वाराणसी के छात्रों ने बनाया जीवनरक्षक हेलमेट ‘गरुड़ कवच’

वाराणसीः सड़क हादसों में खासकर दो पहिया वाहन चालकों का जीवन बचाने में सबसे कारागार हेलमेट की भूमिका को कोई नकार नहीं सकता है. वहीं बिना हेलमेट लगाकर चलना तथा शौकिया या सस्ता हेलमेट से देश में बढ़ते सड़क हादसों और लगातार हो रही मौतों को देखते हुए वाराणसी के स्कूल के बच्चों ने एक अनोखा नवाचार किया है. लोहता स्थित एक निजी स्कूल के छात्रों ने ‘गरुड़ कवच’ नामक हाई-टेक हेलमेट तैयार किया है, जो सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है.

यह है हेलमेट की खासियत
जानकारी दी गई कि इस विशेष हेलमेट की खासियत यह है कि इसमें विशेष प्रकार का सेंसर लगाया गया है. यदि किसी दो पहिया वाहन चालक का एक्सीडेंट होता है और मौके पर तुरंत उसके लिए मदद नहीं पहुंच पाती, तो उसके हेलमेट में लगा ऑटोमेटिक सेंसर सक्रिय हो जाएगा. इस सेंसर के चरिए तुरंत उसके परिवार को कॉल, मैसेज और लाइव लोकेशन पहुंच जाता है जिससे घायल वाहन चालक को समय रहते मदद मिल सकती है.

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अभी लागत है थोड़ी महंगी, बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर पड़ेगी सस्ती
इस हेलमेट बनाने की चीम में शमिल छात्रा रियांशी तिवारी तथा छात्र राजीव के अनुसार महज एक महीने की मेहनत से तैयार हुआ यह हेलमेट पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और भारतीय उपकरणों से बनाया गया है. इस एक हेलमेच को बनाने में लागत लगभग आई है. हेलमेट पर ‘Make in India’ का लोगों भी दर्शाता है कि यह भारत की युवा पीढ़ी की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. छात्रों की माने तो अगर इस हेलमेट का पेटेंट कर भारी मात्रा में इसका उत्पादन किया जाए तो इसकी लागत एक हजार से दो हजार रुपयों के बीच में ही आएगी. छात्रों की इस सफलता पर एकेडमिक डायरेक्टडॉ सुजय चक्रवर्ती ने जहां उनकी पीठ थपथपाई है वहीं उन्हें निरंतर आगे भी नवाचार करने का आह्वान किया है.



