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संरक्षक की भूमिका निभाने वाले मेला, मंदिर से भी पशु पहुंच रहे कत्लखाने...

संरक्षक की भूमिका निभाने वाले मेला, मंदिर से भी पशु पहुंच रहे कत्लखाने...
Jul 12, 2026, 09:11 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसीः पशुओं के सरंक्षण में मंदिरों व मेला का बहुता महत्व है. भारत में पशुओं के संरक्षक, कल्याण और व्यापार से जुड़े कई प्रमुख मंदिर और ऐतिहासिक पशु मेला हैं. इनका उद्देश्य मानव जीवन के लिए उपयोगी गोवंश को संरक्षित करना है. तस्करों ने इन्हें भी नहीं छोड़ा है. कुछ मंदिर व मेलों के जरिए भी पशु कत्लखाने पहुंच रहे हैं. गो तस्करी रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे गो ज्ञान फाउंडेशन ने ऐसे कई जगहों से पशुओं को रिकवर करके सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है.


पूरे देश में पशु मेला का आयोजन न केवल पशुओं के रक्षक और पोषण के प्रतीक है, बल्कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है. बिहार का सोनपुर पशु मेला विश्व प्रसिद्ध है. गंगा और गंडक नदी के संगम पर स्थित यह एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है. हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले इस मेले की शुरुआत हरिहरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होती है. उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना तट पर स्थित बटेश्वर में 101 प्राचीन मंदिर हैं.


यह स्थान बटेश्वर महादेव को समर्पित है जहां कार्तिक माह में विशाल पशु मेला आयोजित किया जाता है. इस पशु मेला को बटेश्वर मेला के नाम जाना जाता है. राजस्थान का पुष्कर मेला विश्व प्रसिद्ध है. इसकी शुरुआत ब्रह्मा मंदिर के दर्शन और पवित्र सरोवर में डुबकी लगाने से होती है. यहां ऊंट, घोड़ों और मवेशियों का सबसे बड़ा व्यापार होता है. राजस्थान के ही पाली ज़िले के सांडेराव में निम्बेश्वर महादेव पशु मेला का आयोजन किया जाता है.


इस ऐतिहासिक मेले में पुंगनूर और गिर जैसी दुर्लभ नस्ल के गोवंश का संरक्षण और प्रदर्शनी होती है. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बलिया में लगने वाला ददरी मेला भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है. यहाँ दूर-दूर से व्यापारी पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए आते हैं. वहीं पशुओं का संरक्षण करने वाले मंदिरों की बात करें तो वाराणसी में मौजूद काल भैरव मंदिर इसके लिए प्रसिद्ध है. काल भैरव को काशी का कोतवाल और पशुओं का रक्षक माना जाता है. उनकी कृपा के बिना बेज़ुबान जानवरों की सेवा करना असंभव माना जाता है. इसी तरह केरल का


मन्नारसला श्री नागराज मंदिर है. अलप्पुझा में स्थित यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है, जहां श्रद्धालु सांपों की रक्षा और पूजा करते हैं. गो ज्ञान फाउंडेशन के लोगों की मानें तो जिस वक्त में मेला का आयोजन किया जाता है पशु तस्कर पिकप जैसी छोटी गाड़ियों में चार-छह पशुओं को लेकर मेला में शामिल होते हैं. यहां से उन्हें कत्ल करने के लिए कत्लखानों में भेजा जाता है. इस तरह वह पुलिस की पकड़ से बाहर हो जाते हैं. हालांकि यह तरीका पशु तस्करों को थोड़ा महंगा पड़ता है. इस तरीके का उपयोग तभी हो पाता है जब मेला आयोजन का समय होता है. पशु तस्करों को खास ध्यान उत्तर प्रदेश



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और बिहार के पशु मेला पर रहता है. इस दौरान तस्करों की आमद-रफ्त बढ़ जाती है. गो ज्ञान फाउंडेशन के बिहार के कई मेला में कत्ल के लिए लाए गए पशुओं को रिकवर किया. संस्था के लोगों का कहना है कि पटना में एक शिव मंदिर में शिवरात्रि पर स्थानीय लोग पशुओं को भगवान को समर्पित करते हैं. लोग बछड़ा व पड़ाव मंदिर परिसर में ले आते हैं. बलि के रूप में उनके कान का कुछ हिस्सा काटकर उन्हें छोड़ दिया जाता है. उनके खाने-पीने का कुछ इंतजाम नहीं करते हैं. कुछ दिनों बाद मंदिर के जुड़े कुछ लोग इन पशुओं को उन लोगों के हाथों में बेच देते हैं जो उन्हें स्लाटर हाउस तक पहुंचा देते हैं. संस्था ने पिछले साल चार सौ पशुओं को यहां से रिकवर किया था.

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
वाराणसी: मंडुआडीह थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शनिवार तड़के बरेका (बीएलडब्ल्यू) आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया गया।पुलिस के अनुसार, लहरतारा निवासी एक महिला की तहरीर पर 24 जुलाई को आरोपी किशन कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69, 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी।मामले की विवेचना उपनिरीक्षक प्रवीण सचान कर रहे हैं। पुलिस टीम ने 25 जुलाई की रात करीब 12:25 बजे आरोपी किशन कुमार (30), निवासी लहरतारा, को बीएलडब्ल्यू आवासीय परिसर से गिरफ्तार कर लिया।ALSO READ : गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजापूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि युवती से उसकी मित्रता थी और दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वाराणसी छोड़कर जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रवीण सचान, उपनिरीक्षक विवेक यादव, फैंटम-48 के कांस्टेबल अमित कुमार तिवारी तथा कांस्टेबल संदीप शाह शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम  पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
वाराणसी: गुरु पूर्णिमा पर्व पर पड़ाव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह के अवधूत भगवान राम आश्रम में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। 28 और 29 जुलाई को होने वाले आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्र ने शनिवार को आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान एडीसीपी ने यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास मार्ग सहित अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।ALSO READ : काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.पुलिस प्रशासन ने गुरु पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए विशेष ट्रैफिक एवं पार्किंग प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रमुख मार्गों पर यातायात का सुचारु संचालन, पार्किंग स्थलों का निर्धारण तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे गुरु पूर्णिमा का आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.
काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.
वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मनोविज्ञान विभाग में शनिवार को 48वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में 'दहेज मुक्त भारत' विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम में शिक्षकों ने दहेज प्रथा को सामाजिक बुराई बताते हुए युवाओं से इसके खिलाफ जनजागरण का आह्वान किया।मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. शैफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि दहेज प्रथा केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, समानता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध अपराध है। उन्होंने विद्यार्थियों से दहेज न लेने और न देने का संकल्प लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील की।प्रो. रश्मि सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी है। उन्होंने युवाओं से दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।डॉ. मुकेश कुमार पंथ ने कहा कि शिक्षित समाज ही दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। वहीं डॉ. कंचन शुक्ला ने समाज में समानता, महिला सम्मान और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने पर बल दिया।ALSO READ : दालमंडी ध्वस्तीकरण के दौरान सरकारी कर्मचारियों से मारपीट का आरोप, चौक थाने में प्राथमिक दर्जभाषण प्रतियोगिता में जाह्नवी गुप्ता, विकास कुमार, विकास यादव, दीपाली यादव और मोहम्मद आरिफ सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने 'दहेज मुक्त भारत' का सामूहिक संकल्प लिया।कार्यक्रम का स्वागत डॉ. प्रतिभा सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव ने किया