अंबेडकर जयंती: बाबा साहेब का जीवन संघर्ष और दूरदृष्टि का अद्वितीय उदाहरण

वाराणसी: भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मंगलवार को चिकित्सा विज्ञान संस्थान स्थित के.एन. उडुप्पा सभागार में “बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर: समावेशी भारत के निर्माण में शिक्षा, न्याय व समानता की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष और दूरदृष्टि का अद्वितीय उदाहरण है.

उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण में उनकी भूमिका ने देश को समान अवसर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय का सशक्त आधार प्रदान किया. उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर शिक्षा के माध्यम से अपना विशिष्ट स्थान बनाया. भारतीय संविधान के निर्माण में ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उनका योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा.
समाज विकास के लिए सकारात्मक आलोचना आवश्यक
प्रो. चतुर्वेदी ने “प्रैग्मैटिज़्म एवं कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज़्म” पर बल देते हुए कहा कि समाज के विकास के लिए व्यावहारिक सोच और सकारात्मक आलोचना आवश्यक है. उन्होंने विद्यार्थियों के बीच बाबा साहेब के विचारों के व्यापक प्रसार हेतु क्विज एवं विशेष व्याख्यान आयोजित करने का भी सुझाव दिया. मुख्य अतिथि श्री मुकेश कुमार मेश्राम (आईएएस), अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि शिक्षा ही वास्तविक क्रांति का माध्यम है, जो विचारों के जरिए समाज को बदलती है. उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच, आत्मज्ञान और अपने सामर्थ्य को पहचानने की प्रेरणा दी तथा समावेशी समाज के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता और बड़े सपने देखने पर बल दिया.

मुख्य वक्ता, प्रो. एम.पी. अहिरवार, विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, कला संकाय, बीएचयू, ने बाबा साहेब के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक योगदानों की चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें केवल एक वर्ग विशेष तक सीमित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कृषि को उद्योग का दर्जा देने, संसाधनों के राष्ट्रीयकरण, महिला सशक्तिकरण तथा राष्ट्रीय एकता से जुड़े उनके विचारों को विस्तार से प्रस्तुत किया.
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विशिष्ट अतिथि, प्रो. एस.एन. संखवार, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, ने कहा कि बाबा साहेब के जीवन से अनुशासन, अध्ययनशीलता एवं कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि केवल संगोष्ठियां आयोजित करने से आगे बढ़कर बाबा साहेब के विचारों को दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता है. कार्यक्रम के संयोजक प्रो. बी. राम, द्रव्यगुण विभाग, आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा संस्थान की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की जानकारी दी.

इस अवसर पर अर्हत फाउंडेशन (ARHAT Foundation) द्वारा समाज के वंचित वर्ग के 10 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई. कार्यक्रम में केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा उपस्थित रही. अंत में श्री जितेन्द्र कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया.



