9 वर्षीय वसुधा भट्टराई ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, बीएचयू कुलपति ने किया सम्मानित...

वाराणसी. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वेद विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नारायण प्रसाद भट्टराई की 9 वर्षीय पुत्री वसुधा भट्टराई ने अपनी असाधारण प्रतिभा से वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया में स्थान बनाकर विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन किया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने कार्यालय में वसुधा से मुलाकात कर उन्हें स्मृति-चिह्न एवं सम्मान-पत्र प्रदान करते हुए प्रोत्साहित किया।
वसुधा को यह सम्मान पाणिनी अष्टाध्यायी के लगभग चार हजार सूत्रों (सवार्तिक सहित) का कंठस्थ पाठ और प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण करने के लिए मिला है। इसके साथ ही जीनियस फाउंडेशन ने भी उन्हें देश की 50 चयनित भारतीय प्रतिभाओं में शामिल कर सम्मानित किया है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्कृत भाषा एवं शास्त्रों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में पाणिनी अष्टाध्यायी जैसे विश्वविख्यात व्याकरण ग्रंथ का कंठस्थ अध्ययन असाधारण प्रतिभा, अनुशासन, समर्पण और निरंतर साधना का परिचायक है। उन्होंने कहा कि वसुधा की यह उपलब्धि केवल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
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वर्तमान में 9 वर्षीय वसुधा वाराणसी के तुलसी विद्या निकेतन स्कूल में कक्षा तीन की छात्रा हैं। उन्होंने पाणिनी अष्टाध्यायी के करीब चार हजार सूत्रों का सवार्तिक सहित कंठस्थ अध्ययन कर यह अनूठी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में उन्हें इस उपलब्धि के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया से सम्मानित किया गया, जबकि जीनियस फाउंडेशन ने भी उन्हें देश की चुनिंदा 50 प्रतिभाओं में स्थान देकर सम्मानित किया।
इस दौरान वसुधा के पिता एवं बीएचयू के वेद विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नारायण प्रसाद भट्टराई भी मौजूद रहे। उनकी पुत्री की इस उपलब्धि को भारतीय संस्कृति, संस्कृत अध्ययन और वैदिक परंपरा के क्षेत्र में नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी माना जा रहा है।



