसंबर 2025 को अपने स्टाफ के साथ बुक की गई गाड़ी अर्टिगा व उसके चालक अमित के साथ नाक की कील बेचने के लिए प्रयागराज जा रहा था. इस बीच रास्ते में आकाशवाणी तिराहे से 100 मीटर पहले एक अज्ञात आदमी के द्वारा गाड़ी के पास आकर बताया गया की आप की गाड़ी से मोबिल गिर रहा है. जिसको देखने के लिए अमित ने गाड़ी को वही सड़क के किनारे खड़ा किया. हम लोग गाड़ी से उतर कर बोनट खोल कर यह देखने लगे की मोबिल कहाँ से गिर रहा. उतने में ही किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरा बैग धोखे से मेरे गाडी से निकाल लिया गया. मेरे बैग में 232 पत्ता सोने की नाक की कील थी. जिसमें 175 पत्तो में 50 पीस के हिसाब से नाक कील थी और 57 पत्ते में 25 पीस के हिसाब से नाक कील तथा 10-12 पीस गले का छोटा लाकेट भी था.
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कई सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों को चिन्हित किया. पुछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि बरामद सामान हम दोनों व हमारे साथी ने मिल कर आकाशवाणी तिराहे के पास एक गाड़ी से निकाला था. हम सब लोगो ने आपस में पूरा सामान बाँट लिया है. हम लोग यही थे बाकी लोग चले गये. हम लोग रेकी करने के लिए रूके थे. पैसों के बारे में पूंछा गया तो रमण जाधव ने बताया कि ये पैसा जो एक लाख बासठ हजार है वह मेरे बेटे ने कहीं सोना बेंचकर मुझे खर्च के लिए दिया है. हम दोनों रेकी के लिए रूके हैं ताकि फिर से चोरी कर सकें. लेकिन आप लोगों ने पकड लिया और इस प्रकार अपने जुर्म को स्वीकार करते हुए अपने किये की बार बार माफी मांग रहे हैं. दोनों अभियुक्तों ने एक स्वर में बताया कि हम लोगों ने फर्जी आधार कार्ड बनवा रखा है ताकि कहीं रूके तो कोई पकड़ न सके. असली आधार कार्ड हम लोगों का घर में है.



