यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवक के पैन कार्ड से खोला करेंट एकाउंट, 25 करोड़ का किया हेरफेर

वाराणसी : यूपीएससी की तैयारी कर रहे एक युवक के बैंक खाते से कथित तौर पर साइबर ठगों द्वारा 25 करोड़ रुपये का लोन निकालने का मामला सामने आया है. आरोप है कि ठगों ने छात्र के पैन कार्ड का दुरुपयोग करते हुए उसके सेविंग अकाउंट को करंट अकाउंट में बदल दिया और फर्जी फर्म के नाम पर भारी रकम का निगेटिव लियन (लोन) दिखा दिया. मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
पीड़ित अनुराग मिश्रा ने बताया कि वह लखनऊ में रहकर प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करता है. जनवरी 2026 में वह नई दिल्ली में था कि तभी 17 जनवरी को करोल बाग स्थित लाइब्रेरी में गूगल पे से 3500 रुपये का भुगतान करने के दौरान बार-बार पेमेंट फेल हो रहा था. जब उसने मोबाइल बैंकिंग के जरिए अपना खाता चेक किया तो खाते में 25,59,15,000 रुपये का निगेटिव लियन दिखने लगा.
अनुराग के अनुसार, उन्होंने तुरंत आईसीआईसीआई बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया. बैंक की ओर से उन्हें नजदीकी शाखा जाने की सलाह दी गई. 19 जनवरी को वह हजरतगंज स्थित बैंक शाखा पहुंचे, जहां से उन्हें जीएसटी कार्यालय भेजा गया. जीएसटी अधिकारियों ने जांच के दौरान बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर वाराणसी की बैंक शाखा में एक करंट अकाउंट खुलवाया और ‘उत्तरा इंटरप्राइजेज’ नामक फर्जी कंपनी दिखाकर भारी रकम का लोन लिया. बताया गया कि यह कंपनी सारनाथ रोड स्थित अशोक विहार कॉलोनी के पते पर रजिस्टर्ड दिखाई गई है.
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इस मामले की जानकारी मिलने के बाद अनुराग ने अपने परिजनों को सूचना दी. इसके बाद उनके पिता कमलेश कुमार ने 13 फरवरी को साइबर क्राइम थाना वाराणसी में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया. शिकायत में कहा गया है कि अनुराग ने न तो कोई कंपनी बनाई और न ही करंट अकाउंट खुलवाने के लिए आवेदन किया था. परिजनों का आरोप है कि इतनी बड़ी वित्तीय प्रक्रिया बिना उचित सत्यापन के कैसे पूरी हुई, इसमें बैंक की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है. साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बैंकिंग रिकॉर्ड, जीएसटी पंजीकरण और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
क्या होता है निगेटिव लियन
यह एक ऐसा बैंकिंग समझौता है, जिसमें उधारकर्ता बैंक को यह वचन देता है कि वह बैंक की पूर्व अनुमति के बिना अपनी किसी संपत्ति (जैसे- संपत्ति, शेयर) को न तो बेचेगा, न ही उस पर किसी अन्य प्रकार का भार उत्पन्न करेगा. यह बैंक के लिए एक प्रकार की असुरक्षित प्रतिभूति है.



