अटूट है राधा-कृष्ण का भक्ति-प्रेम, राधा के बिना कृष्ण आधा
भक्ति ये केवल शब्द नहीं वो सुकुन, आनंद जैसा पल है, जो भी इसकी माया में डूब गया वो जीवन भर के लिए प्रभु श्री कृष्ण और प्यारी राधा रानी को समर्पित हो जाता है. भक्ति का ये रस जिसने में पिया, वो संसार की माया से जन्मों-जन्मांतर के लिए भूल जाता है. जी हां, भक्ति वो सब कुछ है जो इस संसार में रहकर भी वो सुकुन नहीं मिलता, जो श्री राधा रानी की भक्ति से मिलता है. क्योंकि, राधा रानी बड़ी ही करूणामयी है, दुनिया भले ही साथ छोड़ दें पर राधा रानी कभी अपने भक्तों का साथ नहीं छोड़ती फिर चाहे कुछ भी हो जाए, ऐसी हैं हमारी राधा रानी.

मेरी भव बाधा हरो राधा
इसी भक्ति में डूबे लेखक विनोद कुमार तिवारी ने बड़ी ही प्यारी बात अपने शब्दों में बयां की है, जी हां, उन्होंने लिखा... मेरी भव बाधा हरो राधा नागरी सोय, जा तन की झाईं परे श्याम हरित दुति होय, बिहारी कवि का यह दोहा महज एक स्तुति मात्र नहीं है, राधा जी को समझने का एक आधार भी है, बरसाना तथा बृज के कण कण राधा नाम से गुंजायमान हैँ, लगता है कि आज भी राधा रानी वृन्दावन में विराजमान हैँ.

राधा के बिना कृष्ण आधा
आज के इस भौतिकवादी युग में भी राधा नाम बहुत लोगों के अंदर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है, युग बदले लोग आये और गये राधा जी का नाम अमर है, अनेक संतो को यह नाम प्रेरणा दे रहा है तथा संत जनों के मन को निरंतर प्रफुल्लित कर रहा है, जीवन में यदि कृष्ण को पाना है तो राधा जी के शरण में जाना ही होगा.

राधा के बिना कृष्ण अधूरा हैँ यह सत्य जान लेने के बाद सारे भ्रम मिट जाते हैँ, कहते हैं क़ी राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं, या यूँ कहिये कि राधा के बिना कृष्ण आधा हैं, राधा जी का नाम युगों-युगों से अनंत लोगों को तार चुका है, आज भी जिसे कृष्ण को पाना है, उसे सर्व प्रथम राधा जी के शरण में जाना होगा, राधे राधे राधे श्याम

इस आर्टिकल के लेखक विनोद कुमार तिवारी मुख्य आयकर आयुक्त (अवकाश प्राप्त) हैं।


