PRASUTICON 2.0 की प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में दिखी आधुनिक सर्जरी और आयुर्वेद के समन्वय की झलक.

वाराणसी : PRASUTICON 2.0 का आगाज बुधवार को आयोजित पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला के साथ हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए चिकित्सकों, शल्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीकों के साथ आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सीय विधियों के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ भगवान धन्वंतरि और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण के साथ हुआ। इस दौरान PRASUTICON 2.0 के सफल आयोजन की कामना की गई। कार्यक्रम में चार प्रमुख व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें दो लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन शामिल रहे।
230 प्रतिभागियों ने लाइव सर्जरी देखी
सर सुंदरलाल अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में हो रही शल्य प्रक्रियाओं का सीधा प्रसारण के. एन. उडुपा सभागार में किया गया। करीब 230 प्रतिभागियों ने सभागार से लाइव सर्जरी देखी और ऑपरेशन कर रही टीम के साथ सीधे अकादमिक संवाद किया। इससे प्रतिभागियों को वास्तविक समय में जटिल शल्य प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला।
पहले लाइव सर्जिकल प्रदर्शन में बड़े गर्भाशयीय फाइब्रॉइड के एक मामले में लैप्रोस्कोपिक टोटल एब्डॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी की गई। यह प्रक्रिया डॉ. मंदार रानाडे और डॉ. आशीष कुमार सिंह ने की, जबकि डॉ. शिल्पी सिंह ने सहयोग किया।
दूसरे लाइव प्रदर्शन में गर्भाशय के प्रोलैप्स के एक मामले में वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी की गई। यह प्रक्रिया डॉ. प्रेमराज खैरनार ने की। इसमें डॉ. भगवान कराले और डॉ. शिखा सिंह ने सहयोग किया।
आयुर्वेद की तकनीकों पर भी हुए हैंड्स-ऑन सत्र
कार्यशाला में आयुर्वेद की विशिष्ट चिकित्सीय प्रक्रियाओं पर दो व्यावहारिक हैंड्स-ऑन सत्र भी आयोजित किए गए। पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. पुलक कांति कर ने अग्निकर्म और विद्धकर्म चिकित्सा की तकनीकों का प्रदर्शन किया। इस दौरान डॉ. संजीब कलसा ने सहयोग किया।
वहीं, मर्म चिकित्सा पर विशेष व्यावहारिक सत्र उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ प्रो. सुनील जोशी ने संचालित किया। इन सत्रों में प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं और उनके चिकित्सीय उपयोग को समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला में डॉ. रमन सिंह, प्रो. लक्ष्मण सिंह, प्रो. शिव जी गुप्ता, डॉ. प्रदीप मुसले, प्रो. डी.एन. पांडेय, डॉ. नीरू नथानी, प्रो. पी.के. गोस्वानी, प्रो. के.के. पांडेय और प्रो. सुजाता कदम समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक एवं शिक्षाविद मौजूद रहे।
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आयोजन समिति में प्रो. दीपा मिश्रा, प्रो. सुनीता सुमन, प्रो. विश्वेश बी.एन., प्रो. अनुराधा रॉय, डॉ. प्रीति चौहान और डॉ. शिखा सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने उन्नत शल्य चिकित्सा तकनीकों को करीब से देखा और विशेषज्ञों से उनके नैदानिक अनुप्रयोगों को समझा। लाइव सर्जरी के प्रसारण और विशेषज्ञों के साथ संवाद ने कार्यशाला को व्यावहारिक एवं अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया।



