करसड़ा प्लांट में सात माह में 35.5% बढ़ा कूड़ा निस्तारण, जुलाई में 31,940 टन कचरा हुआ प्रोसेस

वाराणसी : ‘स्वच्छ काशी, सुंदर काशी’ के संकल्प के तहत नगर निगम की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के प्रयासों का असर अब कूड़ा प्रसंस्करण के आंकड़ों में भी दिखने लगा है। करसड़ा स्थित वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट में जनवरी की तुलना में जुलाई 2026 तक कूड़ा निस्तारण में करीब 35.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जनवरी में जहां 23,569.8 टन कचरे का प्रसंस्करण हुआ था, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 31,940 टन पहुंच गया।
नगर निगम के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 तक करसड़ा प्लांट में कुल 1,87,720.5 टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया। माहवार आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में 24,056.4 टन, मार्च में 26,272.5 टन, अप्रैल में 24,924.7 टन, मई में 28,774.8 टन और जून में 28,182.2 टन कचरे का निस्तारण किया गया।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में करसड़ा स्थित वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट से करीब 50 हजार टन जैविक खाद (कंपोस्ट) का उत्पादन किया गया। इसे विभिन्न फर्टिलाइजर कंपनियों को बिक्री के लिए भेजा गया। इसी अवधि में प्लांट से करीब 52 हजार टन रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) भी तैयार हुआ, जिसे देश की विभिन्न सीमेंट फैक्ट्रियों और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स को ईंधन के तौर पर सप्लाई किया गया।
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नगर निगम के मुताबिक वाराणसी शहर में प्रतिदिन करीब 1000 से 1300 टन ठोस कचरा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए शहर में अलग-अलग क्षमता वाले प्रोसेसिंग प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। करसड़ा स्थित वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन कचरे के प्रसंस्करण की है।
इसके अलावा रमना स्थित वेस्ट टू-चारकोल प्लांट में प्रतिदिन करीब 600 टन ठोस कचरे से लगभग 200 टन कोयला बनाने की क्षमता है। रमना में ही निर्माण सामग्री और मलबे से ईंट व टाइल्स तैयार करने के लिए सीएंडडी प्लांट संचालित है, जिसकी क्षमता 200 मीट्रिक टन है। पहाड़िया मंडी, भवानिया पोखरी और आईडीएच कॉलोनी में स्थापित सीबीजी प्लांटों में वेस्ट-टू-एनर्जी प्रक्रिया के तहत प्रतिदिन करीब 500 किलोग्राम सीबीजी का उत्पादन किया जा रहा है।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शहरवासियों से काशी को स्वच्छ और हरित बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने लोगों से घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग बाल्टी या डस्टबिन में रखकर सफाईकर्मियों को देने का आग्रह किया है। नगर निगम का कहना है कि स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण होने से उसके प्रसंस्करण और निस्तारण को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।



