मिस्टर बीस्ट से दो घंटे की बातचीत, फिर छोड़ी ₹26 लाख की नौकरी: कैसे हैरी उप्पल बने देश के बड़े फूड व्लॉगर...
बनारस पहुंचे चर्चित फूड व्लॉगर हैरी उप्पल ने टमाटर चाट, बाटी-चोखा और खिचड़ी की तारीफ करते हुए अपनी जिंदगी का वह किस्सा सुनाया, जिसने उन्हें बैंकिंग की सुरक्षित नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन की अनिश्चित दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया.
वाराणसी: देश के चर्चित फूड व्लॉगर हैरी उप्पल इन दिनों बनारस के स्वाद, संस्कृति और गलियों को करीब से समझ रहे हैं. शहर के अपने अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बनारस में उन्हें सबसे ज्यादा टमाटर चाट पसंद आई. इसके बाद बाटी-चोखा और यहां की खिचड़ी ने भी उन्हें खासा प्रभावित किया.
हैरी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तो मैं यह प्लान कर सकता हूं कि हर हफ्ते दिल्ली से फ्लाइट लेकर बनारस आऊं और बाटी-चोखा खाकर वापस चला जाऊं.”
लेकिन बनारस के खाने से शुरू हुई बातचीत जल्द ही हैरी उप्पल की उस असाधारण यात्रा तक पहुंच गई, जिसमें एक बैंक कर्मचारी ने सालाना ₹26 लाख का पैकेज छोड़ा और कैमरा उठाकर भारत की गलियों में निकल पड़ा.
कंटेंट क्रिएशन से पहले अमेरिकन एक्सप्रेस में करते थे नौकरी
हैरी उप्पल ने बताया कि कंटेंट क्रिएशन में आने से पहले वह बैंकिंग क्षेत्र में काम करते थे. वह अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़े हुए थे और संदिग्ध या असामान्य वित्तीय गतिविधियों वाले खातों की जांच उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा थी.नौकरी के दौरान ही उन्हें सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल कंटेंट की आर्थिक संभावनाओं को समझने का अवसर मिला.
हैरी के अनुसार, उनकी जिंदगी बदलने वाला घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ, जब उनके सामने एक ऐसा विदेशी अकाउंट आया, जिससे कथित तौर पर हर महीने लाखों डॉलर के कैमरा उपकरण खरीदे जा रहे थे.उन्होंने बताया, “हमारा काम यह देखना होता था कि किसी क्लाइंट के अकाउंट में कुछ गलत तो नहीं हो रहा. एक अकाउंट में लगातार बहुत महंगे कैमरा इक्विपमेंट खरीदे जा रहे थे. आम तौर पर ऐसा नहीं होता था, इसलिए मैंने क्लाइंट को फोन करके पूछा कि क्या ये सारे ऑर्डर उन्हीं की ओर से किए जा रहे हैं.”
क्लाइंट ने खरीदारी की पुष्टि कर दी, लेकिन हैरी की जिज्ञासा खत्म नहीं हुई.
“मुझे लगा कोई हॉलीवुड डायरेक्टर होगा”
हैरी ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर कैमरा उपकरण खरीदे जाते देखकर उन्हें लगा कि सामने वाला व्यक्ति संभवतः हॉलीवुड का कोई अभिनेता, निर्माता या निर्देशक होगा.
उन्होंने क्लाइंट से पूछा कि वह आखिर ऐसा क्या काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें इतने कैमरों और उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है.
हैरी के मुताबिक, जवाब मिला—“मैं यूट्यूब के लिए वीडियो बनाता हूं.”
इसके बाद जब हैरी ने उनसे नाम पूछा, तो उन्हें बताया गया कि वह MrBeast हैं.
हैरी उप्पल ने इंटरव्यू में दावा किया कि यह उस दौर की बात है, जब मिस्टर बीस्ट आज जितने बड़े वैश्विक क्रिएटर नहीं बने थे. उनके अनुसार, उस पेशेवर कॉल के दौरान मिस्टर बीस्ट ने उन्हें यूट्यूब से कमाई, वीडियो की रणनीति और कंटेंट से जुड़े कुछ टूल्स के बारे में विस्तार से समझाया.
उन्होंने कहा, “उन्होंने करीब दो घंटे का समय दिया. एक कीवर्ड टूल के बारे में बताया और उसका इनवाइट मेरे आधिकारिक ईमेल पर भेजा था. उसका स्क्रीनशॉट आज भी मेरे पास सुरक्षित है.”
मिस्टर बीस्ट की रणनीति से मिला निवेश का सबक
हैरी के अनुसार, मिस्टर बीस्ट उस समय अपने कंटेंट से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा दोबारा वीडियो प्रोडक्शन में लगा रहे थे.
इस बातचीत से उन्हें एहसास हुआ कि सफल कंटेंट क्रिएशन केवल कैमरे के सामने आने का काम नहीं है. इसमें योजना, तकनीक, डेटा, दर्शकों की समझ और लगातार निवेश की आवश्यकता होती है.
हैरी ने बताया, “मुझे लगा कि अगर सामने वाला अपने काम में इतना पैसा लगा रहा है, तो मुझे भी बिना तैयारी के नहीं उतरना चाहिए. इसके बाद मैंने अपनी सेविंग शुरू कर दी.”
चार साल तक सेविंग, फिर ₹26 लाख की नौकरी को अलविदा
हैरी ने बताया कि उन्होंने लगभग चार वर्षों तक आर्थिक तैयारी की.
वर्ष 2016 में उनका सालाना पैकेज करीब ₹26 लाख था, लेकिन उन्होंने गुरुग्राम की नौकरी छोड़कर अपने घर लौटने और पूर्णकालिक रूप से कंटेंट बनाने का फैसला किया.यह निर्णय केवल नौकरी छोड़ने तक सीमित नहीं था. उन्हें कैमरा चलाना, शूटिंग करना, फ्रेम बनाना और वीडियो की कहानी तैयार करना भी खुद सीखना पड़ा.
उन्होंने कहा, “मैंने यूट्यूब और इंटरनेट से सीखा कि कैमरा एंगल क्या होता है और वीडियो कैसे बनाया जाता है. मिस्टर बीस्ट से उस कॉल के बाद दोबारा कोई बात नहीं हुई, क्योंकि वह बैंक के क्लाइंट थे और वह एक प्रोफेशनल बातचीत थी.”
1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में लगे करीब तीन साल
आज किसी सफल क्रिएटर के लाखों फॉलोअर्स दिखाई देते हैं, लेकिन उसके शुरुआती वर्षों का संघर्ष अक्सर कैमरे के पीछे रह जाता है.
हैरी उप्पल ने बताया कि लगभग 1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में उन्हें ढाई से तीन साल का समय लग गया था.
इस दौरान परिचितों और आसपास के लोगों की टिप्पणियां भी मानसिक दबाव बढ़ाती थीं.
उन्होंने कहा, “लोग कहते थे कि तुम्हारी वीडियो देखी, उसमें दस लाइक आए थे. किसी वीडियो पर तीन लाइक थे और उनमें से एक लाइक मेरा अपना था. ऐसी बातें खराब जरूर लगती थीं, लेकिन मैंने काम बंद नहीं किया.”
शुरुआती दौर में हैरी एक बैग लेकर अलग-अलग जगहों पर लोगों से बात करने निकलते थे. कैमरा और बैग देखकर कई दुकानदारों को लगता था कि शायद वह गूगल मैप या किसी सर्वे टीम से आए हैं. इस कारण लोग खुलकर बात करने से भी हिचकिचाते थे.
पहली कमाई ₹25 हजार, अगले महीने पहुंची ढाई लाख
हैरी ने बताया कि यूट्यूब से उनकी पहली उल्लेखनीय कमाई लगभग ₹25 हजार से ₹27 हजार के बीच हुई थी.
जब उन्होंने यह बात अपने पिता को बताई तो उनके पिता ने गर्व से कहा कि यदि हर महीने इतनी कमाई होने लगे, तो उन्हें घर से जेब खर्च लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
हैरी के अनुसार, इसके अगले ही महीने उनकी आमदनी बढ़कर लगभग ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई. उस समय उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब सात हजार फॉलोअर्स थे.उनके लिए यह केवल कमाई नहीं थी. यह इस बात का प्रमाण था कि वर्षों की तैयारी, बचत और संघर्ष के बाद उनका फैसला परिणाम देना शुरू कर चुका था.
बचपन की चुनौती ने मुश्किल दौर में दिया साहस
हैरी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चुनौतियां पसंद रही हैं. बचपन में बढ़े हुए वजन के कारण उन्हें लोगों की टिप्पणियां और बुलिंग सहनी पड़ी थी. इसके बाद उन्होंने खुद को फिट बनाने का निर्णय लिया.
उन्होंने कहा कि उस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि किसी कठिन परिस्थिति को शिकायत के बजाय चुनौती की तरह स्वीकार किया जा सकता है.
यही मानसिकता उन्हें कंटेंट क्रिएशन के शुरुआती वर्षों में भी आगे बढ़ाती रही.
नए क्रिएटर्स को सलाह—वही कीजिए जो कोई और नहीं कर रहा
कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में प्रवेश करने वाले युवाओं को सलाह देते हुए हैरी ने कहा कि आज केवल दूसरों की नकल करके लंबे समय तक सफलता हासिल नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा, “जो कोई और नहीं कर रहा है, आपको वह करना चाहिए। मेरे शुरुआती कंटेंट की स्टोरीटेलिंग अलग थी. कंटेंट की कोई तय रूलबुक नहीं है. यहां आपको प्रयोग करने की पूरी आजादी है.”
हैरी के अनुसार, कैमरा उठाकर अपने आसपास की गलियों, बाजारों, लोगों और कहानियों को रिकॉर्ड करना ही शुरुआत का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है.
उन्होंने कहा, “सिस्टम लिमिटलेस है. संभव है कि कई वर्षों बाद कंटेंट क्रिएशन पर कोई स्थापित रूलबुक लिखी जाए, लेकिन फिलहाल यह एक ऐसी दुनिया है, जहां नया करने की बहुत गुंजाइश है.”
“मुझे दस लाख सब्सक्राइबर में पांच-छह साल लगे, बनारस दो-तीन महीने में कर सकता है”
हैरी उप्पल ने बनारस के स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी बड़ा संदेश दिया.
उन्होंने कहा कि उन्हें दस लाख सब्सक्राइबर तक पहुंचने में लगभग पांच से छह वर्ष लगे, लेकिन बनारस के पास ऐसी संस्कृति, भोजन, गलियां, घाट, लोग और कहानियां हैं कि यहां का कोई गंभीर क्रिएटर सही रणनीति के साथ बहुत तेजी से अपनी पहचान बना सकता है.
उन्होंने कहा, “आप बनारस में हैं. यहां इतना कंटेंट है कि दस लाख सब्सक्राइबर तक पहुंचने के लिए दो-तीन महीने भी काफी हो सकते हैं—बस कहानी कहने का तरीका अलग होना चाहिए.”
एक बैंक कर्मचारी से फूड व्लॉगर बनने की कहानी
हैरी उप्पल की यात्रा केवल एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर सोशल मीडिया पर आने की कहानी नहीं है. यह लंबी आर्थिक तैयारी, असफल शुरुआत, कम व्यूज, लोगों की टिप्पणियों और लगातार प्रयोग करते रहने की कहानी भी है.
बनारस में टमाटर चाट और बाटी-चोखा का स्वाद लेते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में अवसर जरूर हैं, लेकिन सफलता केवल वायरल वीडियो से नहीं आती.उसके पीछे वर्षों का धैर्य, आर्थिक अनुशासन, अलग स्टोरीटेलिंग और उस समय भी काम करते रहने का साहस होता है, जब वीडियो पर आने वाले तीन लाइक्स में से एक लाइक आपका अपना हो.
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इंटरव्यू की प्रमुख बातें
- हैरी उप्पल कंटेंट क्रिएशन से पहले अमेरिकन एक्सप्रेस में कार्यरत थे.
- वर्ष 2016 में उनका सालाना पैकेज करीब ₹26 लाख था.
- उन्होंने एक बैंकिंग कॉल के दौरान मिस्टर बीस्ट से बातचीत होने का दावा किया.
- नौकरी छोड़ने से पहले उन्होंने लगभग चार वर्षों तक सेविंग की.
- करीब 1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में उन्हें ढाई से तीन साल लगे.
- पहली उल्लेखनीय यूट्यूब कमाई लगभग ₹25–27 हजार रही.
- उनके अनुसार, अगले महीने उनकी कमाई करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई.
- बनारस में उन्हें टमाटर चाट, बाटी-चोखा और खिचड़ी सबसे अधिक पसंद आई.
नए क्रिएटर्स को उनकी सलाह है—नकल के बजाय अपनी अलग स्टोरीटेलिंग विकसित करें



