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मिस्टर बीस्ट से दो घंटे की बातचीत, फिर छोड़ी ₹26 लाख की नौकरी: कैसे हैरी उप्पल बने देश के बड़े फूड व्लॉगर...

Jul 13, 2026, 11:09 AM
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Posted By Diksha Mishra

बनारस पहुंचे चर्चित फूड व्लॉगर हैरी उप्पल ने टमाटर चाट, बाटी-चोखा और खिचड़ी की तारीफ करते हुए अपनी जिंदगी का वह किस्सा सुनाया, जिसने उन्हें बैंकिंग की सुरक्षित नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन की अनिश्चित दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया.


वाराणसी: देश के चर्चित फूड व्लॉगर हैरी उप्पल इन दिनों बनारस के स्वाद, संस्कृति और गलियों को करीब से समझ रहे हैं. शहर के अपने अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बनारस में उन्हें सबसे ज्यादा टमाटर चाट पसंद आई. इसके बाद बाटी-चोखा और यहां की खिचड़ी ने भी उन्हें खासा प्रभावित किया.

हैरी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तो मैं यह प्लान कर सकता हूं कि हर हफ्ते दिल्ली से फ्लाइट लेकर बनारस आऊं और बाटी-चोखा खाकर वापस चला जाऊं.”

लेकिन बनारस के खाने से शुरू हुई बातचीत जल्द ही हैरी उप्पल की उस असाधारण यात्रा तक पहुंच गई, जिसमें एक बैंक कर्मचारी ने सालाना ₹26 लाख का पैकेज छोड़ा और कैमरा उठाकर भारत की गलियों में निकल पड़ा.


कंटेंट क्रिएशन से पहले अमेरिकन एक्सप्रेस में करते थे नौकरी


हैरी उप्पल ने बताया कि कंटेंट क्रिएशन में आने से पहले वह बैंकिंग क्षेत्र में काम करते थे. वह अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़े हुए थे और संदिग्ध या असामान्य वित्तीय गतिविधियों वाले खातों की जांच उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा थी.नौकरी के दौरान ही उन्हें सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल कंटेंट की आर्थिक संभावनाओं को समझने का अवसर मिला.

हैरी के अनुसार, उनकी जिंदगी बदलने वाला घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ, जब उनके सामने एक ऐसा विदेशी अकाउंट आया, जिससे कथित तौर पर हर महीने लाखों डॉलर के कैमरा उपकरण खरीदे जा रहे थे.उन्होंने बताया, “हमारा काम यह देखना होता था कि किसी क्लाइंट के अकाउंट में कुछ गलत तो नहीं हो रहा. एक अकाउंट में लगातार बहुत महंगे कैमरा इक्विपमेंट खरीदे जा रहे थे. आम तौर पर ऐसा नहीं होता था, इसलिए मैंने क्लाइंट को फोन करके पूछा कि क्या ये सारे ऑर्डर उन्हीं की ओर से किए जा रहे हैं.”

क्लाइंट ने खरीदारी की पुष्टि कर दी, लेकिन हैरी की जिज्ञासा खत्म नहीं हुई.


“मुझे लगा कोई हॉलीवुड डायरेक्टर होगा”


हैरी ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर कैमरा उपकरण खरीदे जाते देखकर उन्हें लगा कि सामने वाला व्यक्ति संभवतः हॉलीवुड का कोई अभिनेता, निर्माता या निर्देशक होगा.

उन्होंने क्लाइंट से पूछा कि वह आखिर ऐसा क्या काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें इतने कैमरों और उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है.

हैरी के मुताबिक, जवाब मिला—“मैं यूट्यूब के लिए वीडियो बनाता हूं.”

इसके बाद जब हैरी ने उनसे नाम पूछा, तो उन्हें बताया गया कि वह MrBeast हैं.

हैरी उप्पल ने इंटरव्यू में दावा किया कि यह उस दौर की बात है, जब मिस्टर बीस्ट आज जितने बड़े वैश्विक क्रिएटर नहीं बने थे. उनके अनुसार, उस पेशेवर कॉल के दौरान मिस्टर बीस्ट ने उन्हें यूट्यूब से कमाई, वीडियो की रणनीति और कंटेंट से जुड़े कुछ टूल्स के बारे में विस्तार से समझाया.

उन्होंने कहा, “उन्होंने करीब दो घंटे का समय दिया. एक कीवर्ड टूल के बारे में बताया और उसका इनवाइट मेरे आधिकारिक ईमेल पर भेजा था. उसका स्क्रीनशॉट आज भी मेरे पास सुरक्षित है.”


मिस्टर बीस्ट की रणनीति से मिला निवेश का सबक


हैरी के अनुसार, मिस्टर बीस्ट उस समय अपने कंटेंट से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा दोबारा वीडियो प्रोडक्शन में लगा रहे थे.

इस बातचीत से उन्हें एहसास हुआ कि सफल कंटेंट क्रिएशन केवल कैमरे के सामने आने का काम नहीं है. इसमें योजना, तकनीक, डेटा, दर्शकों की समझ और लगातार निवेश की आवश्यकता होती है.

हैरी ने बताया, “मुझे लगा कि अगर सामने वाला अपने काम में इतना पैसा लगा रहा है, तो मुझे भी बिना तैयारी के नहीं उतरना चाहिए. इसके बाद मैंने अपनी सेविंग शुरू कर दी.”


चार साल तक सेविंग, फिर ₹26 लाख की नौकरी को अलविदा


हैरी ने बताया कि उन्होंने लगभग चार वर्षों तक आर्थिक तैयारी की.

वर्ष 2016 में उनका सालाना पैकेज करीब ₹26 लाख था, लेकिन उन्होंने गुरुग्राम की नौकरी छोड़कर अपने घर लौटने और पूर्णकालिक रूप से कंटेंट बनाने का फैसला किया.यह निर्णय केवल नौकरी छोड़ने तक सीमित नहीं था. उन्हें कैमरा चलाना, शूटिंग करना, फ्रेम बनाना और वीडियो की कहानी तैयार करना भी खुद सीखना पड़ा.

उन्होंने कहा, “मैंने यूट्यूब और इंटरनेट से सीखा कि कैमरा एंगल क्या होता है और वीडियो कैसे बनाया जाता है. मिस्टर बीस्ट से उस कॉल के बाद दोबारा कोई बात नहीं हुई, क्योंकि वह बैंक के क्लाइंट थे और वह एक प्रोफेशनल बातचीत थी.”


1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में लगे करीब तीन साल


आज किसी सफल क्रिएटर के लाखों फॉलोअर्स दिखाई देते हैं, लेकिन उसके शुरुआती वर्षों का संघर्ष अक्सर कैमरे के पीछे रह जाता है.

हैरी उप्पल ने बताया कि लगभग 1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में उन्हें ढाई से तीन साल का समय लग गया था.

इस दौरान परिचितों और आसपास के लोगों की टिप्पणियां भी मानसिक दबाव बढ़ाती थीं.

उन्होंने कहा, “लोग कहते थे कि तुम्हारी वीडियो देखी, उसमें दस लाइक आए थे. किसी वीडियो पर तीन लाइक थे और उनमें से एक लाइक मेरा अपना था. ऐसी बातें खराब जरूर लगती थीं, लेकिन मैंने काम बंद नहीं किया.”

शुरुआती दौर में हैरी एक बैग लेकर अलग-अलग जगहों पर लोगों से बात करने निकलते थे. कैमरा और बैग देखकर कई दुकानदारों को लगता था कि शायद वह गूगल मैप या किसी सर्वे टीम से आए हैं. इस कारण लोग खुलकर बात करने से भी हिचकिचाते थे.


पहली कमाई ₹25 हजार, अगले महीने पहुंची ढाई लाख


हैरी ने बताया कि यूट्यूब से उनकी पहली उल्लेखनीय कमाई लगभग ₹25 हजार से ₹27 हजार के बीच हुई थी.

जब उन्होंने यह बात अपने पिता को बताई तो उनके पिता ने गर्व से कहा कि यदि हर महीने इतनी कमाई होने लगे, तो उन्हें घर से जेब खर्च लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

हैरी के अनुसार, इसके अगले ही महीने उनकी आमदनी बढ़कर लगभग ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई. उस समय उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब सात हजार फॉलोअर्स थे.उनके लिए यह केवल कमाई नहीं थी. यह इस बात का प्रमाण था कि वर्षों की तैयारी, बचत और संघर्ष के बाद उनका फैसला परिणाम देना शुरू कर चुका था.


बचपन की चुनौती ने मुश्किल दौर में दिया साहस


हैरी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चुनौतियां पसंद रही हैं. बचपन में बढ़े हुए वजन के कारण उन्हें लोगों की टिप्पणियां और बुलिंग सहनी पड़ी थी. इसके बाद उन्होंने खुद को फिट बनाने का निर्णय लिया.

उन्होंने कहा कि उस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि किसी कठिन परिस्थिति को शिकायत के बजाय चुनौती की तरह स्वीकार किया जा सकता है.

यही मानसिकता उन्हें कंटेंट क्रिएशन के शुरुआती वर्षों में भी आगे बढ़ाती रही.


नए क्रिएटर्स को सलाह—वही कीजिए जो कोई और नहीं कर रहा


कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में प्रवेश करने वाले युवाओं को सलाह देते हुए हैरी ने कहा कि आज केवल दूसरों की नकल करके लंबे समय तक सफलता हासिल नहीं की जा सकती.

उन्होंने कहा, “जो कोई और नहीं कर रहा है, आपको वह करना चाहिए। मेरे शुरुआती कंटेंट की स्टोरीटेलिंग अलग थी. कंटेंट की कोई तय रूलबुक नहीं है. यहां आपको प्रयोग करने की पूरी आजादी है.”

हैरी के अनुसार, कैमरा उठाकर अपने आसपास की गलियों, बाजारों, लोगों और कहानियों को रिकॉर्ड करना ही शुरुआत का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है.

उन्होंने कहा, “सिस्टम लिमिटलेस है. संभव है कि कई वर्षों बाद कंटेंट क्रिएशन पर कोई स्थापित रूलबुक लिखी जाए, लेकिन फिलहाल यह एक ऐसी दुनिया है, जहां नया करने की बहुत गुंजाइश है.”


“मुझे दस लाख सब्सक्राइबर में पांच-छह साल लगे, बनारस दो-तीन महीने में कर सकता है”


हैरी उप्पल ने बनारस के स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी बड़ा संदेश दिया.

उन्होंने कहा कि उन्हें दस लाख सब्सक्राइबर तक पहुंचने में लगभग पांच से छह वर्ष लगे, लेकिन बनारस के पास ऐसी संस्कृति, भोजन, गलियां, घाट, लोग और कहानियां हैं कि यहां का कोई गंभीर क्रिएटर सही रणनीति के साथ बहुत तेजी से अपनी पहचान बना सकता है.

उन्होंने कहा, “आप बनारस में हैं. यहां इतना कंटेंट है कि दस लाख सब्सक्राइबर तक पहुंचने के लिए दो-तीन महीने भी काफी हो सकते हैं—बस कहानी कहने का तरीका अलग होना चाहिए.”


एक बैंक कर्मचारी से फूड व्लॉगर बनने की कहानी


हैरी उप्पल की यात्रा केवल एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर सोशल मीडिया पर आने की कहानी नहीं है. यह लंबी आर्थिक तैयारी, असफल शुरुआत, कम व्यूज, लोगों की टिप्पणियों और लगातार प्रयोग करते रहने की कहानी भी है.

बनारस में टमाटर चाट और बाटी-चोखा का स्वाद लेते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में अवसर जरूर हैं, लेकिन सफलता केवल वायरल वीडियो से नहीं आती.उसके पीछे वर्षों का धैर्य, आर्थिक अनुशासन, अलग स्टोरीटेलिंग और उस समय भी काम करते रहने का साहस होता है, जब वीडियो पर आने वाले तीन लाइक्स में से एक लाइक आपका अपना हो.



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इंटरव्यू की प्रमुख बातें


  1. हैरी उप्पल कंटेंट क्रिएशन से पहले अमेरिकन एक्सप्रेस में कार्यरत थे.
  2. वर्ष 2016 में उनका सालाना पैकेज करीब ₹26 लाख था.
  3. उन्होंने एक बैंकिंग कॉल के दौरान मिस्टर बीस्ट से बातचीत होने का दावा किया.
  4. नौकरी छोड़ने से पहले उन्होंने लगभग चार वर्षों तक सेविंग की.
  5. करीब 1,200 सब्सक्राइबर तक पहुंचने में उन्हें ढाई से तीन साल लगे.
  6. पहली उल्लेखनीय यूट्यूब कमाई लगभग ₹25–27 हजार रही.
  7. उनके अनुसार, अगले महीने उनकी कमाई करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई.
  8. बनारस में उन्हें टमाटर चाट, बाटी-चोखा और खिचड़ी सबसे अधिक पसंद आई.


नए क्रिएटर्स को उनकी सलाह है—नकल के बजाय अपनी अलग स्टोरीटेलिंग विकसित करें

30 जुलाई से शुरू होगा बीएचयू विश्वनाथ मंदिर का श्रावण महोत्सव, दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था
30 जुलाई से शुरू होगा बीएचयू विश्वनाथ मंदिर का श्रावण महोत्सव, दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर में श्रावण महोत्सव-2026 का आयोजन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक किया जाएगा। महोत्सव को लेकर मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम दर्शन के लिए महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है। वहीं, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए भी अलग लाइन बनाई गई है।मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रावण मास में रविवार, सोमवार तथा प्रदोष जैसी विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ रहने की संभावना को देखते हुए 30 जुलाई से 28 अगस्त के बीच इन दिनों गर्भगृह में यजमानों का रुद्राभिषेक पूजन प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, सोमवार को छोड़कर अन्य विशेष तिथियों पर भीड़ की स्थिति का आकलन करने के बाद रुद्राभिषेक की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए श्रद्धालुओं को उसी दिन मंदिर कार्यालय से अनुमति प्राप्त करनी होगी।ALSO READ: वाराणसी में कूड़े में मिले सोने के सिक्के, कूड़ा बीनने वाले ने 60 हजार में बेचा एक सिक्काश्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिव्यांगजनों हेतु व्हीलचेयर, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) और शीतल पेयजल की विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर प्रतिदिन प्रातः 4 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा दोपहर 1 बजे से रात्रि 9 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहेगा।मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करते हुए दर्शन करें, ताकि श्रावण महोत्सव के दौरान सभी को सुगमता और सुरक्षित वातावरण में भगवान विश्वनाथ के दर्शन का लाभ मिल सके।
वाराणसी में कूड़े में मिले सोने के सिक्के, कूड़ा बीनने वाले ने 60 हजार में बेचा एक सिक्का
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वाराणसी : शिवपुर थाना क्षेत्र में कूड़ा बीनने वाले एक युवक को कचरे के ढेर में सोने के सिक्के मिलने का मामला सामने आया है. युवक ने इनमें से एक सिक्का 60 हजार रुपये में बेच दिया. सूचना के बाद पुलिस ने छह सिक्के और 45 हजार रुपये नकद जब्त कर लिए. यह घटना क्षेत्र के दुधईया पोखरी इलाके की है, जहां सुरेश का परिवार कूड़ा बीनने का काम करता है.सुरेश के बेटे बबलू ने बताया कि दो दिन पहले वह शिवपुर क्षेत्र की यमुना नगर कॉलोनी के पास कूड़ा बीन रहा था. उसे कचरे के ढेर में एक पॉलिथीन मिली, जिसमें कुछ सिक्के थे. बबलू सिक्कों को घर ले आया, जहां परिवार के सदस्यों ने उन्हें सोने का बताया. इसके बाद बबलू एक ज्वैलर्स के पास गया और उसने एक सिक्का 60 हजार रुपये में बेच दिया. परिजनों को बाद में पता चला कि ये सिक्के काफी कीमती हैं. इसी बीच, बस्ती के पास क्लीनिक चलाने वाले एक डॉक्टर ने भी दो सिक्के ले लिए और बाद में पैसे देने की बात कही.ALSO READ: आईआईटी बीएचयू में परिचय कार्यक्रम, 7 दिनों तक छात्रों की हर समस्या का विशेषज्ञ करेंगे हल...धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई और पुलिस तक पहुंच गई. बबलू के भाई राजकुमार ने बताया कि कुल सात सिक्के मिले थे. इनमें से एक बेचा जा चुका था और दो डॉक्टर के पास थे. बुधवार को पुलिस बस्ती में पहुंची और घर से चार सिक्के, डॉक्टर से दो सिक्के और 45 हजार रुपये नकद कब्जे में ले लिए. राजकुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें चोरी के मुकदमे में जेल भेजने की धमकी भी दी. वहीं, इस मामले में शिवपुर थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा ने बताया कि चार सोने के सिक्के मिले हैं और मामले की जांच की जा रही है. नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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वाराणसी : आईआईटी बीएचयू में नव प्रवेशी स्‍नातक छात्रों के लिए परिचय कार्यक्रम - 2026 की शुरूआत बुधवार को स्वतंत्रता भवन में की गई. कार्यक्रम के पहले दिन संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने नए विद्यार्थियों के अभिभावकों से संवाद करते हुए उनका संस्थान परिवार में स्वागत किया, उनकी जिज्ञासाओं और शंकाओं का विस्तारपूर्वक समाधान किया. अपने संबोधन में प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि आईआईटी (बीएचयू) केवल उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान ही नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं मानवीय मूल्यों के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है.उन्होंने कहा कि संस्थान छात्रों को विश्वस्तरीय शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि छात्रों की शैक्षणिक प्रगति, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के लिए संस्थान में सुदृढ़ एवं संवेदनशील व्यवस्था उपलब्ध है. संवाद सत्र के दौरान अभिभावकों ने शैक्षणिक व्यवस्था, छात्रावास, सुरक्षा, मेंटरशिप, अनुसंधान, प्लेसमेंट, छात्र कल्याण तथा परिसर जीवन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे. निदेशक ने सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए अभिभावकों को आश्वस्त किया कि संस्थान प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, सकारात्मक एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी दिनों में विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक प्रणाली, अनुसंधान संस्कृति, छात्र सहायता सेवाओं, खेल, संस्कृति, नवाचार तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से परिचित कराया जाएगा. 30 जुलाई को नवप्रवेशी छात्रों का पंजीकरण होगा. इसके बाद स्वतंत्रता भवन में चेयरमैन-जेईई, डीन (अकादमिक अफेयर्स), प्रोफेसर इंचार्ज (ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट) तथा डीन (रिसोर्स एंड एलुमनाई) विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे. इस दौरान उन्हें संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट की संभावनाओं तथा पूर्व छात्रों के नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की जाएंगी.31 जुलाई को विभिन्न विभागों एवं स्कूलों में विभागीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबंधित विषयों की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों से अवगत कराएंगे. इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को डीन (स्टूडेंट्स अफेयर्स), चेयरमैन-सीओडब्ल्यू, डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) तथा मुख्य प्रॉक्टर द्वारा संस्थान की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं छात्र जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाएगी. कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों का डायग्नोस्टिक टेस्ट भी आयोजित होगा.1 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए प्रातःकालीन कैंपस वॉक आयोजित होगी. इसके बाद वे अपने-अपने विभागों में अनुसंधान प्रयोगशालाओं एवं अन्य सुविधाओं का भ्रमण करेंगे. शाम को स्वतंत्रता भवन में कमांडर वीरेंद्र कुमार जेटली का प्रेरक व्याख्यान आयोजित किया जाएगा, जो विद्यार्थियों को जीवन, अनुशासन और नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश देंगे.2 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए शारीरिक एवं टीम-बिल्डिंग गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. इसके पश्चात काउंसलिंग प्रोफेशनल्स (CP), पीयर मेंटर्स के साथ संवाद सत्र आयोजित होंगे, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक एवं सामाजिक वातावरण में सहजता से स्वयं को स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है.3 अगस्त को विद्यार्थियों का परिचय संस्थान की विभिन्न छात्र परिषदों एवं गतिविधियों से कराया जाएगा। इस दौरान स्टूडेंट काउंसलिंग सर्विसेज (SAKHA), स्टूडेंट्स पार्लियामेंट, फिल्म एवं मीडिया काउंसिल, सांस्कृतिक परिषद तथा सोशल सर्विस काउंसिल अपनी गतिविधियों से विद्यार्थियों को अवगत कराएंगी. कार्यक्रम के अंत में विभिन्न छात्र संगठनों एवं क्लबों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी.4 अगस्त को साइंस एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल, गेम्स एंड स्पोर्ट्स काउंसिल, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल, स्टूडेंट एलुमनाई इंटरैक्शन सेल (SAIC), पीआर सेल, ई-सेल, रिसर्च सेल तथा संस्थान के काउंसलर्स विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों, सुविधाओं एवं छात्र सहायता तंत्र की जानकारी देंगे, दिन का समापन छात्र गतिविधियों से संबंधित स्टॉल प्रदर्शनी के साथ होगा.5 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए संस्थान का व्यापक कैंपस विजिट आयोजित किया जाएगा. इस दौरान उन्हें आईआईटी (बीएचयू) के प्रमुख शैक्षणिक विभागों, केंद्रीय अनुसंधान सुविधाओं, पुस्तकालय, छात्र गतिविधि केंद्र, नवाचार एवं उद्यमिता केंद्र सहित संस्थान के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसके पश्चात विभागों में फैकल्टी मेंटर्स द्वारा फीडबैक सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी अपने अनुभव साझा कर सकें.8 अगस्त को ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम का समापन "डिनर विद फ्रेशर्स" के साथ होगा, जिसमें संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी एक साथ सहभागिता करेंगे.ALSO READ:पुलिस का बड़ा एक्शन अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ 5 आरोपी गिरफ्तार...यह आयोजन विद्यार्थियों और संस्थान प्रशासन के बीच आत्मीय संवाद स्थापित करने तथा संस्थान परिवार के साथ उनके जुड़ाव को और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगा. सप्ताहभर चलने वाला यह ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन प्रोग्राम नवप्रवेशित विद्यार्थियों को आईआईटी (बीएचयू) की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान परंपरा, नवाचार संस्कृति, छात्र सहायता प्रणाली, खेल, सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा जीवंत परिसर जीवन से परिचित कराएगा. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करते हुए उन्हें एक सफल, संतुलित एवं प्रेरणादायी शैक्षणिक यात्रा के लिए तैयार करना है.