सोशल मीडिया ने विदेशी नागरिक को अपनों से मिलाया, रोजगार की तलाश लाई थी खींच

Social media reunited a foreign national with his loved ones, drawing him in search of employment.
वाराणसी: कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में शुक्रवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. नेपाल के झापा जिले से आए 56 वर्षीय संत विश्वकर्मा, जो लावारिस हालत में अस्पताल के वार्ड नंबर सात में भर्ती थे, उनकी बेटी सोनिया ने उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया. बिछड़े पिता-बेटी का यह मिलन अस्पताल के स्टॉफ और वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गया.

रोजगार की तलाश में निकले संत विश्वकर्मा
संत विश्वकर्मा अपने दो साथियों पसांग तममंग और सूरज तममंग के साथ साढ़े तीन महीने पहले गुजरात के राजकोट जिले में रोजगार की तलाश में निकले थे. रेलवे यात्रा के दौरान जहरखुरानी की घटना हुई, जिससे वे बेहोश हो गए और अपने साथियों से बिछड़ गए. असहाय अवस्था में भटकते हुए वे वाराणसी पहुंचे, जहां स्थानीय लोगों ने उन्हें लावारिस हालत में मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में भर्ती कराया. उस समय वे बोलने की स्थिति में भी नहीं थे.

साथियों पर हत्या का संदेह
नेपाल लौटे दोनों साथियों ने जब घटना का विवरण परिवार को बताया, तो संत विश्वकर्मा की बेटी सोनिया को यकीन नहीं हुआ. उसे शक हुआ कि दोनों ने उसके पिता की हत्या कर दी है. लंबी तलाश के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार में दुख और आशंका बढ़ गई. इसी बीच अस्पताल में समाजसेवी अमन कबीर की मुलाकात संत विश्वकर्मा से हुई. अमन कबीर, जो लावारिस मरीजों की मदद के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, उन्होंने बुजुर्ग की सेवा शुरू की और उनकी हालत की एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा की. यही वीडियो कहानी की टर्निंग प्वाइंट साबित हुई.

वीडियो देख बेटी ने पहचाना
वीडियो देखते ही सोनिया ने अपने पिता को पहचान लिया और तुरंत अमन कबीर से संपर्क किया. शुक्रवार सुबह वह वाराणसी पहुंची और अस्पताल में अपने पिता को देखते ही उनसे लिपटकर जोर-जोर से रोने लगी.

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यह दृश्य इतना मार्मिक था कि आसपास खड़े डाक्टर, नर्स और अन्य लोग भी भावुक हो गए. काफी देर रोने के बाद जब सोनिया संभली, तो उसने अमन कबीर का आभार जताया. सोनिया के साथ उसके चाचा महंत छत्र गिरी भी मौजूद थे. साथ ही संत विश्वकर्मा के दोनों साथी पसांग तममंग और सूरज तममंग भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अमन कबीर को धन्यवाद देते हुए कहा कि अगर यह मिलन नहीं होता, तो उन पर हत्या का आरोप लग जाता.



