गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बिरला ‘C’ छात्रावास के एमए फ्रेंच द्वितीय वर्ष के छात्र राम के साथ शनिवार देर रात गंभीर दुर्घटना हो गई। घायल अवस्था में छात्र को तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। छात्रावास के विद्यार्थियों ने ट्रॉमा सेंटर में उपचार में कथित देरी और अस्पताल कर्मियों व प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
छात्रों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद राम को रात करीब 12 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें तत्काल आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। आरोप है कि उनके गंभीर घाव पर कई घंटों तक टांके नहीं लगाए गए और उपचार की प्रक्रिया में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई।
सुबह घायल छात्र का हाल जानने और उपचार में मदद के लिए बिरला ‘C’ छात्रावास के कई छात्र ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल कर्मियों से तत्काल इलाज शुरू करने का आग्रह किया, लेकिन इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। छात्रों ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे लहजे में कहा गया कि इलाज नहीं करेंगे, जो करना है कर लें।
छात्रों के अनुसार, दुर्घटना के करीब 12 घंटे बाद लगातार मांग और चिकित्सकों से हस्तक्षेप की अपील के बाद राम का उपचार शुरू हुआ। बाद में उसके गंभीर घाव पर 29 टांके लगाए गए। छात्रों ने उपचार में हुई इस कथित देरी को गंभीर मामला बताते हुए पूरी मेडिकल टाइमलाइन और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
मामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि स्थिति को शांत करने और उनकी बात सुनने के बजाय अधिकारियों ने उनसे कथित तौर पर अभद्र भाषा में बात की। छात्रों ने धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति उत्पन्न होने का भी आरोप लगाया है।
छात्रों का यह भी दावा है कि घायल छात्र राम के लिए कथित रूप से असंवेदनशील भाषा का इस्तेमाल किया गया और उसे ‘लावारिस’ कहकर संबोधित किया गया। इसको लेकर छात्रों ने नाराजगी जताई है।
छात्रों के मुताबिक, जब उन्होंने उपचार में देरी और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों से सवाल किए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी दौरान पुलिस को मौके पर बुलाया गया। छात्रों का आरोप है कि बाद में घटना को इस तरह पेश करने का प्रयास किया गया कि छात्रों ने प्रॉक्टर के साथ मारपीट की। छात्र समुदाय ने इस आरोप को गलत बताते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उपचार पूरा होने से पहले डिस्चार्ज करने का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया कि घायल राम को उचित उपचार पूरा हुए बिना डिस्चार्ज करने का प्रयास भी किया गया। विरोध के बाद उन्हें दोबारा भर्ती किया गया। छात्रों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि करीब तीन बजे चिकित्सक उपलब्ध होंगे।
प्रशासनिक वार्डन ने संभाली स्थिति
घटना के दौरान तनाव बढ़ने पर प्रशासनिक वार्डन मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया। इसके बाद छात्रों को छात्रावास वापस भेजा गया, ताकि अस्पताल परिसर में तनाव कम हो और घायल छात्र के उपचार पर ध्यान दिया जा सके।
छात्र समुदाय ने प्रशासनिक वार्डन की पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए मामले में आगे निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
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छात्रों की प्रमुख मांगें
छात्रों ने राम के उपचार में हुई कथित देरी और लापरवाही की स्वतंत्र जांच, दुर्घटना से उपचार शुरू होने तक की मेडिकल टाइमलाइन व अस्पताल रिकॉर्ड की जांच, अस्पताल कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार की जांच तथा प्रॉक्टोरियल अधिकारियों और छात्रों के बीच हुई कथित धक्का-मुक्की की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इसके अलावा छात्रों ने घायल विद्यार्थी को उसकी स्थिति के अनुरूप पूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और भविष्य में किसी भी घायल छात्र को समय पर प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि घायल विद्यार्थी के उचित उपचार और सम्मान की रक्षा करना है।



