इस सेंट्रल जेल में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू, अब रिहाई करना हुआ आसान

E-office system implemented in this central jail, now release has become easier
Varanasi News: उत्तर-प्रदेश के वाराणसी जिले की सेंट्रल जेल में प्रशासनिक कार्यों की रफ्तार के लिए ई-ऑफिस व्यवस्था लागू कर दी गई है. इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद सरकारी दस्तावेजों, प्रशासनिक आदेश और बंदियों से जुड़े कई मामलों का निस्तारण पहले की तुलना में अब और भी पारदर्शिता तरीके से हो सकेगा, जिसके लिए ऑनलाइन माध्यम जैसी सुविधा दी गई है, इसके जरिए अब अधिकारी इस डिजिटली सुविधा की मदद से अपने कार्य को और भी तेजी के साथ निपटा सकेंगे. इतना ही नहीं, इस डिजिटल माध्यम के जरिए किसी भी दस्तावेजों को तुरंत देखा जा सकता है.

जेल प्रशासन को मिली डिजिटल की सुविधा
बता दें, इस डिजिटली माध्यम की सुविधा से पहले जेल प्रशासन को किसी भी सरकारी आदेश, निर्देश या पत्र के लिए पारंपरिक डाक व्यवस्था या कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें कई बार आदेशों के पहुंचने और उस पर कार्रवाई होने में अनावश्यक देरी हो जाती थी, विशेष रूप से बंदियों की रिहाई से जुड़े आदेशों में विलंब होने से परेशानी उत्पन्न होती थी. मगर अब उन्हें इन सभी झंझटों से हटकर इस आसान सुविधा का लाभ मिल सका है. जिसका सहीं तरीके से लाभ उठाना चाहिए. ताकि किसी भी कठिन से कठिन काम को आसानी से निपटा सकें.

ऑनलाइन माध्यम बना ई-ऑफिस प्रणाली
जानकारी के मुताबिक, ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने के बाद सभी आवश्यक दस्तावेज और आदेश ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध रहेंगे, जहां, अधिकारी एक क्लिक पर संबंधित फाइलों को देख सकेंगे और तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर पाएंगे. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी बनेगी. इस मामले को मद्देनजर रखते हुए सेंट्रल जेल के अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने बताया कि इस डिजिटल व्यवस्था से रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और दस्तावेजों की निगरानी करना आसान होगा, साथ ही कई कार्यों की ऑनलाइन ट्रैकिंग भी संभव हो सकेगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में वृद्धि होगी. इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से बंदियों से जुड़े मामलों, विशेषकर रिहाई से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और समय पर निर्णय लिया जा सकेगा.
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वहीं, इस मामले में जेल प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन भी समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा, यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो भविष्य में अन्य जेलों के लिए भी उदाहरण बन सकता है.




