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14 या 15 जनवरी कब पड़ रही मकर संक्रांति, बनारस के ज्‍योतिषियों ने कहा

14 या 15 जनवरी कब पड़ रही मकर संक्रांति, बनारस के ज्‍योतिषियों ने कहा
Jan 08, 2026, 07:23 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : मकार संक्रांति पर्व के दिन को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है. ऐसे में जानने का प्रयास करते हैं कि इस साल सनातनियों का यह पवित्र पर्व कब और कैसे मनाया जाएगा. मकर संक्रांति सूर्य की राशि परिवर्तन से प्रकृति में होने वाली क्रांति का पर्व है. इस दिन सूर्य धनु से मकर राशि में गमन करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं. सूर्य के उत्तरायण होते ही प्रकृति में परिवर्तन आरंभ हो जाता है. दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकाश की अवधि बढ़ने लगती है. साथ ही शीत ऋतु का प्रकोप कम होना आरंभ हो जाता है.


गुरुवार को खिचड़ी


VARANASI GANGA NAHAN KHICDI


प्रकृति की उपासिका भारतीय सनातन संस्कृति इसे पर्व के रूप में मनाती है. इस दिन पवित्र तीर्थों में पावन नदियों में स्नान, दानादि को महती पुण्यदायक बताया गया है. इस बार यह पर्व 15 जनवरी गुरुवार को पड़ रहा है. बीएचयू के ज्योतिष विभाग में प्रोफेसर डा. सुभाष पांडेय ने बताया कि सामान्य तौर पर गुरुवार को लोग खिचड़ी नहीं खाते, किंतु मकर संक्रांति का पर्व ही इस बार गुरुवार को है, जिसमें खिचड़ी का दान व भोजन करना ही महत्वपूर्ण व पुण्य फलदायी बताया गया है. ऐसे में पर्व के दिन गुरुवासरीय वर्जना की महत्ता नहीं रह जाती. लोग खिचड़ी बना सकते हैं, खा सकते हैं तथा दान भी कर सकते हैं. प्रोफेसर सुभाष के अनुसार संयोगवश इसी दिन तिल द्वादशी भी है. मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण द्वादशी को ही भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी.


तिल का उपभोग व दान अत्यंत पुण्यदायी


VARANASI MAK SANKRANTRI


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पर्व पर माघ मास तिल द्वादशी व वृद्धि योग की युति होने से इसका महात्म्य और भी फलदायी बताया जा रहा है. अतएव इस दिन को तिल का उपभोग व दान अत्यंत पुण्यदायी है. मकर संक्रांति पर्व किसी वर्ष पौष तो किसी वर्ष माघ में पड़ता है. माघ स्नान-दान का महत्वपूर्ण मास माना गया है. श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री व काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सनातन धर्म में पर्व-व्रत निर्धारण के लिए ऋषियों द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अनुकूल सूर्य सिद्धांतादि पारंपरिक गणित के आधार पर 14 जनवरी बुधवार की रात 9.39 बजे सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे. धर्मशास्त्रों के अनुसार, सूर्य संक्रांति की घटना अत्यंत सूक्ष्म समय में होती है, अतएव ठीक उसी समय कोई पर्व, स्नानादि नहीं किया जा सकता, ऐसे में हमारे मनीषियों ने पर्वादि उल्लास, उत्सव व स्नान, दान पुण्य के लिए संक्रांति से आठ से 16 घंटे तक की अवधि तय की है. सूर्य संक्रांति या विशेषकर मकर संक्रांति जब रात में होती है तो संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति के समय से 16 घंटे आगे तक रहता है. इस दृष्टि से पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा और दोपहर बाद दोपहर 1.39 बजे तक इसका पुण्यकाल होगा.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में  एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्श
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्श
वाराणसी : प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के तत्वावधान में आज मंगलवार को पंचायत भवन, सलारपुर, वाराणसी में एड्स जागरूकता एवं निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया. शिविर का मुख्य उद्देश्य क्वीयर और ट्रांसजेंडर समुदाय के नेतृत्व में समाज में एचआईवी एवं एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाना, एचआईवी से जुड़े भ्रम एवं भेदभाव को दूर करना तथा लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराना रहा. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आयोजित होने के कारण शिविर में मौसमी बीमारियों तथा बाढ़ के बाद होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श दिए गए.शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम द्वारा लोगों को एचआईवी/एड्स, यौन संचारित संक्रमण, सर्दी-जुकाम, बुखार तथा अन्य मौसमी बीमारियों के साथ-साथ बाढ़ के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, दूषित पानी से होने वाले संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याओं और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूक किया गया. इच्छुक लोगों के लिए स्वैच्छिक एवं गोपनीय एचआईवी जांच, सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण तथा चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई.शिविर में उपलब्ध प्रमुख सेवाएं- एचआईवी/एड्स एवं यौन संचारित संक्रमण के संबंध में जागरूकता- निःशुल्क एवं गोपनीय एचआईवी जांच- सामान्य स्वास्थ्य जांच- मौसमी बीमारियों की जांच एवं उपचार संबंधी परामर्श- बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की जांच एवं चिकित्सकीय मार्गदर्शन- दूषित पानी एवं जलभराव से होने वाले संक्रमणों से बचाव की जानकारी- रक्तचाप एवं वजन की जांच- आंखों की जांच- निःशुल्क दवा का वितरण- स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं मार्गदर्शन- सुरक्षित व्यवहार एवं एचआईवी से बचाव के उपायों की जानकारी- स्वास्थ्य संबंधी सूचना एवं जागरूकता सामग्री का वितरणशिविर में ट्रांसजेंडर एवं क्वीयर समुदाय, महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, किशोर-किशोरियों तथा अन्य समुदायों के लोगों को विशेष रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया. आयोजकों ने कहा कि एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में मौजूद डर, भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करने के लिए जागरूकता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है.शिविर में विशेषज्ञों के रूप में डॉ. संजीव (जनरल फिजिशियन एवं स्वास्थ्य परामर्श एवं मार्गदर्शन), SSPG कबीरचौरा अस्पताल; डॉ. मनीषा राय (परामर्शदाता), सम्पूर्ण सुरक्षा केंद्र, SSPG कबीरचौरा अस्पताल; डॉ. मयंक कुमार (डी.आर. ओ.पी.टी. एवं वरिष्ठ नर्स प्रशिक्षण अधिकारी), माता आनंदमयी अस्पताल; और डॉ. संतोष यादव ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया. प्रिज्मैटिक फाउंडेशन की ओर से अनामिका ने कहा कि एचआईवी एक वायरस है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है. समय पर जांच, चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार के माध्यम से एचआईवी के साथ स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. इसलिए किसी भी व्यक्ति को एचआईवी को लेकर भय या सामाजिक बहिष्कार का सामना नहीं करना चाहिए.ALSO READ : ससुराल में सपरिवार पहुंचे चंद्रमौलीश्वर, बौद्ध परिपथ पर गूंजा हर-हर महादेवरूमान ने कहा कि एड्स का वर्तमान में पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन चिकित्सकीय देखरेख, समय पर जांच और उचित उपचार के माध्यम से एचआईवी के साथ लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. इसलिए जागरूकता, समय पर जांच और सही चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है. नीति ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और समाज में किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. “सबके लिए स्वास्थ्य, समान अधिकार और समान सम्मान” की भावना के साथ संस्था आगे भी ऐसे स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी. स्वास्थ्य शिविर में प्रमुख रूप से नैंसी, इकबाल, आदित्य कृष्णा, टैन, दुर्गा, सोनम, तनु, अनु, सैम, रागिनी, छोटी, शिवानी, प्यूष, बनी सहित दर्जनों क्वीयर और ट्रांस समुदाय के लोग और आस पास के गांव से सैकड़ों लोग शामिल रहे.
ससुराल में सपरिवार पहुंचे चंद्रमौलीश्वर, बौद्ध परिपथ पर गूंजा हर-हर महादेव
ससुराल में सपरिवार पहुंचे चंद्रमौलीश्वर, बौद्ध परिपथ पर गूंजा हर-हर महादेव
वाराणसी : बाबा विश्वनाथ मंगलवार की शाम अपने ससुराल सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर पहुंचे. इस दौरान देवाधिदेव के स्वागत में पूरा क्षेत्र उमड़ पड़ा. चंद्रमौलीश्वर के अलौकिक स्वरूप में सपरिवार महादेव जब सुसज्जित पालकी पर विराजमान होकर बौद्ध परिपथ से निकले तो सनातन की आस्था, जैन परंपरा और बौद्ध संस्कृति एक ही राह पर साथ-साथ चलती दिखाई दी. पालकी में एक ओर महादेव की गोद में प्रथमेश और दूसरी ओर माता पार्वती विराजमान थीं. शंखध्वनि, डमरुओं और शहनाई की गूंज और हर-हर महादेव के जयघोष से सारनाथ का वातावरण भक्तिमय हो उठा.महादेव के ससुराल आगमन पर स्थानीय भक्तों और तीर्थ पुरोहितों ने ऐसा स्वागत किया, जैसे वर्षों बाद घर आए दामाद के स्वागत में पूरा परिवार पलक-पांवड़े बिछा दे. प्रदोष काल में चंद्रमौलीश्वर को झूले पर विराजमान कराया गया और 501 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर उनका सामूहिक महाभिषेक किया गया.51 डमरुओं के निनाद के बीच निकली बाबा की पालकीसारनाथ के गंज क्षेत्र स्थित संकटमोचन मंदिर से दोपहर तीन बजे इस दिव्य यात्रा का शुभारंभ हुआ. इससे पहले शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने चंद्रमौलीश्वर स्वरूप का विधि-विधान से श्रृंगार किया. महाआरती और विशेष पूजन के बाद काशी विश्वनाथ डमरू दल के मोनू बाबा के नेतृत्व में 51 डमरुओं की गूंज के बीच पालकी यात्रा रवाना हुई. पालकी के साथ पुनीत जेतली ‘पागल बाबा’ छत्र लेकर चल रहे थे, जबकि मनोज शर्मा चंवर डुला रहे थे. मार्ग में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पुष्प अर्पित किए और शीश नवाया. सारनाथ पहुंचने पर सामूहिक रुद्राभिषेक पीठम के अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा (एड.)और शिव बारात समिति के महामंत्री दिलीप सिंह और हरीश वालिया ने बाबा की अगवानी की. बाबा की पालकी जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, श्रद्धालुओं की आस्था भी उसके साथ उमड़ती गई.झूले पर विराजे महादेव, 501 पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेकसारंगनाथ मंदिर पहुंचते ही बाबा के ससुरालवासियों ने उनका परंपरागत भाव से स्वागत किया. प्रदोष की बेला में चंद्रमौलीश्वर को झूले पर विराजमान कराया गया. इसके बाद 501 पार्थिव शिवलिंग बनाए गए. पंचतीर्थ और पंचकूप के पवित्र जल में सर्वौषधि मिश्रित कर इन शिवलिंगों का सामूहिक महाभिषेक किया गया. यह दृश्य श्रद्धा और भावुकता से भरा था. एक ओर झूले पर सपरिवार विराजमान चंद्रमौलीश्वर थे तो दूसरी ओर उनके ससुरालवासी भक्तिभाव से अभिषेक में जुटे थे.ALSO READ : आधे घंटे की बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल, कांग्रेस का प्रदर्शनइस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास टेढ़ी नीम से लाई गई नक्काशीदार पालकी रही. चंद्रमौलीश्वर स्वरूप की यह प्रतिमा और पालकी काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की साक्षी है. कुंभ क्षेत्र में भी इस स्वरूप को ले जाने की परंपरा रही है. महाशिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंदिर से निकलने वाली बाबा विश्वनाथ की प्रसिद्ध बारात में भी चंद्रमौलीश्वर स्वरूप विराजमान होते हैं.
आधे घंटे की बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल,  कांग्रेस का प्रदर्शन
आधे घंटे की बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल, कांग्रेस का प्रदर्शन
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंगलवार को हुई बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था और विकास के दावों की पोल खोल दी, महज आधे घंटे की बारिश के बाद शहर के कई इलाकों, गलियों, चौराहों और प्रमुख मार्गों पर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई. काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मुख्य द्वार पर भी भारी जलजमाव देखने को मिला, जिससे मरीजों, छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.इस दौरान महानगर युवा कांग्रेस अध्यक्ष चंचल शर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार है, वाराणसी से प्रधानमंत्री वर्ष 2014 से लगातार सांसद हैं, और शहर को विश्वस्तरीय बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है, कि थोड़ी सी बारिश में ही शहर की सड़कें और चौराहे जलमग्न हो जाते हैं.चंचल शर्मा ने कहा कि “शहर की हर गली, चौराहे और प्रमुख मार्ग पर जलजमाव की स्थिति दिखाई दे रही है, यह नगर निगम और भाजपा सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रहा है, जब महज आधे घंटे की बारिश में यह हाल हो जाता है, तो बड़े-बड़े विकास के दावों की वास्तविकता खुद सामने आ जाती है.उन्होंने कहा कि BHU का मुख्य द्वार अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज, छात्र-छात्राएं, उनके परिजन और आम नागरिक आवागमन करते हैं, ऐसे स्थान पर जलजमाव होना, नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, उन्होंने सरकार और नगर निगम से मांग की कि शहर की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्थायी और प्रभावी कदम उठाए जाएं.ALSO READ : वाराणसी में डंपर की टक्‍कर से बाइक सवार युवती की मौत, पिता गंभीर रूप से घायलयुवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनता को कागजों और विज्ञापनों में विकास नहीं, बल्कि जमीन पर बेहतर सड़क, साफ-सफाई और सुचारु जलनिकासी व्यवस्था चाहिए.वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण शहर में हर बारिश के बाद जलजमाव की समस्या का सामने आना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.इस अवसर पर महानगर युवा कांग्रेस अध्यक्ष चंचल शर्मा, कैंट विधानसभा अध्यक्ष युवा कांग्रेस धीरज सोनकर, महानगर महासचिव युवा कांग्रेस आयुष पटेल, महानगर उपाध्यक्ष युवा कांग्रेस आस्तोष श्रीवास्तव सहित अन्य युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे.