अब खत्म झंझट: इलेक्ट्रीक बसों के उपयोग से जलवायु परिवर्तन की समस्या होगी नियंत्रित

Now the hassle is over: Using electric buses will control the problem of climate change
वाराणसी: क्लाइमेट एजेंडा की नई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि साइकिल और बसों के उपयोग से जलवायु परिवर्तन की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है. इस रिपोर्ट का लोकार्पण 23 अप्रैल 2026 को आईआईटी बीएचयू वाराणसी में हुआ, जहां पटना और लखनऊ के परिवहन क्षेत्र से संबंधित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए गए. इस कार्यशाला का आयोजन आईआईटी बीएचयू के सिविल अभियांत्रिकी विभाग के सभागार में किया गया, जिसमें शुक्रवार को विभिन्न सत्र आयोजित किए गए.

उद्घाटन सत्र में आईआईटी बीएचयू के कार्यकारी निदेशक प्रो. निलय कृष्ण मुखोपाध्याय, वर्चुअल सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के अध्यक्ष प्रो. विकास कुमार दुबे और अन्य प्रमुख विद्वान उपस्थित रहे. पहले सत्र में क्लाइमेट एजेंडा द्वारा दोनों रिपोर्टों का लोकार्पण किया गया, जिसमें वाराणसी स्मार्ट सिटी मिशन के चीफ जनरल मैनेजर अमरेन्द्र तिवारी और अन्य विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया.
रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में 2025 में परिवहन क्षेत्र से कुल 15.8 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होने का अनुमान है, जिसमें डीजल ट्रकों का योगदान 56 प्रतिशत है. पटना में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 2030 तक केवल डीजल ट्रक 7,54,580 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करेंगे. यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि जिन वाहनों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, वे ही सबसे बड़े प्रदूषक हैं.

लाखों मीट्रिक टन उत्सर्जन में आएगी कमी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि केवल 10 प्रतिशत लोग छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करें और दो-पहिया वाहनों का 80 प्रतिशत विद्युतीकरण हो जाए, तो दोनों शहरों में लाखों मीट्रिक टन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है. यह रिपोर्ट हरित सफर अभियान के तहत क्लाइमेट एजेंडा द्वारा प्रायोजित की गई है, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश और बिहार के टियर दो और टियर तीन शहरों में स्वच्छ और समावेशी शहरी परिवहन को बढ़ावा देना है.
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रिपोर्ट के कुछ प्रमुख निष्कर्ष को जारी किया. बताया गया कि लखनऊ में 2025 में परिवहन क्षेत्र से 15.8 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होगा, जिसमें डीजल ट्रकों का योगदान 56 प्रतिशत रहा. पटना में 2030 तक केवल डीजल ट्रक 7,54,580 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित कर रहे हैं. लखनऊ में 2030 तक दो-पहिया वाहन 3,59,357 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित कर रहे हैं. पटना की जनसंख्या 2025 में लगभग 26-27 लाख होने का अनुमान है, जो 2030 तक 32 लाख से अधिक हो सकती है.



