बीएचयू स्विमिंग पूल में सीपीआर पर कार्यशाला, दिए सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान

वाराणसी: बीएचयू क्रीड़ा परिषद् द्वारा विश्वविद्यालय स्थित स्विमिंग पूल में “सीपीआर एवं आपातकालीन परिस्थितियाँ” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् एवं स्विमिंग पूल के कर्मचारियों के को पुनः सुदृढ़ करना था, ताकि वे किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में प्रभावी एवं आत्मविश्वास के साथ त्वरित कार्रवाई कर सकें.
कार्यशाला में प्रो. अर्चना सिंह, उपाध्यक्ष, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद्, बीएचयू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं. विशेषज्ञ दल में प्रो. राजेश मीना, प्रोफेसर इंचार्ज, स्किल सेंटर, ट्रॉमा सेंटर, बीएचयू; डॉ. कविता मीना, विभागाध्यक्ष/विशेषज्ञ, एनेस्थीसियोलॉजी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, बीएचयू तथा नर्सिंग स्टाफ श्री प्रमोद सोनी एवं श्री बजरंग शामिल रहे.
इस अवसर पर विशेषज्ञ दल द्वारा सरपीआर एवं आपातकालीन प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया. प्रतिभागियों को अपने पूर्व ज्ञान को पुनः सुदृढ़ करने तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में व्यावहारिक कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिला. प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद एवं अभ्यास के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की प्रक्रियाओं को समझा.

विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के महासचिव प्रो. ए. के. नेमा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यशाला के साथ विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् के नवीन खेल सत्र 2026 के खेल कैलेंडर की औपचारिक शुरुआत हो रही है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है और भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ इस प्रकार की कार्यशालाओं, सेमिनारों एवं खेल आयोजनों का निरंतर आयोजन किया जाएगा.
कार्यशाला के उद्देश्यों एवं संक्षिप्त रूपरेखा की जानकारी डॉ. कविता वर्मा, सचिव एवं उप निदेशक, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् ने प्रस्तुत की. उन्होंने विशेष रूप से स्विमिंग पूल जैसे संवेदनशील वातावरण में सीपीआर, प्राथमिक उपचार एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के नियमित प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला.
कार्यक्रम का मंच संचालन एवं संचालन संबंधी समस्त गतिविधियों का समन्वय डॉ. प्रियंका यादव, सहायक निदेशक, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् द्वारा किया गया. मुख्य अतिथि प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि आकस्मिक परिस्थितियों में सीपीआर एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया का ज्ञान जीवन बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

उन्होंने कहा कि आपातकालीन प्रक्रियाओं का ज्ञान कर्मचारियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें समय पर उचित निर्णय लेने एवं आवश्यक कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में प्रत्येक सेकंड महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने कर्मचारियों की तत्परता एवं दक्षता बनाए रखने के लिए नियमित मॉक ड्रिल एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाने पर भी जोर दिया.
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कार्यशाला के समापन अवसर पर डॉ. राजीव कुमार सिंह, उप निदेशक, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् ने धन्यवाद ज्ञापित किया. उन्होंने मुख्य अतिथि, विशेषज्ञ वक्ताओं, नर्सिंग स्टाफ, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला के सफल आयोजन में उनके योगदान की सराहना की. यह कार्यशाला विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् एवं बीएचयू स्विमिंग पूल से जुड़े कर्मचारियों की आपातकालीन तैयारी, सुरक्षा जागरूकता एवं त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही.



