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यूपी-बिहार से दूसरे देशों में मानस-गीता ले गए तो कुली कहलाए, बाद में बने पीएम-राष्ट्रपति...

यूपी-बिहार से दूसरे देशों में मानस-गीता ले गए तो कुली कहलाए, बाद में बने पीएम-राष्ट्रपति...
Jun 05, 2026, 10:31 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : यूपी-बिहार से रामचरित मानस और गीता जैसे धर्मग्रंथों को लेकर गिरमिटिया मजदूरों को कुली कहा गया लेकिन बाद में ये ही पीएम और राष्ट्रपति बने. साथ ही उनके साथ गए ग्रंथ ही उन देशों का धार्मिक और आध्यात्मिक आधार बन गए. सूरीनाम में भारतीय आगमन दिवस पर गिरमिटिया देशों में हिंदी पत्रकारिता और साहित्य, संस्कृति, परंपरा को लेकर बीएचयू में गुरुवार को केएन उडुप्पा सभागार में उडुप्पा सभागार में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ.


पत्रकारिता विभाग के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि भारतीय प्रवासी कभी कुली कहे जाते थे, वे आज कई देशों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उच्च सांविधानिक पदों तक पहुंचे हैं. आगे कहा कि 170 साल पहले जब प्रवासी भारतीय यहां से गए तब अपने साथ सिर्फ श्रम शक्ति लेकर गए थे, लेकिन सूरीनाम में भोजपुरी, अवधि, मैथिली, मगही और ब्रज जैसी भाषाओं की पूरी संस्कृति ही तैयार हो गई है. सरनामी हिंदी, फिजी हिंदी और मॉरीशस की क्रेयोल भाषा बनी. साथ ही ये रामचरितमानस, कबीर की बीजक और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों को भी अपने साथ ले गए और अब वहां धर्म और आध्यात्म का खूब बोलबाला है. प्रवास वर्ष 1834 में मॉरीशस से शुरू हुआ, जिसके बाद सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो व गयाना सहित कई देशों में हुआ. ये उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग ही थे.


उन देशों के लोग सुनते हैं पंचतंत्र की कथाएं


विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने कहा कि आज भी भारत में हिंदू ग्रंथ जितने प्रासंगिक हैं, गिरमिटिया देशों में भी उतना ही है. पंचतंत्र की कथाएं उन देशों के घरों में सुनाए जाते हैं. वहां के लोगों के आराध्य देव श्रीराम और श्रीकृष्ण हैं. गिरमिटिया के देशों में कर्म का आधार गीता है. विशिष्ट अतिथि आईएमएस बीएचयू के डीन प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि हिंदी के वैश्विक स्वरूप और प्रभाव को ज्यादा विस्तार दिया जाए. ग्लोबल गिरमिटिया काउंसलिंग अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि गिरमिटिया देशों में हिंदी पत्रकारिता और साहित्य ने प्रवासी भारतीयों को उनकी मूल पहचान से जोड़े रखने में पुल का काम किया है.

आज मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम और दुनिया के कई देशों में भोजपुरी की गूंज सुनाई देती है. वहां के लोग अपने त्योहारों में भारतीय परंपराओं को जीवित रखते हैं और खुद को पूर्वांचल की मिट्टी से जुड़ा मानते हैं. लेकिन इस पहचान के पीछे एक ऐसा इतिहास छिपा है, जो दर्द, बिछड़न और संघर्ष से भरा हुआ है. यह कहानी है उन लाखों भारतीयों की, जिन्हें बेहतर जीवन और रोजगार का सपना दिखाकर एक "एग्रीमेंट" के तहत हजारों किलोमीटर दूर विदेशी धरती पर भेज दिया गया. अपनों से बिछड़कर, समुद्र पार कर वे अनजान देशों में पहुंचे, जहां उनका इंतजार कर रही थीं कठिन परिस्थितियां और संघर्षों से भरी जिंदगी.


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भारत में शुरू हो गिरमिटोलॉजी कोर्स और अध्ययन


वक्ता शारदानंद हरिनंदन ने कहा कि भले ही हम भौगोलिक रूप से भारत से दूर हैं, लेकिन हमारा हृदय आज भी हिंदुस्तान के लिए धड़कता है. भारत में गिरमिटोलॉजी के अध्ययन और शिक्षण की औपचारिक शुरुआत की जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी प्रवासी भारतीयों के इतिहास और योगदान से परिचित हो सके. प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि हिंदी विश्व समुदाय को जोड़ रही है. संचालन डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया. धन्यवाद ज्ञापन बृजेश पांडेय ने प्रस्तुत किया. सभागार में प्रो. भुवाल राम, प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. विद्योत्तमा मिश्र, डॉ. बाला लखेंद्र, रंजीत राय, प्रांजल पांडेय आदि मौजूद रहे.

बरेका में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत चला विशेष सफाई अभियान, लोगो को किया गया जागरूक.
बरेका में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत चला विशेष सफाई अभियान, लोगो को किया गया जागरूक.
वाराणसी। रेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और बरेका महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत लगातार स्वच्छता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में मंगलवार को बरेका परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया।अभियान के तहत बरेका परिसर में स्थापित सौर ऊर्जा आधारित उपकरणों और सोलर पैनलों की विशेष साफ-सफाई की गई। उपकरणों पर जमा धूल-मिट्टी और गंदगी को हटाने के साथ उनकी कार्यशीलता की भी जांच की गई। आवश्यकता के अनुसार रखरखाव संबंधी कार्य किए गए। अधिकारियों ने सौर ऊर्जा उपकरणों को नियमित रूप से स्वच्छ और क्रियाशील रखने पर जोर दिया।इसके अलावा बरेका के ऑफिसर्स गेस्ट हाउस (OGH) और ऑफिसर्स रेस्ट हाउस (ORH) के किचन क्षेत्रों और डस्टबिन की विशेष सफाई की गई। किचन परिसर में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।बरेका के आवासीय और वाणिज्यिक परिसरों में भी व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। जलालीपट्टी मार्केट में सार्वजनिक शौचालयों और नालियों की सफाई की गई। नालियों में जमा कचरे और गंदगी को हटाकर जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया।अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और दुकानदारों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलाने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।बरेका प्रशासन के अनुसार, ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के माध्यम से स्वच्छ परिसर, स्वच्छ कॉलोनी और स्वच्छ वातावरण के निर्माण के साथ लोगों को स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया जा रहा है।ALSO READ:IMA बनारस का कार्यकाल ऐतिहासिक उपलब्धियों के लिए याद रखा जाएगा --- डॉ. अनुराग टंडन
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वाराणसी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) बनारस के वर्ष 2026 के कार्यकाल को लेकर अध्यक्ष डॉ. अनुराग टंडन ने कहा कि इस सत्र में टीम ने कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि IMA परिसर में वर्ष 2026 की बैलेंस शीट पर हस्ताक्षर करते हुए उन्हें इस बात का गर्व है कि पूरी टीम ने संगठन को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम किया।डॉ. अनुराग टंडन ने अपने संदेश में कहा कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान डॉ. अरुण त्रिपाठी, डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. एस.पी. सिंह और डॉ. रितु गर्ग समेत पूरी टीम ने उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने कहा कि टीम के सामूहिक प्रयासों के कारण IMA बनारस का यह सत्र लंबे समय तक याद रखा जाएगा।उन्होंने कहा कि संगठन की उपलब्धियों के पीछे पूरी टीम की मेहनत और सहयोग रहा है। अध्यक्ष ने आगामी टीम को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि नई टीम भी IMA बनारस को इसी तरह आगे बढ़ाएगी।डॉ. अनुराग टंडन ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करते हुए कहा कि आने वाली टीम को भी संगठन के हित में बेहतर कार्य करने की शक्ति और सफलता मिले। उन्होंने अपने संदेश का समापन “जय हिंद, Long Live IMA” के साथ किया।ALSO READ:बरेका में वित्तीय प्रबंधन एवं साइबर सुरक्षा पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
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वाराणसी।बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को वित्तीय प्रबंधन तथा साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बैंक ऑफ बड़ौदा, बरेका शाखा द्वारा आज दिनांक 22 सितंबर 2026 को प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र (TTC) के ऑडिटोरियम में जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला में बैंक ऑफ बड़ौदा के विशेषज्ञ एजीएम एंड डीआरएम श्री आनंद लखमानी और शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा, बरेका श्री दिनेश कुमार द्वारा रेलवे सैलरी पैकेज (RSP), कार्यरत कर्मचारियों सहित सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के वित्तीय प्रबंधन तथा साइबर सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एवं उपयोगी सुझाव प्रदान किए गए।विशेषज्ञों ने सुरक्षित एवं सुनियोजित वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, साइबर अपराध से बचाव तथा व्यक्तिगत एवं बैंकिंग संबंधी जानकारी को सुरक्षित रखने के उपायों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।कार्यशाला में बरेका के कार्यरत एवं सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा विशेषज्ञों से वित्तीय प्रबंधन एवं साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को वित्तीय रूप से जागरूक एवं डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाना रहा।इस अवसर पर प्राचार्य, प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र श्री सुभाष चंद्र यादव, वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी-मुख्यालय श्री राजकुमार गुप्ता, सहायक कार्मिक अधिकारी - कर्मशाला श्री पीयूष मिंज,सहायक कार्मिक अधिकारी-मुख्यालय श्री राम प्रवेश यादव, संयुक्त सचिव, कर्मचारी परिषद श्री प्रदीप कुमार यादव, अन्य सदस्य श्री नवीन कुमार सिन्हा, श्री श्रीकांत यादव, श्री संतोष कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारीगण उपस्थित रहे।ALSO READ:एचपीवी टीकाकरण को लेकर बीएचयू में जागरूकता कार्यक्रम, 11 एमबीबीएस छात्रों को लगी वैक्सीन की पहली डोज.