जीरो-एमिशन टेक्नोलॉजी, वाराणसी में शुरू हुआ देश का पहला स्वदेशी हाइड्रोजन पोत...

वाराणसी: भारत ने हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. देश का पहला स्वदेशी हाइड्रोजन चालित पोत (Hydrogen Vessel) अब वाराणसी में परिचालन शुरू कर चुका है. यह पहल भारत को जीरो-एमिशन परिवहन प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी नई मजबूती प्रदान करेगी.
केंद्र सरकार के ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (Green Tug Transition Programme) के तहत पारंपरिक डीजल चालित टग बोट्स को चरणबद्ध तरीके से जीरो-एमिशन विकल्पों से प्रतिस्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंदरगाहों और जल परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना तथा स्वच्छ ऊर्जा आधारित तकनीकों को बढ़ावा देना है.
इसी क्रम में सरकार ने वर्ष 2030 तक 800 से अधिक जीरो-एमिशन ट्रकों को तैनात करने की भी योजना बनाई है. इन ट्रकों के संचालन से डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी और बंदरगाहों से जुड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकेगा.
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विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित परिवहन तकनीक भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभाएगी. वाराणसी में स्वदेशी हाइड्रोजन पोत का संचालन भारत की आत्मनिर्भरता, नवाचार और हरित विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है.
यह पहल न केवल देश के जल परिवहन क्षेत्र में नई क्रांति लाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में भी स्थापित करने में मदद करेगी.



