वाराणसी में चद्रग्रहण की वजह से मंदिरों के कपाट बंद, पूजा पाठ बंद

वाराणसी: चंद्रग्रहण के समय देव विग्रहों को स्पर्श करने या उनका पूजन करने की मनाही है. ऐसे में चंद्रग्रहण के पूर्व ही सभी मंदिरों के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए गए हैं. श्रद्धालु मंदिर परिसर में कहीं बैठकर मानसिक जप-तप, यज्ञ-हवनादि कर सकते हैं. इस बार भी फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार को लगने वाले खंड चंद्रग्रहण के दिन सभी मंदिरों के गर्भगृहों के कपाट बंद होने के साथ अब ग्रहण मोक्ष होने के उपरांत खोले जाएंगे. पूरे मंदिर की साफ-सफाई व देव विग्रहों के स्नान-आरती के उपरांत ही आम श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन सुलभ हो सकेगा.

ग्रहण के चलते काशी में सबसे पहले संकटमोचन हनुमान मंदिर के कपाट सुबह नौ बजे सूतक लगते ही बंद हो गए. महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि शाम सात बजे मोक्ष होने पर मंदिर के पट खुलेंगे. इसी क्रम में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर व मां अन्नपूर्णा के कपाट परंपरानुसार ग्रहण के डेढ़ घंटे पूर्व बंद कर दिए जाते हैं. अत: इन दोनों धामों में 4:30 बजे ही कपाट बंद कर दिए जाएंगे. 6:48 बजे ग्रहण मोक्ष के उपरांत 7:15 बजे मंदिर साफ-सफाई के उपरांत पुन: श्रद्धालुओं के लिए पुन: खोले जाएंगे.

कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर के पुजारी और गोस्वामी समाज के महामंत्री संतोष गिरी ने बताया कि वहां मंदिर दोपहर दो बजे से ही बंद कर दिया जाएगा. सूतक समाप्त होने के बाद शाम सात बजे मंदिर का कपाट खोल दिया जाएगा.
35 वर्षों में छठीं बार बदला मां गंगा आरती का समय
चंद्रग्रहण की वजह से दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के समय में 35 वर्षों में छठीं बार बदलाव किया गया है. अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया चंदग्रहण के चलते मां गंगा की दैनिक आरती शाम 6:15 बजे की जगह शाम 7:30 बजे से मोक्ष के उपरांत प्रारंभ होगी. पिछले वर्ष 2025 में चंद्र ग्रहण के कारण सात सितंबर को मां गंगा की दैनिक आरती दोपहर 12 बजे की गई थी. इसके पूर्व 28 अक्तूबर 2023, 16 जुलाई 2019, 27 जुलाई 2018 और सात अगस्त 2017 में मां गंगा की आरती ग्रहण के कारण दिन में हुई थी.



