नौकरी के नाम पर वाराणसी में युवाओं को बना रहे साइबर स्लेव, ठगी की देतें हैं ट्रनिंग...

वाराणसीः आप सही पढ़ रहे हैं, यहां बात उसी स्लेव की हो रही जिसका अर्थ होता है गुलाम, दास, या सेवक. डिजिटल हो रही दुनिया में साइबर अपराध का यह नया रूप है. साइबर ठगी का हब बन रहे बनारस में यह अपराध खूब हो रहा है. युवक-युवतियों को नौकरी का लालच देकर यहां बुलाया जाता है और उन्हें बंधक बनाकर उनसे साइबर अपराध कराया जा रहा है. रोहनिया में पकड़े गए साइबर ठगों के गिरोह ने भी युवक-युवतियों को साइबर स्लैव बनाया था और उनका इस्तेमाल साइबर ठगी में कर रहे थे. साइबर स्लेव या साइबर गुलामी आधुनिक मानव तस्करी का एक खतरनाक रूप है, इसमें युवक-युवतियों को अच्छी नौकरी का लालच देकर बुलाया जाता है. उनके दस्तावेज छीन कर कब्जे में लिए जाते हैं और उन्हें बंधक बनाकर जबरन आनलाइन स्कैम और डिजिटल धोखाधड़ी करवाई जाती है.
फंसाने के लिए करते हैं सोशल मीडिया का उपयोग
साइबर अपराध करने वालों के निशाने पर बेरोजगर युवक-युवतियां होते हैं. उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं. एक कंपनी बनाकर टेलीग्राम, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से नौकरी देने का लालच देते हैं. नौकरी का पैकेज इस तरह का बताते है कि युवक-युवतियां उसकी लालच में आ ही जाते हैं. उन्हें वाराणसी बुलाया जाता है और उनके आने पर उनसे रुपयों की वसूली शुरू की जाती है. सबसे पहले उन्हें महंगे दाम में एक साधारण सा प्रोडक्ट दिया जाता है. इसके बाद उनके रहने और खाने के नाम पर मोटी रकम ली जाती है. युवक-युवती से जब 40-50 हजार रुपये ले लिया जाता है तो वह ठगों को बातों को मानने के लिए मजबूर हो जाते हैं. अपने रुपये वापस और कुछ कमाई करने के लिए वह सबकुछ करने को तैयार होते हैं जो ठग उनसे कहते हैं.
शुरू होता है प्रताड़ना का दौर
ठग युवक-युवतियों को अपने जाल में फंसाकर बंधक बना लेते हैं. उन्हें छोटे-छोटे कमरों में रखा जाता है. खाने के लिए भी बहुत कुछ नहीं दिया जाता है. उन्हें मजबूर किया जाता है कि जिस तरह वह आनलाइन कंपनी के संपर्क में आए वैसे ही वो दूसरे लोगों को अपने जाल में फंसाकर ले आएं. जितने लोगों को फंसाकर लाएगा उनसे मिलने वाले रुपयों में से कमीशन दिया जाएगा. मजबूर युवक-युवती नारकीय जीवन जीते हुए साइबर स्लेव (गुलाम बनकर) ठगों के इशारे पर काम करने लगते हैं. कई बार प्रताड़ना का स्तर इतना अधिक हो जाता है प्रताड़ित होने वाला कई बार आत्मघाती कदम उठाने की सोचना लगता है.
सरकार जारी कर रही चेतावनी
साइबर स्लेवरी के खतरे को सरकार समझ रही है. उसे पता है कि बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया या फर्जी वेबसाइट्स के माध्यम से जाल में फंसाया जा रहा है. इससे बचाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल जारी किया है.
कई बार पकड़े गए साइबर ठग गिरोह
रोहनिया के औढ़े गांव से पहले भी बनारस में साइबर स्लेव बनाने वाले ठगों के गिरोह पकड़े गए हैं. रोहनिया के लठिया में एकं फर्जी कंपनी ने पांच सौ युवक-युवतियों को बंधक बनाया था. उन्हें ट्रेनिंग के नाम पर साइबर जालसाजी सिखाई जाती और कमरों में बंद रखा जाता था. उनसे परिचितों व दोस्तों की लिस्ट बनवाई जाती थी. उन्हें बुलाकर कंपनी में ज्वाइन कराने के लिए दबाव बनाया जाता था. बीते मई माह में कुछ युवक साइबर ठगों के चंगुल से बचकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे थे. तब जाकर कंपनी के काले कारनामों का पता चला था. बीते अप्रैल माह में साइबर पुलिस ने ठगों के गिरोह का राजफाश किया था.
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सारनाथ के नई बाजार में युवक-युवतियों को बंधक बना कर उनसे ठगी कराते थे. डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार को शिकायत मिली थी कि नई बाजार पतेरवा में कुछ लोग कंपनी बनाकर उनकी आड़ में युवाओं को बंधक बनाकर ठगी कर रहे हैं. गाजीपुर के भीमापार (सैदपुर) के श्रवण कुमार, आजमगढ़ के नेवादा (फूलपुर) के मो. तैयब, मध्यप्रदेश में छतरपुर के भदौरा (बभनौरा) के जितेंद्र सिंह ठाकुर, बिहार में बेगूसराय के श्रीचांदपुर (साहेबपुर कमाल) के शुभम कुमार सिंह, पटना में राजीव नगर कालोनी (राजीव नगर के मनीष कुमार सिंह, झारखंड में धनबाद के राजगंज निवासी आशुतोष कुमार हैं को गिरफ्तार करके 150 युवकों को मुक्त कराया गया था.



