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वाराणसी में अस्‍पताल की नींव खोदते समय मिट्टी में दबकर मजदूर की मौत, परिवार का था इकलौता

वाराणसी में अस्‍पताल की नींव खोदते समय मिट्टी में दबकर मजदूर की मौत, परिवार का था इकलौता
Jan 10, 2026, 06:21 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : सारनाथ थाना क्षेत्र के फरीदपुर रिंग रोड स्थित खजूही गांव में एक निर्माणाधीन अस्पताल की नींव खोदाई की दौरान मिट्टी में दबने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई्. घटना शुक्रवार दोपहर बाद की बताई जा रही है. मजदूर की पहचान 32 वर्षीय पन्नालाल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से सोनभद्र जिले के म्योरपुर थाना क्षेत्र का निवासी था. यह हादसा श्रीराम न्यूरो अस्पताल की दूसरी शाखा के निर्माण स्थल पर हुआ, जहां मिट्टी दरकने से वहां काम कर रहा पन्नालाल अचानक ऊपर से गिरे मिट्टी के ढेर में दब गया. अन्य मजदूरों ने उन्हें किसी तरह बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड दिया था.


दोपहर करीब 1 बजे पन्नालाल बेसमेंट में काम कर रहे थे. अचानक मिट्टी का ढेर भरभराकर गिर गया, जिससे वह पूरी तरह दब गए. साथी मजदूरों ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी. मौके पर पहुंचे सारनाथ थाने के दरोगा राहुल यादव ने बताया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा प्रतीत होता है. निर्माण स्थल पर लगे ठेकेदार और अन्य मजदूरों से पूछताछ की जा रही है. मजदूर के शव काे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. मृतक के पिता शिव शंकर की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है.


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पन्ना लाल अपने पिता का इकलौता पुत्र था और उसकी शादी दो वर्ष पूर्व आरती से हुई थी. उनके एक साल की एक बच्ची भी है. इस घटना ने परिवार में शोक की लहर दौड़ा दी है, क्योंकि पन्ना लाल की आकस्मिक मृत्यु ने उसके परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है.

प्‍लाट खरीदने और निर्माण से पहले VDA से कर लें ये जानकारी, हर महीने 120 ले आउट स्‍वीकृत
प्‍लाट खरीदने और निर्माण से पहले VDA से कर लें ये जानकारी, हर महीने 120 ले आउट स्‍वीकृत
वाराणसी: जिले में प्‍लाट खरीदने और निर्माण से पहले विकास प्राधिकरण वाराणसी से ले आउट के बारे में जानकारी कर लें. ऐसा नहीं करने पर नुकसान उठाना पडा सकता है. वीडीए की ओर से हर महीने 120 ले आउट स्वीकृत किए जा रहे हैं. बीते चार माह में 480 ले आउट स्वीकृत किए गए हैं. वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने कहा कि लेआउट एवं मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध बनाया गया है ताकि आम जनमानस को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्लॉट के खरीदने, निर्माण से पूर्व यह अवश्य सुनिश्चित करें कि संबंधित लेआउट वीडीए से स्वीकृत है या नहीं ताकि उनका निवेश सुरक्षित रहे. उन्होंने कहा कि अधिनियम एवं प्राधिकरण की समस्त कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंडात्मक नहीं बल्कि शहर का विकास और सुरक्षा है.यह भी पढ़ें: खत्म होने के सफर पर ईरान और अमेरिका की जंग, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रखी ये शर्तें...हो सकती है कठोर कार्रवाई बताया कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 14/15 के तहत मानचित्र स्वीकृति के बिना निर्माण किए जाने की स्थिति में वीडीए सीलिंग, ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई कर सकता है. ऑनलाइन माध्यम से न्यू बिल्डिंग मानचित्र की स्वीकृति 15 दिवस के भीतर प्रदान की जा रही है. साथ ही जिन नागरिकों की ओर से पूर्व में बिना अनुमति के निर्माण किया गया है वे भी शमन प्रक्रिया से भवनों को वैध करा सकते हैं.बेहतर संचालन के निर्देशनगर आयुक्त हिमांशु नागपाल द्वारा भेलूपुर क्षेत्र के भवनियां पोखरी स्थित MRF (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर एवं वेस्ट टू एनर्जी प्लांट एरिया का स्थलीय निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त द्वारा एमआरएफ सेंटर के वर्तमान स्थल को अपर्याप्त बताते हुए इसके विस्तार एवं बेहतर संचालन के दृष्टिगत इसे वर्तमान स्थान से स्थानांतरित कर शंकुल धारा स्थित ट्रांसफर स्टेशन के समीप उपलब्ध उपयुक्त रिक्त भूमि पर नया सेंटर स्थापित किए जाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए.इसी क्रम में नगर आयुक्त ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित करने पर विशेष जोर देते हुए डोर-टू-डोर कचरा संकलन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि पर्याप्त मात्रा में वेस्ट की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और प्लांट का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके.
खत्म होने के सफर पर ईरान और अमेरिका की जंग,  
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रखी ये शर्तें...
खत्म होने के सफर पर ईरान और अमेरिका की जंग, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रखी ये शर्तें...
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे जंग का आज 13वां दिन है. जिसमें कई लोगों की जान चली गई तो कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गये हैं. जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है. इस महायुद्ध में ना जाने कितने लोगों का घर तक तबाह हो चुका है. इस संघर्ष में कई दिनों से पश्चिमी एशिया सुलगने को मजबूर हो चुका है. तो दूसरी ओर ईरान की तरफ से इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करने का दावा किया जा रहा है. लेकिन इन दावों के पीछे ईरान के नवनियुक्त मोजतबा खामेनेई की सरकार ने इस जंग को खत्म करने के लिए तीन शर्तें बताई हैं. जहां ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि, युद्ध को खत्म करने के लिए किसी भी प्रस्ताव में ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए और यह गारंटी दी जानी चाहिए कि, देश पर आने वाले भविष्य में हमले नहीं होंगे.ईरान ने की नुकसान के भरपाई की मांग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर पोस्ट कर प्रेसिडेंट मसूद पेजेशिकियन ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की भी मांग की है. इसी के आगे पेजेशिकियन ने ये भी लिखा कि, रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करके मैंने इस इलाके में शांति के लिए ईरान के वादे को फिर से पक्का किया है. यहूदी शासन और US की ओर शुरू की गई इस लड़ाई को खत्म करने का इकलौता तरीका ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की इंटरनेशनल गारंटी देना ही होगा. अगर इन तीनों शर्तों को मान लिया जाता है तो ईरान की राजधाना तेहरान इस जंग को समाप्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश ईरानी राष्ट्रपति ने इन सभी के बीच कहा कि, मौजूदा संघर्ष की शुरूआत "जायनिस्ट शासन और अमेरिका" की कार्रवाई से हुई. उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक के लिए इस महायुद्ध को खत्म करना बिलकुल भी संभव नहीं होगा. ईरान इन देशों सहित अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है.यह भी पढ़ें: मेटा AI के खिलाफ शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोपईरान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब युद्ध दूसरे हफ्ते में पहुंच चुका है. फिलहाल, तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे. तेहरान का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है, इसलिए वो इस युद्ध को अब विराम देनी की चाहत में है. लेकिन इसके लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना जरूरी है.जाने कब छिड़ी जंग दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी ये जंग बीते 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था. जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से एहतियाती हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल दागे. इसके अलावा जॉर्डन, इराक और खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में इस बढ़ते तनाव के चलते हालात बद से बत्तर होते नजर आ रहे हैं.
मेटा AI के खिलाफ शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोप
मेटा AI के खिलाफ शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोप
वाराणसी: इंटरनेट नेटवर्किंग साइट मेटा AI के खिलाफ अवर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय की अदालत में प्रकीर्ण वाद दाखिल किया गया है. अदालत ने सारनाथ थाने से रिपोर्ट तलब की है. अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है. सारनाथ थाना क्षेत्र के तिलमापुर निवासी याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्र के अधिवक्ता ने बताया कि गलत जानकारी देने से जुडा ये देश का पहला मामला है जिसे अदालत तक लाया गया. इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में एक मामला मेटा से जुड़ा पहुंचा था जिसमें गोपनीयता भंग करने का आरोप लगा था.मेटा AI की ओर से मांगी माफी नागेश्वर मिश्र का कहना है कि मेटा एआई स्वयं को ऐसा मंच बताता है जिसके पास दुनिया की हर जानकारी है. उन्होंने एआई से कुछ सवाल पूछे, लेकिन उन्हें गलत जानकारी मिली. इस पर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दी गई जानकारी गलत है और इस पर मुकदमा भी किया जा सकता है. वाद में उल्लेख है कि इस पर मेटा एआई की ओर से माफी मांगते हुए गलती सुधारने और आगे सही जानकारी देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन दोबारा प्रश्न पूछने पर फिर से गलत जानकारी दी गई. क्षुब्ध होकर अदालत में धारा 173 (4) के तहत प्रकीर्ण वाद दाखिल कर दिया.यह भी पढ़ें: संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगारमेटा एआई से पूछा शिव पार्वती का विवाह कब हुआसवाल- नागेश्वर मिश्रा ने पूछा कि शिव जी का विवाह किस महीने में हुआ है. मेटा का जवाब- शिव जी का विवाह फाल्गुन महीने में हुआ था. कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. यह दिन भगवान शिव की पूजा और उपासना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.क्यों न मेटा AI पर मुकदमा किया जाएमेटा- मैं अपनी गलती के लिए माफी चाहता हूं. शिव जी का विवाह फाल्गुन महीने में नहीं हुआ था, बल्कि महाशिवरात्रि के दिन हुआ था, जो फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को नहीं, बल्कि माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. लेकिन विवाह की तिथि के बारे में विभिन्न मत हैं और कुछ स्रोतों के अनुसार, शिव जी का विवाह वैशाख महीने में हुआ था.