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नौकरी के नाम पर वाराणसी में युवाओं को बना रहे साइबर स्लेव, ठगी की देतें हैं ट्रनिंग...

नौकरी के नाम पर वाराणसी में युवाओं को बना रहे साइबर स्लेव,  ठगी की देतें हैं ट्रनिंग...
Jul 10, 2026, 09:32 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसीः आप सही पढ़ रहे हैं, यहां बात उसी स्लेव की हो रही जिसका अर्थ होता है गुलाम, दास, या सेवक. डिजिटल हो रही दुनिया में साइबर अपराध का यह नया रूप है. साइबर ठगी का हब बन रहे बनारस में यह अपराध खूब हो रहा है. युवक-युवतियों को नौकरी का लालच देकर यहां बुलाया जाता है और उन्हें बंधक बनाकर उनसे साइबर अपराध कराया जा रहा है. रोहनिया में पकड़े गए साइबर ठगों के गिरोह ने भी युवक-युवतियों को साइबर स्लैव बनाया था और उनका इस्तेमाल साइबर ठगी में कर रहे थे. साइबर स्लेव या साइबर गुलामी आधुनिक मानव तस्करी का एक खतरनाक रूप है, इसमें युवक-युवतियों को अच्छी नौकरी का लालच देकर बुलाया जाता है. उनके दस्तावेज छीन कर कब्‍जे में लिए जाते हैं और उन्हें बंधक बनाकर जबरन आनलाइन स्कैम और डिजिटल धोखाधड़ी करवाई जाती है.


फंसाने के लिए करते हैं सोशल मीडिया का उपयोग


साइबर अपराध करने वालों के निशाने पर बेरोजगर युवक-युवतियां होते हैं. उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं. एक कंपनी बनाकर टेलीग्राम, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से नौकरी देने का लालच देते हैं. नौकरी का पैकेज इस तरह का बताते है कि युवक-युवतियां उसकी लालच में आ ही जाते हैं. उन्हें वाराणसी बुलाया जाता है और उनके आने पर उनसे रुपयों की वसूली शुरू की जाती है. सबसे पहले उन्हें महंगे दाम में एक साधारण सा प्रोडक्ट दिया जाता है. इसके बाद उनके रहने और खाने के नाम पर मोटी रकम ली जाती है. युवक-युवती से जब 40-50 हजार रुपये ले लिया जाता है तो वह ठगों को बातों को मानने के लिए मजबूर हो जाते हैं. अपने रुपये वापस और कुछ कमाई करने के लिए वह सबकुछ करने को तैयार होते हैं जो ठग उनसे कहते हैं.


शुरू होता है प्रताड़ना का दौर


ठग युवक-युवतियों को अपने जाल में फंसाकर बंधक बना लेते हैं. उन्हें छोटे-छोटे कमरों में रखा जाता है. खाने के लिए भी बहुत कुछ नहीं दिया जाता है. उन्हें मजबूर किया जाता है कि जिस तरह वह आनलाइन कंपनी के संपर्क में आए वैसे ही वो दूसरे लोगों को अपने जाल में फंसाकर ले आएं. जितने लोगों को फंसाकर लाएगा उनसे मिलने वाले रुपयों में से कमीशन दिया जाएगा. मजबूर युवक-युवती नारकीय जीवन जीते हुए साइबर स्लेव (गुलाम बनकर) ठगों के इशारे पर काम करने लगते हैं. कई बार प्रताड़ना का स्तर इतना अधिक हो जाता है प्रताड़ित होने वाला कई बार आत्‍मघाती कदम उठाने की सोचना लगता है.


सरकार जारी कर रही चेतावनी


साइबर स्लेवरी के खतरे को सरकार समझ रही है. उसे पता है कि बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया या फर्जी वेबसाइट्स के माध्यम से जाल में फंसाया जा रहा है. इससे बचाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल जारी किया है.


कई बार पकड़े गए साइबर ठग गिरोह


रोहनिया के औढ़े गांव से पहले भी बनारस में साइबर स्लेव बनाने वाले ठगों के गिरोह पकड़े गए हैं. रोहनिया के लठिया में एकं फर्जी कंपनी ने पांच सौ युवक-युवतियों को बंधक बनाया था. उन्हें ट्रेनिंग के नाम पर साइबर जालसाजी सिखाई जाती और कमरों में बंद रखा जाता था. उनसे परिचितों व दोस्तों की लिस्ट बनवाई जाती थी. उन्हें बुलाकर कंपनी में ज्वाइन कराने के लिए दबाव बनाया जाता था. बीते मई माह में कुछ युवक साइबर ठगों के चंगुल से बचकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे थे. तब जाकर कंपनी के काले कारनामों का पता चला था. बीते अप्रैल माह में साइबर पुलिस ने ठगों के गिरोह का राजफाश किया था.



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सारनाथ के नई बाजार में युवक-युवतियों को बंधक बना कर उनसे ठगी कराते थे. डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार को शिकायत मिली थी कि नई बाजार पतेरवा में कुछ लोग कंपनी बनाकर उनकी आड़ में युवाओं को बंधक बनाकर ठगी कर रहे हैं. गाजीपुर के भीमापार (सैदपुर) के श्रवण कुमार, आजमगढ़ के नेवादा (फूलपुर) के मो. तैयब, मध्यप्रदेश में छतरपुर के भदौरा (बभनौरा) के जितेंद्र सिंह ठाकुर, बिहार में बेगूसराय के श्रीचांदपुर (साहेबपुर कमाल) के शुभम कुमार सिंह, पटना में राजीव नगर कालोनी (राजीव नगर के मनीष कुमार सिंह, झारखंड में धनबाद के राजगंज निवासी आशुतोष कुमार हैं को गिरफ्तार करके 150 युवकों को मुक्त कराया गया था.

वाराणसी में 11 वर्षीय बालिका से छेड़छाड़ का आरोप, सेना के कर्मचारी पर केस,मासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ मुकदमा ...
वाराणसी में 11 वर्षीय बालिका से छेड़छाड़ का आरोप, सेना के कर्मचारी पर केस,मासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ मुकदमा ...
वाराणसीःमासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में कैंट थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी.परिजनों ने पुलिस को बताया कि 11 साल की बच्ची दूध लेने के लिए घर से बाहर गई थी. इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले सेना के हवालदार ने उसे अपने कमरे में बुलाया. कमरे के अंदर उसने बच्ची के साथ गलत हरकत शुरू कर दिया. घटना के बाद बच्ची वहां से अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी बात बताई. बच्ची की बात सुनकर परिवार के लोग परेशान हो गए.उन्होंने मामले की जानकारी कैंट थाना पुलिस को दी और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया. पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. बच्ची और उसके परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है.ALSO READ:ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रसाथ ही पुलिस आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी साक्ष्य जुटा रही है. जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस और परिवार की ओर से बच्ची की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है.आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बनारस में नदी में होगी जलयानों की मरम्मत....
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वाराणसीः इनलैंड वाटरवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने रामनगर में बंदरगाह के उत्तरी छोर पर चार बीघा क्षेत्र में बनने वाले शिप रिपेयरिंग सेन्टर की शुरुआत की है. इसके साथ ही वाराणसी देश का पहला शहर होगा जहां नदी में जलयानों की मरम्मयत की जाएगी.कार्यदायी संस्था लार्सन एन्ड टुब्रो जिओ स्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है. यहां जहाजों को रिपेयर करने के लिए उत्त्तरी छोर पर एक वाटर चैनल बनाया जाएगा जहा जहाज नदी की मुख्य धारा से अंदर चैनल में रिपेयर होने के लिए आएंगे.कार्यदायी संस्था फिलहाल रिपेयर फैसिलिटी के प्लेटफार्म को बनाने का काम कर रही है उनके मुख्य अभियंता रमेश जोशी ने बताया कि प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करना है. बताया कि बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के लिए जल्दी ही काम शुरू करना पड़ा.ALSO READ: ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रइस बाबत उन्होंने बताया कि देश मे किसी भी नदी पर बनने वाला यह पहला शिप रिपेयरिंग सेंटर है. यहां कुछ जहाजों को क्रेन के माध्यम से ड्राई डाक सूखी सतह पर लाकर रिपेयर करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही जहाज में पानी की सतह से ऊपर की खराबी को नदी में ही ठीक कर दिया जाएगा.बताया रि देश मे अभी तक शिप रिपेयरिंग सेन्टर समुद्रों के किनारे ही बनाये जाते है देश मे किसी नदी के ऊपर पहली बार शिप रिपेयरिंग सेन्टर बन रहा है. पहले जहाजों को रिपेयरिंग के लिए कोलकाता जाना होता था जो अब बनारस में भी संभव है.
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।