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मिस्टर बीस्ट से दो घंटे की बातचीत, फिर छोड़ी ₹26 लाख की नौकरी: कैसे हैरी उप्पल बने देश के बड़े फूड व्लॉगर...

Jul 13, 2026, 11:09 AM
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Posted By Diksha Mishra

बनारस पहुंचे चर्चित फूड व्लॉगर हैरी उप्पल ने टमाटर चाट, बाटी-चोखा और खिचड़ी की तारीफ करते हुए अपनी जिंदगी का वह किस्सा सुनाया, जिसने उन्हें बैंकिंग की सुरक्षित नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन की अनिश्चित दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया.


वाराणसी: देश के चर्चित फूड व्लॉगर हैरी उप्पल इन दिनों बनारस के स्वाद, संस्कृति और गलियों को करीब से समझ रहे हैं. शहर के अपने अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बनारस में उन्हें सबसे ज्यादा टमाटर चाट पसंद आई. इसके बाद बाटी-चोखा और यहां की खिचड़ी ने भी उन्हें खासा प्रभावित किया.

हैरी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तो मैं यह प्लान कर सकता हूं कि हर हफ्ते दिल्ली से फ्लाइट लेकर बनारस आऊं और बाटी-चोखा खाकर वापस चला जाऊं.”

लेकिन बनारस के खाने से शुरू हुई बातचीत जल्द ही हैरी उप्पल की उस असाधारण यात्रा तक पहुंच गई, जिसमें एक बैंक कर्मचारी ने सालाना ₹26 लाख का पैकेज छोड़ा और कैमरा उठाकर भारत की गलियों में निकल पड़ा.


कंटेंट क्रिएशन से पहले अमेरिकन एक्सप्रेस में करते थे नौकरी


हैरी उप्पल ने बताया कि कंटेंट क्रिएशन में आने से पहले वह बैंकिंग क्षेत्र में काम करते थे. वह अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़े हुए थे और संदिग्ध या असामान्य वित्तीय गतिविधियों वाले खातों की जांच उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा थी.नौकरी के दौरान ही उन्हें सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल कंटेंट की आर्थिक संभावनाओं को समझने का अवसर मिला.

हैरी के अनुसार, उनकी जिंदगी बदलने वाला घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ, जब उनके सामने एक ऐसा विदेशी अकाउंट आया, जिससे कथित तौर पर हर महीने लाखों डॉलर के कैमरा उपकरण खरीदे जा रहे थे.उन्होंने बताया, “हमारा काम यह देखना होता था कि किसी क्लाइंट के अकाउंट में कुछ गलत तो नहीं हो रहा. एक अकाउंट में लगातार बहुत महंगे कैमरा इक्विपमेंट खरीदे जा रहे थे. आम तौर पर ऐसा नहीं होता था, इसलिए मैंने क्लाइंट को फोन करके पूछा कि क्या ये सारे ऑर्डर उन्हीं की ओर से किए जा रहे हैं.”

क्लाइंट ने खरीदारी की पुष्टि कर दी, लेकिन हैरी की जिज्ञासा खत्म नहीं हुई.


“मुझे लगा कोई हॉलीवुड डायरेक्टर होगा”


हैरी ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर कैमरा उपकरण खरीदे जाते देखकर उन्हें लगा कि सामने वाला व्यक्ति संभवतः हॉलीवुड का कोई अभिनेता, निर्माता या निर्देशक होगा.

उन्होंने क्लाइंट से पूछा कि वह आखिर ऐसा क्या काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें इतने कैमरों और उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है.

हैरी के मुताबिक, जवाब मिला—“मैं यूट्यूब के लिए वीडियो बनाता हूं.”

इसके बाद जब हैरी ने उनसे नाम पूछा, तो उन्हें बताया गया कि वह MrBeast हैं.

हैरी उप्पल ने इंटरव्यू में दावा किया कि यह उस दौर की बात है, जब मिस्टर बीस्ट आज जितने बड़े वैश्विक क्रिएटर नहीं बने थे. उनके अनुसार, उस पेशेवर कॉल के दौरान मिस्टर बीस्ट ने उन्हें यूट्यूब से कमाई, वीडियो की रणनीति और कंटेंट से जुड़े कुछ टूल्स के बारे में विस्तार से समझाया.

उन्होंने कहा, “उन्होंने करीब दो घंटे का समय दिया. एक कीवर्ड टूल के बारे में बताया और उसका इनवाइट मेरे आधिकारिक ईमेल पर भेजा था. उसका स्क्रीनशॉट आज भी मेरे पास सुरक्षित है.”


मिस्टर बीस्ट की रणनीति से मिला निवेश का सबक


हैरी के अनुसार, मिस्टर बीस्ट उस समय अपने कंटेंट से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा दोबारा वीडियो प्रोडक्शन में लगा रहे थे.

इस बातचीत से उन्हें एहसास हुआ कि सफल कंटेंट क्रिएशन केवल कैमरे के सामने आने का काम नहीं है. इसमें योजना, तकनीक, डेटा, दर्शकों की समझ और लगातार निवेश की आवश्यकता होती है.

हैरी ने बताया, “मुझे लगा कि अगर सामने वाला अपने काम में इतना पैसा लगा रहा है, तो मुझे भी बिना तैयारी के नहीं उतरना चाहिए. इसके बाद मैंने अपनी सेविंग शुरू कर दी.”


चार साल तक सेविंग, फिर ₹26 लाख की नौकरी को अलविदा


हैरी ने बताया कि उन्होंने लगभग चार वर्षों तक आर्थिक तैयारी की.

वर्ष 2016 में उनका सालाना पैकेज करीब ₹26 लाख था, लेकिन उन्होंने गुरुग्राम की नौकरी छोड़कर अपने घर लौटने और पूर्णकालिक रूप से कंटेंट बनाने का फैसला किया.यह निर्णय केवल नौकरी छोड़ने तक सीमित नहीं था. उन्हें कैमरा चलाना, शूटिंग करना, फ्रेम बनाना और वीडियो की कहानी तैयार करना भी खुद सीखना पड़ा.

उन्होंने कहा, “मैंने यूट्यूब और इंटरनेट से सीखा कि कैमरा एंगल क्या होता है और वीडियो कैसे बनाया जाता है. मिस्टर बीस्ट से उस कॉल के बाद दोबारा कोई बात नहीं हुई, क्योंकि वह बैंक के क्लाइंट थे और वह एक प्रोफेशनल बातचीत थी.”


1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में लगे करीब तीन साल


आज किसी सफल क्रिएटर के लाखों फॉलोअर्स दिखाई देते हैं, लेकिन उसके शुरुआती वर्षों का संघर्ष अक्सर कैमरे के पीछे रह जाता है.

हैरी उप्पल ने बताया कि लगभग 1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में उन्हें ढाई से तीन साल का समय लग गया था.

इस दौरान परिचितों और आसपास के लोगों की टिप्पणियां भी मानसिक दबाव बढ़ाती थीं.

उन्होंने कहा, “लोग कहते थे कि तुम्हारी वीडियो देखी, उसमें दस लाइक आए थे. किसी वीडियो पर तीन लाइक थे और उनमें से एक लाइक मेरा अपना था. ऐसी बातें खराब जरूर लगती थीं, लेकिन मैंने काम बंद नहीं किया.”

शुरुआती दौर में हैरी एक बैग लेकर अलग-अलग जगहों पर लोगों से बात करने निकलते थे. कैमरा और बैग देखकर कई दुकानदारों को लगता था कि शायद वह गूगल मैप या किसी सर्वे टीम से आए हैं. इस कारण लोग खुलकर बात करने से भी हिचकिचाते थे.


पहली कमाई ₹25 हजार, अगले महीने पहुंची ढाई लाख


हैरी ने बताया कि यूट्यूब से उनकी पहली उल्लेखनीय कमाई लगभग ₹25 हजार से ₹27 हजार के बीच हुई थी.

जब उन्होंने यह बात अपने पिता को बताई तो उनके पिता ने गर्व से कहा कि यदि हर महीने इतनी कमाई होने लगे, तो उन्हें घर से जेब खर्च लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

हैरी के अनुसार, इसके अगले ही महीने उनकी आमदनी बढ़कर लगभग ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई. उस समय उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब सात हजार फॉलोअर्स थे.उनके लिए यह केवल कमाई नहीं थी. यह इस बात का प्रमाण था कि वर्षों की तैयारी, बचत और संघर्ष के बाद उनका फैसला परिणाम देना शुरू कर चुका था.


बचपन की चुनौती ने मुश्किल दौर में दिया साहस


हैरी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चुनौतियां पसंद रही हैं. बचपन में बढ़े हुए वजन के कारण उन्हें लोगों की टिप्पणियां और बुलिंग सहनी पड़ी थी. इसके बाद उन्होंने खुद को फिट बनाने का निर्णय लिया.

उन्होंने कहा कि उस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि किसी कठिन परिस्थिति को शिकायत के बजाय चुनौती की तरह स्वीकार किया जा सकता है.

यही मानसिकता उन्हें कंटेंट क्रिएशन के शुरुआती वर्षों में भी आगे बढ़ाती रही.


नए क्रिएटर्स को सलाह—वही कीजिए जो कोई और नहीं कर रहा


कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में प्रवेश करने वाले युवाओं को सलाह देते हुए हैरी ने कहा कि आज केवल दूसरों की नकल करके लंबे समय तक सफलता हासिल नहीं की जा सकती.

उन्होंने कहा, “जो कोई और नहीं कर रहा है, आपको वह करना चाहिए। मेरे शुरुआती कंटेंट की स्टोरीटेलिंग अलग थी. कंटेंट की कोई तय रूलबुक नहीं है. यहां आपको प्रयोग करने की पूरी आजादी है.”

हैरी के अनुसार, कैमरा उठाकर अपने आसपास की गलियों, बाजारों, लोगों और कहानियों को रिकॉर्ड करना ही शुरुआत का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है.

उन्होंने कहा, “सिस्टम लिमिटलेस है. संभव है कि कई वर्षों बाद कंटेंट क्रिएशन पर कोई स्थापित रूलबुक लिखी जाए, लेकिन फिलहाल यह एक ऐसी दुनिया है, जहां नया करने की बहुत गुंजाइश है.”


“मुझे दस लाख सब्सक्राइबर में पांच-छह साल लगे, बनारस दो-तीन महीने में कर सकता है”


हैरी उप्पल ने बनारस के स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी बड़ा संदेश दिया.

उन्होंने कहा कि उन्हें दस लाख सब्सक्राइबर तक पहुंचने में लगभग पांच से छह वर्ष लगे, लेकिन बनारस के पास ऐसी संस्कृति, भोजन, गलियां, घाट, लोग और कहानियां हैं कि यहां का कोई गंभीर क्रिएटर सही रणनीति के साथ बहुत तेजी से अपनी पहचान बना सकता है.

उन्होंने कहा, “आप बनारस में हैं. यहां इतना कंटेंट है कि दस लाख सब्सक्राइबर तक पहुंचने के लिए दो-तीन महीने भी काफी हो सकते हैं—बस कहानी कहने का तरीका अलग होना चाहिए.”


एक बैंक कर्मचारी से फूड व्लॉगर बनने की कहानी


हैरी उप्पल की यात्रा केवल एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर सोशल मीडिया पर आने की कहानी नहीं है. यह लंबी आर्थिक तैयारी, असफल शुरुआत, कम व्यूज, लोगों की टिप्पणियों और लगातार प्रयोग करते रहने की कहानी भी है.

बनारस में टमाटर चाट और बाटी-चोखा का स्वाद लेते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में अवसर जरूर हैं, लेकिन सफलता केवल वायरल वीडियो से नहीं आती.उसके पीछे वर्षों का धैर्य, आर्थिक अनुशासन, अलग स्टोरीटेलिंग और उस समय भी काम करते रहने का साहस होता है, जब वीडियो पर आने वाले तीन लाइक्स में से एक लाइक आपका अपना हो.



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इंटरव्यू की प्रमुख बातें


  1. हैरी उप्पल कंटेंट क्रिएशन से पहले अमेरिकन एक्सप्रेस में कार्यरत थे.
  2. वर्ष 2016 में उनका सालाना पैकेज करीब ₹26 लाख था.
  3. उन्होंने एक बैंकिंग कॉल के दौरान मिस्टर बीस्ट से बातचीत होने का दावा किया.
  4. नौकरी छोड़ने से पहले उन्होंने लगभग चार वर्षों तक सेविंग की.
  5. करीब 1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में उन्हें ढाई से तीन साल लगे.
  6. पहली उल्लेखनीय यूट्यूब कमाई लगभग ₹25–27 हजार रही.
  7. उनके अनुसार, अगले महीने उनकी कमाई करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई.
  8. बनारस में उन्हें टमाटर चाट, बाटी-चोखा और खिचड़ी सबसे अधिक पसंद आई.


नए क्रिएटर्स को उनकी सलाह है—नकल के बजाय अपनी अलग स्टोरीटेलिंग विकसित करें

वाराणसी में एयरशो को सफल बनाने वाले पुलिस अफसर होंगे सम्मानित, 100 इंस्पेक्टरों को प्रशस्ति पत्र...
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वाराणसी : गंगा किनारे काशी में तीन दिन तक एयर शो को सफल बनाने वाले पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों का सम्मान होगा. 50 राजपत्रित अधिकारियों को डीजीपी की ओर से प्रशस्ति पत्र और विशेष योगदान देने वाले 10 वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिष्ठित डीजी कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित किया जाएगा. मुस्तैदी से ड्यूटी निभाने वाले 100 इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को पुलिस आयुक्त स्तर से प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया जाएगा. आयोजन में दिन-रात तैनात रहे अन्य सभी शेष पुलिस कर्मचारियों के योगदान को भी रेखांकित किया गया है.डीसीपी स्तर से इन सभी पुलिसकर्मियों के कैरेक्टर रोल में गुड एंट्री दर्ज की जाएगी. 22, 24 और 25 अक्‍टूबर को एयरशो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य वीवीआईपी आगमन के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया गया. पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के अनुसार एयरशो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और सराहनीय कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा. पुलिस महानिदेशक ने बेहतरीन व्यवस्था और सुरक्षा करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र व डीजी कमेंडेशन डिस्क देने की सहमति दी है.पुलिस आयुक्‍त मोहित अग्रवाल के अनुसार, एयर शो को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों और विभिन्न जिलों से आए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र व डीजी कमेंडेशन डिस्क से नवाजा जाएगा. डीजीपी ने इस पर सहमति दी है. इस सम्मान से अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा.ALSO READ : आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत में कुमार मंगलम मुख्‍य अतिथि, हरजस कौर को प्रेसिडेंट मेडल...वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस और चंदौली पुलिस ने एयरशो की सफलता को लेकर एक माह पहले से लगातार तैयारियों की समीक्षा और व्यवस्थाओं की निगरानी हो रही थी. पुलिस आयुक्त के निर्देशन में पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण और नो टच पॉलिसी ने कार्यक्रम को सफल बनाया. पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, वाराणसी एडीजी जोन नवीन अरोरा, अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरी मीणा, वाराणसी परिक्षेत्र डीआईजी रेंज वैभव कृष्ण, चंदौली एसपी आकाश पटेल, डीसीपी वरुणा राजेश कुमार पांडेय, डीसीपी काशी गौरव बंशवाल, एडीसीपी यातायात अंशुमान मिश्रा समेत सभी काशी, वरुणा जोन के एडीसीपी, एसीपी स्तर के अधिकारियों ने योजना के तहत काम किया. घाटों पर भीड़ को सेक्टर में बांटकर 1600 से अधिक एनसीसी कैडेट और स्काउट गाइड को जिम्मेदारी साैंपी गई थी.
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वाराणसी: आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह 31 अक्‍टूबर को स्‍वतंत्रता भवन में आयोजित होने जा रहा है. समारोह में आदित्य बिरला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला मुख्य अतिथि होंगे. इसमें बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की छात्रा हरजस कौर को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा. वह संस्थान के मेडल एवं पुरस्कार विजेताओं में सबसे आगे हैं. उनके खाते में 15 सम्मान दर्ज हैं.वहीं, बीटेक केमिकल इंजीनियरिंग की तनिषा अग्रवाल ने छह गोल्ड मेडल सहित नौ पुरस्कार हासिल किए हैं. सिविल इंजीनियरिंग की रेशमा खातून और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की श्रेया श्रीवास्तव को सात-सात, जबकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के जतिन अग्रवाल को छह पुरस्कारों के लिए चुना गया है.हरजस कौर को बीटेक की सभी शाखाओं में उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल मिलेगा. उनके नाम सूची में 15 सम्मान दर्ज हैं, जिनमें 10 गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल शामिल हैं. उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में प्रथम स्थान और बीटेक की सभी शाखाओं में सर्वाधिक अंक हासिल करने सहित विभिन्न उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा.तनिषा को छह गोल्ड मेडलबीटेक केमिकल इंजीनियरिंग की तनिषा अग्रवाल को नौ पुरस्कारों के लिए चुना गया है. इनमें छह गोल्ड मेडल शामिल हैं. उन्हें विभाग में प्रथम स्थान, सर्वाधिक सीपीआइ और छात्राओं में सर्वाधिक सीपीआइ सहित विभिन्न उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा. सिविल इंजीनियरिंग की रेशमा खातून को सात पुरस्कार मिलेंगे. इनमें शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मेधावी विद्यार्थी के लिए निर्धारित सम्मान भी शामिल हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की श्रेया श्रीवास्तव को भी सात पुरस्कारों के लिए चुना गया है.प्रतीक और लखदीव को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडलबीटेक के विद्यार्थियों में सर्वांगीण प्रदर्शन, संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल के लिए प्रतीक त्रिपाठी को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा. बीआर्क और इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री के विद्यार्थियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए लखदीव मेहुलकुमार राजकुमार को यह सम्मान मिलेगा.ALSO READ: दीपावली पर वाराणसी के लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर, करना होगा यह काममैकेनिकल इंजीनियरिंग के जतिन अग्रवाल को छह पुरस्कारों के लिए चुना गया है, जबकि मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की अपूर्वा कशिश को चार मेडल के साथ एक लाख रुपये का आदित्य कुमार अवस्थी एंडोमेंट पुरस्कार दिया जाएगा. दीक्षांत समारोह में विभिन्न स्नातक, परास्नातक और शोध कार्यक्रमों के 2048 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी.
दीपावली पर वाराणसी के लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर, करना होगा यह काम
दीपावली पर वाराणसी के लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर, करना होगा यह काम
वाराणसी: दीपावली पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त गैस सिलेंडर रिफिल की सुविधा मिलेगी. वाराणसी जिले में इस बार 2,69,923 परिवारों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर प्रति सिलेंडर रिफिल पर 1,005.50 रुपये की सहायता देंगी. इससे त्योहार के दौरान गरीब परिवारों को रसोई गैस के खर्च में राहत मिलेगी.पिछले साल से 1.04 लाख अधिक परिवारों को लाभजिला पूर्ति अधिकारी केबी सिंह के अनुसार, पिछले साल दीपावली पर जिले में 1,65,855 उज्ज्वला लाभार्थियों ने मुफ्त सिलेंडर रिफिल का लाभ लिया था. इस बार लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर 2,69,923 करने का लक्ष्य रखा गया है. इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में 1,04,068 अधिक परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने की तैयारी है. इससे अधिक संख्या में पात्र परिवारों को त्योहार के दौरान रसोई गैस की सुविधा मिल सकेगी.दो चरणों में संचालित होगी योजनाउज्ज्वला लाभार्थियों को सिलेंडर रिफिल पर सहायता देने की योजना दो चरणों में संचालित की जाएगी. पहला चरण अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण जनवरी से मार्च 2027 तक निर्धारित है. प्रति सिलेंडर रिफिल पर केंद्र सरकार की ओर से 359.52 रुपये और प्रदेश सरकार की ओर से 645.98 रुपये की सहायता दी जाएगी. दोनों सरकारों की सहायता मिलाकर कुल राशि 1,005.50 रुपये होगी.आधार से बैंक खाता लिंक कराना अनिवार्यजिला पूर्ति अधिकारी ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों से अपने बैंक खातों की स्थिति जांचने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जिन लाभार्थियों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हैं या जिनका आधार सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, वे संबंधित बैंक से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करा लें. इससे योजना के तहत सहायता राशि प्राप्त करने में आने वाली संभावित परेशानियों से बचा जा सकेगा.ALSO READ: जनगणना के ल‍िए वाराणसी नगर में 3105 प्रगणक घर-घर जाकर संकलित करेंगे परिवारों का ब्योराप्रशासन का जोर है कि पात्र लाभार्थी समय रहते बैंक खाते और आधार सत्यापन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर लें, ताकि योजना का लाभ लेने में किसी तरह की दिक्कत न हो.