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बीएचयू स्विमिंग पूल में सीपीआर पर कार्यशाला, दिए सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान

बीएचयू स्विमिंग पूल में सीपीआर पर कार्यशाला, दिए सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान
Aug 21, 2026, 08:18 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी: बीएचयू क्रीड़ा परिषद् द्वारा विश्‍वविद्यालय स्थित स्विमिंग पूल में “सीपीआर एवं आपातकालीन परिस्थितियाँ” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् एवं स्विमिंग पूल के कर्मचारियों के को पुनः सुदृढ़ करना था, ताकि वे किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में प्रभावी एवं आत्मविश्वास के साथ त्वरित कार्रवाई कर सकें.


कार्यशाला में प्रो. अर्चना सिंह, उपाध्यक्ष, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद्, बीएचयू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं. विशेषज्ञ दल में प्रो. राजेश मीना, प्रोफेसर इंचार्ज, स्किल सेंटर, ट्रॉमा सेंटर, बीएचयू; डॉ. कविता मीना, विभागाध्यक्ष/विशेषज्ञ, एनेस्थीसियोलॉजी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, बीएचयू तथा नर्सिंग स्टाफ श्री प्रमोद सोनी एवं श्री बजरंग शामिल रहे.


इस अवसर पर विशेषज्ञ दल द्वारा सरपीआर एवं आपातकालीन प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया. प्रतिभागियों को अपने पूर्व ज्ञान को पुनः सुदृढ़ करने तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में व्यावहारिक कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिला. प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद एवं अभ्यास के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की प्रक्रियाओं को समझा.


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विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के महासचिव प्रो. ए. के. नेमा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यशाला के साथ विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् के नवीन खेल सत्र 2026 के खेल कैलेंडर की औपचारिक शुरुआत हो रही है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है और भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ इस प्रकार की कार्यशालाओं, सेमिनारों एवं खेल आयोजनों का निरंतर आयोजन किया जाएगा.


कार्यशाला के उद्देश्यों एवं संक्षिप्त रूपरेखा की जानकारी डॉ. कविता वर्मा, सचिव एवं उप निदेशक, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् ने प्रस्तुत की. उन्होंने विशेष रूप से स्विमिंग पूल जैसे संवेदनशील वातावरण में सीपीआर, प्राथमिक उपचार एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के नियमित प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला.


कार्यक्रम का मंच संचालन एवं संचालन संबंधी समस्त गतिविधियों का समन्वय डॉ. प्रियंका यादव, सहायक निदेशक, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् द्वारा किया गया. मुख्य अतिथि प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि आकस्मिक परिस्थितियों में सीपीआर एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया का ज्ञान जीवन बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.


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उन्होंने कहा कि आपातकालीन प्रक्रियाओं का ज्ञान कर्मचारियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें समय पर उचित निर्णय लेने एवं आवश्यक कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में प्रत्येक सेकंड महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने कर्मचारियों की तत्परता एवं दक्षता बनाए रखने के लिए नियमित मॉक ड्रिल एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाने पर भी जोर दिया.


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कार्यशाला के समापन अवसर पर डॉ. राजीव कुमार सिंह, उप निदेशक, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् ने धन्यवाद ज्ञापित किया. उन्होंने मुख्य अतिथि, विशेषज्ञ वक्ताओं, नर्सिंग स्टाफ, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला के सफल आयोजन में उनके योगदान की सराहना की. यह कार्यशाला विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद् एवं बीएचयू स्विमिंग पूल से जुड़े कर्मचारियों की आपातकालीन तैयारी, सुरक्षा जागरूकता एवं त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही.

जन्‍मदिन के अगले दिन बुझ गया घर का चिराग, जनरल स्टोर में हुए विस्फोट से घायल मासूम की हुई मौत
जन्‍मदिन के अगले दिन बुझ गया घर का चिराग, जनरल स्टोर में हुए विस्फोट से घायल मासूम की हुई मौत
वाराणसी : कपसेठी बाजार में शनिवार को एक जनरल स्टोर में रखे पटाखों में अचानक विस्फोट से घायल पांच साल के मासूम कार्तिक जायसवाल की मौत हो गई. विस्फोट इतना जबरदस्‍त रहा कि बारजा ढह गया. दुकान के दरवाजे, खिड़की और दीवार की रेलिंग टूट गई. बाजार से लगभग 200 मीटर दूर तक धमाके से ग्रामीण दहल गए. मासूम घर का इकलौता चिराग था.भदवर स्थित हेरिटेज मेडिकल कॉलेज से बच्चे के शव को पुलिस ने पंचायतनामा के बाद परिजनों को सौंप दिया. सूचना के बाद गोमती जोन के अधिकारियों ने घटना की जानकारी ली. कार्तिक माता-पिता का इकलौता बेटा था. शुक्रवार को कार्तिक का पांचवां जन्मदिन था. ननिहाल से कार्तिक रात में ही घर लौटा था. खिलौने आदि भी ननिहाल से उपहार में कार्तिक को मिले थे. खिलौने लेकर वह तीसरी मंजिल पर गया था. अचानक फुलझड़ी जलाने के दौरान ही तेज धमाका हो गया. इकलौते बेटे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया. पिता आशीष और मां का रो-रोकर हाल खराब हो गया.कपसेठी थाना क्षेत्र के स्थानीय बाजार में आशीष जायसवाल का मकान है. मकान में ही जायसवाल जनरल स्टोर संचालित है. सुबह लगभग 8 बजे के बाद आशीष का बेटा कार्तिक जायसवाल खेलते हुए तीसरी मंजिल की दुकान पर जा पहुंचा. इस बीच वह फुलझड़ी जलाने का प्रयास कर रहा था कि अचानक एक बोरे में तेज धमाका हो गया. धमाके की गूंज से मकान समेत बाजार दहल उठा. तीसरे तल के आगे का बारजा ढह गया. दुकान की रेलिंग, खिड़की-दरवाजे भी क्षतिग्रस्त हो गए.ALSO READ : एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...कार्तिक जायसवाल लहूलुहान होकर अचेत हो गया. परिजन तुरंत उसे लेकर कपसेठी चौराहे स्थित शर्मा क्लिनिक पर गए, जहां हालत गंभीर होता देख चिकित्सकों ने हेरिटेज अस्पताल में रेफर किया. उपचार के दौरान मौत हो गई. वहीं, स्थानीय लोगों को कहना है कि एक माह बाद ही दशहरा और दिवाली है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पटाखों का अवैध भंडारण किया जा रहा है.
एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...
एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...
वाराणसी: बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए मिले मुआवजे की रकम पर साइबर ठगों के सेंध लगाने का मामला सामने आया है. फूलपुर थाना क्षेत्र के मंगारी गांव निवासी अंजू देवी के संयुक्त बैंक खाते से ठगों ने एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख रुपये उड़ा लिए. मामले में साइबर क्राइम पुलिस थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस जांच में जुट गई है.अंजू देवी ने पुलिस को बताया कि उनका और उनके पति मनोज पटेल का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में संयुक्त बचत खाता है. इसी खाते में बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार के मुआवजे के रूप में 9.03 लाख रुपये आए थे. 20 अगस्त से 31 अगस्त के बीच उनके संयुक्त खाते से अलग-अलग माध्यमों से 6,51,783 रुपये निकल गए.इसके अलावा बैंक की मंगारी शाखा स्थित एक अन्य खाते से भी 13 हजार रुपये निकाल लिए गए. कुल 6,64,783 रुपये की साइबर ठगी हुई. पीड़िता के मुताबिक, उनके वाट्सएप पर एक मोबाइल नंबर से एपीके फाइल भेजी गई थी. फाइल पर क्लिक करते ही साइबर अपराधियों ने मोबाइल और खाते से संबंधित जानकारी तक पहुंच हासिल कर ली. इसके बाद खाते से रकम निकलती चली गई. खाते से रकम कटने की जानकारी होने पर पीड़िता ने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की.ALSO READ: दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धिसाइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह ने बताया कि मामले की जांच निरीक्षक ओम प्रकाश सरोज को सौंपी गई है. पुलिस लेनदेन से जुड़े विवरण और एपीके फाइल भेजने वाले मोबाइल नंबर की जांच कर रही है. पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की है. थाना प्रभारी ने कहा कि वाट्सएप या एसएमएस पर अनजान नंबरों से आने वाली किसी भी एपीके फाइल पर क्लिक न करें. संदिग्ध लिंक खोलने से भी बचें. ऐसी फाइलें मोबाइल में सेंध लगाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकती हैं. साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं.
पितृपक्ष 27 सितंबर से, इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा
पितृपक्ष 27 सितंबर से, इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा
वाराणसी : इस वर्ष पितृपक्ष का आरंभ 27 सितंबर से होगा और यह 10 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. यानी पितरों की कृपा पाने का पक्ष इस बार 14 दिनों का होगा. साथ ही षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण पितृपक्ष की अवधि कम हो रही है. जिनके पिता की मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई है, वे 26 सितंबर को पितृ श्राद्ध करेंगे. ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी. 2 अक्टूबर को षष्ठी और सप्तमी तिथि एक साथ आने के कारण पितृपक्ष की अवधि में कमी आ रही है. जिनके पिता की मृत्यु शस्त्र या विष से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाता है.वहीं, जिनके पिता की स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई हो, वे द्वादशी तिथि को श्राद्ध करेंगे. माता की मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो, उनका श्राद्ध नवमी (मातृ नवमी) को करना चाहिए. इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर को है. पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं को अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का अवसर मिलता है. यह समय परिवार के सदस्यों के लिए एकत्रित होने और अपने पूर्वजों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करने का होता है. पितृपक्ष के दौरान किए गए अनुष्ठान से पितरों की कृपा प्राप्त करने की मान्यता है. इस समय श्रद्धालु अपने पितरों के लिए विशेष भोजन तैयार करते हैं और उन्हें अर्पित करते हैं. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.आनलाइन पिंडदान के लिए कर रहे संपर्कपितृपक्ष पर काशी में ई-पिंडदान कराने के लिए कर्मकांडी ब्राह्मण पैकेज दे रहे हैं. विदेशों में बैठे आस्थावानों ने अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए इन पुरोहितों से संपर्क करना शुरू कर दिया हैं. ब्राह्मणों ने सोशल मीडिया पर इसका प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया है. बता दें कि पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए व्यक्तिगत रूप से आने में असमर्थ आस्थावान आनलाइन अनुष्ठान कराते हैं. हाल ही में रूस की महिला ने अपने पिता और भाई का आनलाइन पिंडदान कराया था.ALSO READ : दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि