वाराणसी समेत 10 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलेगी यह विशेष सुविधा, रेलवे बोर्ड की नई पहल

वाराणसी : टिकट काउंटरों पर लगने वाली भीड़ और इसके चलते ट्रेन छूटने की समस्या से निजात के लिए अब रेलवे बोर्ड ने नई पहल की है. हालांकि ट्रायल के तौर पर पहले दस स्टेशनों का ही चयन किया गया है. रेलवे स्टेशनों पर अब एम-यूटीएस (मोबाइल अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली) सहायक अनारक्षित टिकट बेचने के लिए स्टेशनों पर घूमेंगे. टिकट खिडकी पर लंबी कतारों के कारण कई बार यात्री टिकट नहीं ले पाते और बिना टिकट यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं. इस नई व्यवस्था से रेलवे की आय में वृद्धि होगी और बिना टिकट यात्रा करने वालों पर निगरानी रखना भी आसान होगा. रेलवे बोर्ड की यह योजना 30 जून, 2027 तक लागू रहेगी.
रेलवे बोर्ड ने देशभर में एनएसजी एक, दो और तीन श्रेणी के 10 प्रमुख स्टेशनों का चयन किया है. इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी, छपरा, मऊ, बलिया, सिवान, गोरखपुर, लखनऊ, गोंडा, बस्ती और फर्रुखाबाद स्टेशनों पर एम-यूटीएस सहायक की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस कार्य के लिए एक निजी कंपनी को निविदा के माध्यम से जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिसके कर्मचारी कमीशन पर स्टेशनों पर टिकट बेचेंगे. इस कदम का उद्देश्य यात्रियों को टिकट खरीदने में सहूलियत प्रदान करना है, जिससे वे बिना किसी परेशानी के यात्रा कर सकें. एम-यूटीएस सहायक यात्रियों को टिकट खरीदने में मदद करेंगे और इस प्रक्रिया को सरल बनाएंगे. इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि रेलवे को भी अपनी आय में वृद्धि की उम्मीद है.
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रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस प्रणाली से बिना टिकट यात्रा करने वालों की संख्या में कमी आएगी, जिससे रेलवे को आर्थिक लाभ होगा. इसके अलावा, यह व्यवस्था यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव सुनिश्चित करेगी. इस योजना के तहत, एम-यूटीएस सहायक स्टेशनों पर विभिन्न स्थानों पर उपस्थित रहेंगे, ताकि यात्रियों को टिकट खरीदने में कोई कठिनाई न हो. यह कदम रेलवे की डिजिटल पहल का एक हिस्सा है, जो यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है. रेलवे की यह नई पहल न केवल यात्रियों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि रेलवे की आय में भी वृद्धि करेगी.



