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वाराणसी में तीरंदाजी का महाकुंभ : बड़ालालपुर में पहली बार राष्ट्रीय स्कूल स्पर्धा

वाराणसी में तीरंदाजी का महाकुंभ : बड़ालालपुर में पहली बार राष्ट्रीय स्कूल स्पर्धा
Sep 26, 2025, 04:30 PM
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Posted By Gaandiv



वाराणसी: अध्यात्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी अब खेल जगत में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. गंगा किनारे बसे इस शहर में पहली बार 69वीं राष्ट्रीय स्कूल तीरंदाजी प्रतियोगिता (अंडर-14) का आयोजन होने जा रहा है. यह आयोजन डॉ. भीमराव आंबेडकर क्रीड़ा संकुल, बड़ालालपुर में होगा, जहां देशभर से आने वाले खिलाड़ी अपने हुनर का तीर निशाने पर साधेंगे.


तैयारियों का जायजा


गुरुवार को वाराणसी मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने मैदान की तैयारियों, खिलाड़ियों के अभ्यास स्थल, लक्ष्य (टार्गेट) लगाने की जगह और निर्णायकों की व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया. निरीक्षण के बाद उन्होंने खेल विभाग और जिला ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की. इसमें तय किया गया कि मैदान की सज्जा, दर्शक दीर्घा, खिलाड़ियों के प्रवेश और अतिथियों के स्वागत तक हर पहलू को सुव्यवस्थित किया जाएगा.


43 टीमें होंगी आमने-सामने


इस प्रतियोगिता में देश की 43 टीमें हिस्सा लेंगी. इसमें नन्हे खिलाड़ी पदक जीतने और अपने राज्य का नाम रोशन करने के लिए मैदान में उतरेंगे. प्रतियोगिता को लेकर शहरवासियों में भी खासा उत्साह है, क्योंकि यह पहली बार है जब वाराणसी इतने बड़े स्तर पर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा.


तकनीक से होगी प्रतियोगिता खास


इस आयोजन को खास बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा.


मैदान के विभिन्न हिस्सों में बड़े स्क्रीन लगाए जाएंगे, ताकि दर्शक कहीं से भी प्रतियोगिता का लाइव रोमांच देख सकें.


ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल होगा, जिससे खेल की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके और परिणाम सटीक व पारदर्शी रहें.


निर्णायक मंडल में उत्तर प्रदेश तीरंदाजी संघ के अधिकारी और राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी निर्णायक मौजूद रहेंगे.


जल्द जारी होगा शुभंकर


खेल को और आकर्षक बनाने के लिए प्रतियोगिता का शुभंकर (Mascot) भी जारी किया जाएगा. यह बच्चों और दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनेगा और प्रतियोगिता की पहचान होगा.


बैठक में अधिकारी रहे मौजूद


तैयारियों की बैठक में जिला ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह, खेल विभाग के उप क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मंजूर आलम अंसारी और अकरम महमूद मौजूद रहे. सभी अधिकारियों ने भरोसा जताया कि वाराणसी में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ खिलाड़ियों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा बल्कि शहर को खेलों के नक्शे पर नई पहचान दिलाएगा.


क्रिकेट में भी तैयारी तेज


खेलों का जोश केवल तीरंदाजी तक सीमित नहीं है. वाराणसी मंडल की क्रिकेट टीम भी तैयारी में जुटी है. आगामी 13 से 19 अक्टूबर तक आजमगढ़ में होने वाली राज्य स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता में मंडल की टीम हिस्सा लेगी. इसके लिए खिलाड़ियों का चयन 10 अक्टूबर को सुबह 9 बजे, सिगरा स्टेडियम में किया जाएगा.आरएसओ विमला सिंह ने बताया कि ट्रायल पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होंगे और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मौका मिलेगा.


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वाराणसी की नई पहचान


वाराणसी को अब केवल अध्यात्म और संस्कृति के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि खेलों की नई राजधानी के रूप में भी देखा जाने लगा है. हाल के वर्षों में यहां खेल सुविधाओं में लगातार वृद्धि हुई है और राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों का सिलसिला शुरू हुआ है. तीरंदाजी की इस प्रतियोगिता से न केवल स्थानीय खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी, बल्कि वाराणसी देशभर के उभरते खिलाड़ियों का गवाह भी बनेगा.यह आयोजन वाराणसी के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जहां इतिहास, अध्यात्म और अब खेल भी एक नई गाथा लिखेंगे.

नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।