नमो घाट हत्याकांड के बाद शपथ पत्र भरवाने को लेकर वेंडरों में नाराजगी, सुरक्षा की उठी मांग

वाराणसी: नमो घाट पर पर्यटक राजेश उर्फ चिंटू की पिटाई के बाद हुई मौत के मामले ने घाट की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रणाली को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. घटना के बाद घाट का संचालन कर रही कंपनी ने यहां व्यवसाय कर रहे वेंडरों, दुकानदारों और अन्य संचालकों से शपथ पत्र भरवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस कदम को लेकर घाट परिसर में काम करने वाले व्यवसायियों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है.

व्यवसायियों पर अतिरिक्त शर्तें लागू करना उचित नहीं
वेंडरों का कहना है कि वे हर महीने 20 हजार से 50 हजार रुपये तक किराया, जीएसटी और कमर्शियल बिजली शुल्क का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. उनका आरोप है कि पूर्व में कई बार दुकानों और झूलों में चोरी तथा तोड़फोड़ की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए. ऐसे में पर्यटक की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के बजाय व्यवसायियों पर अतिरिक्त शर्तें लागू करना उचित नहीं है.
नमो घाट का संचालन निजी कंपनी के हाथों में है, जिसने विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के लिए घाट परिसर को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा है. अब हालिया घटना के बाद प्रबंधन की ओर से वेंडरों को शपथ पत्र देकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो.

शपथ पत्र में क्या मांगा जा रहा है?
वेंडरों को दिए जा रहे शपथ पत्र में उनसे यह घोषणा कराई जा रही है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है, वे किसी प्रकार की मारपीट या अभद्रता में शामिल नहीं होंगे तथा नमो घाट प्रबंधन और वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन करेंगे. साथ ही किसी भी नियम उल्लंघन की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी स्वयं लेने की बात भी शपथ पत्र में शामिल की गई है.
पर्यटक की मौत के बाद बढ़ी निगरानी
गौरतलब है कि 25 मई की भोर में सोनभद्र निवासी राजेश उर्फ चिंटू की नमो घाट के गेट नंबर-1 पर सुरक्षा कर्मियों से कहासुनी हो गई थी. आरोप है कि विवाद के बाद सुरक्षा गार्डों ने उसकी बेल्ट और डंडों से पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौत हो गई. घटना में उसके साथ मौजूद युवकों के साथ भी मारपीट की बात सामने आई थी. मामले में पुलिस ने चार सुरक्षा गार्डों और सुरक्षा एजेंसी संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

संचालन कंपनी भी जांच के घेरे में
घटना के बाद वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से घाट के कथित लापरवाहीपूर्ण संचालन को लेकर संचालन कंपनी और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया है. जांच एजेंसियां पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रही हैं. इस बीच वेंडरों का कहना है कि घाट की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जवाबदेही तय करना अधिक जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
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